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पहले डिप्रेशन और फोबिया के आते थे 100 मरीज, अब 250
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कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के साथ ही पीजीआईएमएस के मनोरोग विभाग की इमरजेंसी में रोगियों की संख्या करीब 250 पहुंच गई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे ज्यादा रोगी डिप्रेशन, फोबिया, एंजाइटी के आ रहे हैं। वहीं, डॉक्टरों की टीम ऑनलाइन उपचार कर रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में ऑनलाइन मिड टर्म सीएसई का आयोजन किया था। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना महामारी लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसका असर कितना पड़ा है, जिसके बारे में जनजीवन सामान्य होने के बाद पता चलेगा। हालांकि अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ फिर भी मनोरोग विभाग की इमरजेंसी में रोगियों की संख्या दो-तीन दिन से एकदम बढ़ गई है। रोगियों के उपचार के लिए आने का क्रम औसतन 250 हो गया है, जो पहले 50-100 था। डॉक्टरों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से पहले से उपचार करवा रहे मरीज नहीं आए थे, वह भी आने लगे हैं। मगर नए मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। इमरजेंसी ओपीडी में आने वालों में ज्यादा फोबिया, डिप्रेशन व एंजाइटी की शिकायत है, जिनका उपचार किया जा रहा है। डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि इमरजेंसी ओपीडी में रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो औसतन 250 पहुंच गई है।
पुराने रोगियों के लिए शुरू की ऑनलाइन सुविधा
मनोविज्ञान विभाग में इमरजेंसी ओपीडी सुविधा तो शुरू हो गई है मगर पहले से इलाज करवा रहे मरीजों के लिए ऑनलाइन परामर्श की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके तहत रोगी व्हाट्सएप नंबर 9518405493 पर मैसेज करेगा। इसमें रोगी का नाम, फोन नंबर, मनोरोग विभाग का रजिस्ट्रेशन नंबर भेजेगा। मैसेज मिलने के बाद विभाग की टीम रोगी को व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के माध्यम से समय की जानकारी देकर परामर्श देंगे। यह काम डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. योगेंद्र मलिक, डॉ. शिप्रा आदि कर रहे हैं।
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कैप्स टीम मरीजों व तीमारदारों को कर रही जागरूक
मनोरोग विभाग की कैप्स टीम इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक करने में जुटी है। टीम के सदस्य डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. पुरुषोत्तम, डॉ. विनय कुमार, डॉ. सुनीला आदि हैं। यह टीम तीमारदारों को रोगी के साथ किस तरह का व्यवहार करना है, इसके प्रति जागरूक करने में जुटी है। मंगलवार को टीम ने वृद्धों को कैसे खुश रखना है, इसके बारे में बताया।
कोरोना होने पर परिजन हुए दूर, बिगड़ा मानसिक संतुलन
कोरोना के फोबिया की वजह से जब परिवार ने दूरी बनाई तो अकेला पड़ा वृद्ध मानसिक रोग का शिकार हो गया। डॉक्टरों ने जब काउंसिलिंग की तो हकीकत सामने आई। डॉक्टरों ने दवा देने के बजाय वृद्ध से परिजनों को मिलवाया, जिससे वह एक सप्ताह में ही ठीक हो गया। पीजीआईएमएस के डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि कुछ दिन पहले भिवानी से एक वृद्ध को उपचार के लिए लाया गया। परिजनों ने बताया कि वृद्ध का मानसिक संतुलन खराब हो गया है, जिसकी वजह से काफी परेशानी हो रही है। जब डॉक्टरों ने वृद्ध की काउंसिलिंग की तो कोरोना फोबिया की बात सामने आई। पता चला कि वृद्ध को कोरोना हुआ था, जिसकी वजह से परिजनों ने उसे घर से अलग-थलग कर दिया। एक कमरे के अंदर वृद्ध को रखा और बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी। परिवार के सदस्य भी उससे न मिलते और न बात करते। करीब तीन माह तक कमरे में रहने की वजह से वृद्ध का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। हकीकत सामने आने के बाद डॉक्टरों ने दवा देने के बजाय साथ आए पुत्र को समझाते हुए वृद्ध से गले मिलवाया। परिजनों को बताया कि यही उसकी दवा और उपचार है। करीब सप्ताह भर परिजनों ने उसे साथ रखा जिससे वह सही हो गया।
