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पोटैशियम, सोडियम और अमोनियम नाइट्रेट से तैयार किया था विस्फोटक, सैर करने वाले थे टारगेट
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पोटैशियम, सोडियम और अमोनियम नाइट्रेट से बम बनाकर चार माह पहले आईएमटी में धमाका किया गया था। बम बनाकर रखने वाले का टारगेट हर रोज सैर के लिए आने वाले लोग थे। जिला पुलिस के पास मधुबन लैब से आई फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। अमोनियम नाइट्रेट एक अकार्बनिक यौगिक है। इसका प्रयोग फसलों में उर्वरक से लेकर विस्फोट करने तक के लिए किया जाता है। एएसपी का कहना है कि धमाके के पीछे किसी बाहरी साजिश का सुराग नहीं मिला है। ऐसे में किसी स्थानीय व्यक्ति ने रंजिश रखते हुए विस्फोट किया है। अब मामले की जांच आईएमटी थाना पुलिस कर रही है।
पुलिस के मुताबिक खरावड़ गांव निवासी राजकुमार ने 31 जुलाई को दी शिकायत में बताया था कि उसकी गांव में बिजली उपकरण की दुकान है। हर रोज की तरह सुबह करीब साढ़े पांच बजे आईएमटी में मास्टर शिवराम गौतम के खेत में घूमने गया था। क्योंकि वहां पर पानी का नलका है। वहां पर गांव का सुभाष व गीतादत्त गौतम भी था। नरेश बोतल में पानी भरकर चला गया था। उसने देखा कि नलके के पास एक पॉलिथीन पड़ा है। उसने गीतादत्त से कहा पता नहीं, इसमें क्या है। गीतादत्त ने कहा कि पड़ा रहने दे, तुझे क्या है। बावजूद इसके राजकुमार ने थैली उठा ली। उठाते ही जोरदार धमाका हुआ। इससे राजकुमार के चेहरे से खून बहने लगा। तत्काल उसे साथियों ने पीजीआई में दाखिल कराया। बाद में राजकुमार की आंखों की रोशनी कम हो गई।
एनआईए कर चुकी है जांच, नहीं हुआ खुलासा
स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक 16 दिन पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मात्र 60 किलोमीटर दूर हुए धमाके की गूंज दिल्ली व चंडीगढ़ तक पहुंची। खुद एनआईए (राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी) की टीम रोहतक पहुंची। इस दौरान न केवल घटनास्थल का निरीक्षण किया, बल्कि घायल से भी पूछताछ की। एएसपी कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। बावजूद इसके अभी तक विस्फोटक पदार्थ रखने वाले का सुराग नहीं लग सका है।
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घायल बोला, एक आंख चली गई, अभी तक नहीं मिली आर्थिक सहायता
विस्फोट में घायल खरावड़ निवासी 58 वर्षीय राजकुमार का कहना है कि उसकी बायीं आंख की रोशनी चली गई। रोहतक पीजीआई के बाद दिल्ली में जांच करवाई, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि आंख की नस कमजोर हो गई हैं। इस कारण दोबारा रोशनी आने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में अब चेन्नई के एक डॉक्टर के पास भतीजे ने कागजात भेजे हैं, लेकिन आर्थिक हालत खराब होने के कारण उपचार में परेशानी आ रही है। क्योंकि घायल होने के बाद से दुकान भी बंद हैं। डीसी के पास आर्थिक सहायता के लिए गया था। उन्होंने समाज कल्याण विभाग को भेजा। विभाग के अधिकारियों ने ढाई हजार प्रति माह की पेंशन बनाई है, लेकिन अभी तक मिली नहीं है। अगर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।
31 जुलाई को खरावड़ के पास आईएमटी में हुए बम धमाके की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आ गई है। लग रहा है कि विस्फोटक स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति ने रंजिश रखते हुए टारगेट बनाकर रखा था। इसके लिए पोटैशियम, सोडियम और अमोनियम नाइट्रेट का प्रयोग किया गया था। विस्फोटक बनाकर उसे बैटरी से जोड़ा गया। साथ ही उसे धागे से बांध दिया गया था। जैसे ही थैली उठाई तो धागे से खिंचाव हुआ। तुरंत बैटरी से करंट मिलने से विस्फोटक पदार्थ में धमाका हो गया। आईएमटी थाना पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है।
