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Rohtak News: रोहतक के घरों को रोशन करेंगे राजस्थान की मिट्टी से बने दीये

Fri, 17 Oct 2025 02:58 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Fri, 17 Oct 2025 02:58 AM IST
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Earthen lamps made from Rajasthan will light up the homes of Rohtak.
02...दिल्ली रोड पर दिया खरीदती महिला। संवाद
रोहतक। दिवाली पर्व की रौनक में राजस्थान की मिट्टी के डिजाइनर दीये चार चांद लगाएंगे। अपनी परंपरा व कला को जीवित रखने के साथ जीवनयापन के लिए जोधपुर के पीपाड़ शहर से परिवार दीये बेचने आए हैं। इनमें सुरेश कुमार अपने भाई प्रेम कुमार के साथ हर वर्ष दीये तैयार करते हैं।
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सुरेश बताते हैं कि वे तीन महीने पहले से दीये बनाने का काम शुरू कर देते हैं। मिट्टी वहां के तालाब से निकालते हैं। जब तालाब का पानी सूख जाता है तो नीचे बची मुलायम मिट्टी को निकालते हैं जिससे दीये बनाए जाते हैं। वह मिट्टी दीये के लिए उपयुक्त होती है। वह अपने भाई प्रेम कुमार के साथ मिलकर हर साल करीब डेढ़ लाख दीये बनाते हैं।
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यह उनका खानदानी पेशा है। इसे वह पीढ़ियों से निभा रहे हैं। सुरेश बताते हैं कि हमारा परिवार कई पीढ़ियों से कुम्हार का काम कर रहा है। पहले वह 2021 में हिसार में दीये बेचे थे। इसके बाद से हर साल रोहतक आने लगे। यहां के लोग मिट्टी के दीये को खरीदने को प्राथमिकता देते हैं।
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सुरेश और प्रेम ने अब तक इस सीजन में ही करीब 80 हजार दीपक बेच दिए हैं। वहीं उनके बड़े भाई पटियाला में दीये लेकर पहुंचे हैं। वह लगभग 90 हजार दीये बेचे हैं।
सुरेश बताते हैं कि हम महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में दीये भेजते हैं। इससे हमें अच्छा मुनाफा होता है। सालभर की मेहनत सफल हो जाती है। दीयों की डिजाइन की बात करें तो सुरेश और उनका परिवार 60 से अधिक प्रकार के दीपक बनाते हैं।
इनमें पान के पत्ते के आकार के दीपक, ओम आकार के दीपक, शंखदीप, कमलदीप, तितली दीप, चकरी दीप और आकाशदीप लैंप शामिल हैं। हर दीपक में कला, श्रम और आस्था का अद्भुत मेल झलकता है।

सुरेश बताते हैं कि हम लक्ष्मी-गणेश की मिट्टी की मूर्तियां भी बनाते हैं। इनकी कीमत 120 से 180 रुपये तक होती है। साधारण दीपक 60 रुपये दर्जन बिकता है जबकि आकाशदीप 80 से 180 रुपये तक बिकता है।


इस दिवाली भी सुरेश जैसे कारीगरों की मेहनत से न केवल बाजार सज रहे हैं बल्कि हमारी संस्कृति की रोशनी भी चारों ओर फैल रही है। मिट्टी के ये दीपक याद दिलाते हैं कि रोशनी की असली चमक परंपरा और श्रम से ही आती है।
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