{"_id":"661d4d0759bf00c8d40c3cc8","slug":"election-story-of-tau-devilal-in-1978-from-karnal-lok-sabha-amar-ujala-archive-2024-04-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Politics: अमर उजाला आर्काइव; उपचुनाव में अपना प्रत्याशी जितवाकर देवीलाल ने भितरघातियों को आईना दिखाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Politics: अमर उजाला आर्काइव; उपचुनाव में अपना प्रत्याशी जितवाकर देवीलाल ने भितरघातियों को आईना दिखाया
Mon, 15 Apr 2024 09:21 PM IST
भूपेंद्र सिंह
योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 15 Apr 2024 09:21 PM IST
सार
1978 में करनाल लोकसभा सीट पर जनता पार्टी उम्मीदवार की जीत से हरियाणा की सियासत में ताऊ मजबूत हुए थे।
विज्ञापन
ताऊ देवीलाल फाइल फोटो। अमर उजाला आर्काइव से 6 अप्रैल 1978 के पेज में छपा समाचार।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा की सियासत में ताऊ के नाम से चर्चित चौधरी देवीलाल पहली बार मुख्यमंत्री भले ही 21 जून 1977 को बने थे, लेकिन किंगमेकर के रूप पहचान 1978 में हुए करनाल लोकसभा के उपचुनाव से बननी शुरू हो गई थी। इस उपचुनाव में अपने दल के विधायकों के विरोध के बावजूद वह जनता पार्टी के उम्मीदवार महेन्द्र सिंह लाठेर को जिताने में कामयाब रहे थे। इस जीत से उत्साहित देवीलाल ने अपने दल के भितरघाती नेताओं की ओर इशारा कर उनकी शिकायत जनता पार्टी के नेताओं से करने की घोषणा कर दी थी।
विज्ञापन
अमर उजाला के 6 अप्रैल, 1978 के पेज-1 पर प्रकाशित खबर का शीर्षक ‘चुनाव जीतते ही देवीलाल का पार्टी के अंदर अपने विरोधिया पर हमला शुरू’ ही ताऊ के राजनीतिक तेवरों को दर्शाता है। पांच अप्रैल 1978 को करनाल संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव का परिणाम आया और इसमें जनता पार्टी के उम्मीदवार महेन्द्र सिंह ने इंदिरा कांग्रेस के प्रत्याशी को 18397 मतों से हरा दिया।
विज्ञापन
इसके बाद उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री देवीलाल ने बाकायदा मीडिया को बुलाकर कहा कि जनता पार्टी के कतिपय विधायकों और नेताओं ने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के लिए साधन जुटाए। इसलिए वह अपने दल के केंद्रीय नेताओं से मिलकर इस विषय में प्रतिवेदन देंगे। उन्होंने बताया कि विधायक के साथ न देने से समालखा क्षेत्र में इंदिरा कांग्रेस के उम्मीदवार को 2373 मत ज्यादा मिले। इसी मौके पर उन्होंने अपनी रणनीति और बड़े इरादों को रखते हुए कहा था कि जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर वह भितरघातियों को आईना दिखाएंगे।
विज्ञापन
1978 में डाक के वोट कांग्रेस प्रत्याशी को ज्यादा मिले, पर जीती जनता पार्टी
2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में डाक से आए वोट एक पार्टी के पक्ष में ज्यादा पड़ने की चर्चा रही थी। लेकिन, जब आप अमर उजाला का 6 अप्रैल 1978 का अंक देखेंगे तो समझ में आएगा कि डाक के वोट उस समय कितना मायने रखते थे। करनाल लोकसभा उपचुनाव में जनता पार्टी या कहें कि देवीलाल के प्रत्याशी को प्रतिद्वंद्वी इंदिरा कांग्रेस के उम्मीदवार से 18431 मत ज्यादा मिले थे। लेकिन, जब डाक से आए वोट गिने गए तो इंदिरा कांग्रेस को जनता पार्टी से 52 वोट ज्यादा मिले। इस तरह जनता पार्टी के उम्मीदवार की जीत का अंतर घटकर 18379 मत रह गया। इस उपचुनाव में 278 वोट डाक से आए थे।