- कृष्ण कुमार, एएसपी एवं तत्कालीन एसआईटी इंचार्ज
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पुलिस के मुताबिक खरावड़ गांव निवासी राजकुमार ने 31 जुलाई को दी शिकायत में बताया था कि उसकी गांव में बिजली उपकरण की दुकान है। हर रोज की तरह सुबह करीब साढ़े पांच बजे आईएमटी में मास्टर शिवराम गौतम के खेत में घूमने गया था। क्योंकि वहां पर पानी का नलका है। वहां पर गांव का सुभाष व गीतादत्त गौतम भी था। नरेश बोतल में पानी भरकर चला गया था। उसने देखा कि नलके के पास एक पॉलिथीन पड़ा है। उसने गीतादत्त से कहा पता नहीं, इसमें क्या है। गीतादत्त ने कहा कि पड़ा रहने दे, तुझे क्या है। बावजूद इसके राजकुमार ने थैली उठा ली। उठाते ही जोरदार धमाका हुआ। इससे राजकुमार के चेहरे से खून बहने लगा। तत्काल उसे साथियों ने पीजीआई में दाखिल कराया। बाद में राजकुमार की आंखों की रोशनी कम हो गई।
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एनआईए कर चुकी है जांच, नहीं हुआ खुलासा
स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक 16 दिन पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मात्र 60 किलोमीटर दूर हुए धमाके की गूंज दिल्ली व चंडीगढ़ तक पहुंची। खुद एनआईए (राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी) की टीम रोहतक पहुंची। इस दौरान न केवल घटनास्थल का निरीक्षण किया, बल्कि घायल से भी पूछताछ की। एएसपी कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। बावजूद इसके अभी तक विस्फोटक पदार्थ रखने वाले का सुराग नहीं लग सका है।
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घायल बोला, एक आंख चली गई, अभी तक नहीं मिली आर्थिक सहायता
विस्फोट में घायल खरावड़ निवासी 58 वर्षीय राजकुमार का कहना है कि उसकी बायीं आंख की रोशनी चली गई। रोहतक पीजीआई के बाद दिल्ली में जांच करवाई, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि आंख की नस कमजोर हो गई हैं। इस कारण दोबारा रोशनी आने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में अब चेन्नई के एक डॉक्टर के पास भतीजे ने कागजात भेजे हैं, लेकिन आर्थिक हालत खराब होने के कारण उपचार में परेशानी आ रही है। क्योंकि घायल होने के बाद से दुकान भी बंद हैं। डीसी के पास आर्थिक सहायता के लिए गया था। उन्होंने समाज कल्याण विभाग को भेजा। विभाग के अधिकारियों ने ढाई हजार प्रति माह की पेंशन बनाई है, लेकिन अभी तक मिली नहीं है। अगर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाऊंगा।
31 जुलाई को खरावड़ के पास आईएमटी में हुए बम धमाके की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आ गई है। लग रहा है कि विस्फोटक स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति ने रंजिश रखते हुए टारगेट बनाकर रखा था। इसके लिए पोटैशियम, सोडियम और अमोनियम नाइट्रेट का प्रयोग किया गया था। विस्फोटक बनाकर उसे बैटरी से जोड़ा गया। साथ ही उसे धागे से बांध दिया गया था। जैसे ही थैली उठाई तो धागे से खिंचाव हुआ। तुरंत बैटरी से करंट मिलने से विस्फोटक पदार्थ में धमाका हो गया। आईएमटी थाना पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है।
- कृष्ण कुमार, एएसपी एवं तत्कालीन एसआईटी इंचार्ज