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मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में ऑनलाइन मिड टर्म सीएसई का आयोजन किया था। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना महामारी लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसका असर कितना पड़ा है, जिसके बारे में जनजीवन सामान्य होने के बाद पता चलेगा। हालांकि अभी कोरोना खत्म नहीं हुआ फिर भी मनोरोग विभाग की इमरजेंसी में रोगियों की संख्या दो-तीन दिन से एकदम बढ़ गई है। रोगियों के उपचार के लिए आने का क्रम औसतन 250 हो गया है, जो पहले 50-100 था। डॉक्टरों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से पहले से उपचार करवा रहे मरीज नहीं आए थे, वह भी आने लगे हैं। मगर नए मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। इमरजेंसी ओपीडी में आने वालों में ज्यादा फोबिया, डिप्रेशन व एंजाइटी की शिकायत है, जिनका उपचार किया जा रहा है। डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि इमरजेंसी ओपीडी में रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो औसतन 250 पहुंच गई है।
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पुराने रोगियों के लिए शुरू की ऑनलाइन सुविधा
मनोविज्ञान विभाग में इमरजेंसी ओपीडी सुविधा तो शुरू हो गई है मगर पहले से इलाज करवा रहे मरीजों के लिए ऑनलाइन परामर्श की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके तहत रोगी व्हाट्सएप नंबर 9518405493 पर मैसेज करेगा। इसमें रोगी का नाम, फोन नंबर, मनोरोग विभाग का रजिस्ट्रेशन नंबर भेजेगा। मैसेज मिलने के बाद विभाग की टीम रोगी को व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के माध्यम से समय की जानकारी देकर परामर्श देंगे। यह काम डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. योगेंद्र मलिक, डॉ. शिप्रा आदि कर रहे हैं।
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कैप्स टीम मरीजों व तीमारदारों को कर रही जागरूक
मनोरोग विभाग की कैप्स टीम इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक करने में जुटी है। टीम के सदस्य डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. पुरुषोत्तम, डॉ. विनय कुमार, डॉ. सुनीला आदि हैं। यह टीम तीमारदारों को रोगी के साथ किस तरह का व्यवहार करना है, इसके प्रति जागरूक करने में जुटी है। मंगलवार को टीम ने वृद्धों को कैसे खुश रखना है, इसके बारे में बताया।
कोरोना होने पर परिजन हुए दूर, बिगड़ा मानसिक संतुलन
कोरोना के फोबिया की वजह से जब परिवार ने दूरी बनाई तो अकेला पड़ा वृद्ध मानसिक रोग का शिकार हो गया। डॉक्टरों ने जब काउंसिलिंग की तो हकीकत सामने आई। डॉक्टरों ने दवा देने के बजाय वृद्ध से परिजनों को मिलवाया, जिससे वह एक सप्ताह में ही ठीक हो गया। पीजीआईएमएस के डॉ. पुरुषोत्तम ने बताया कि कुछ दिन पहले भिवानी से एक वृद्ध को उपचार के लिए लाया गया। परिजनों ने बताया कि वृद्ध का मानसिक संतुलन खराब हो गया है, जिसकी वजह से काफी परेशानी हो रही है। जब डॉक्टरों ने वृद्ध की काउंसिलिंग की तो कोरोना फोबिया की बात सामने आई। पता चला कि वृद्ध को कोरोना हुआ था, जिसकी वजह से परिजनों ने उसे घर से अलग-थलग कर दिया। एक कमरे के अंदर वृद्ध को रखा और बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी। परिवार के सदस्य भी उससे न मिलते और न बात करते। करीब तीन माह तक कमरे में रहने की वजह से वृद्ध का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। हकीकत सामने आने के बाद डॉक्टरों ने दवा देने के बजाय साथ आए पुत्र को समझाते हुए वृद्ध से गले मिलवाया। परिजनों को बताया कि यही उसकी दवा और उपचार है। करीब सप्ताह भर परिजनों ने उसे साथ रखा जिससे वह सही हो गया।