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Rohtak News: ऑपरेशन सिंदूर के वक्त नापाक दुश्मन के विमानों पर नजरें गड़ाए थे जांबाज लोकेन्दर
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रोहतक के देव कॉलोनी निवासी पायलट लोकेन्दर सिंह सिंधू परिवार के साथ। बाईं ओर लोकेन्दर, पिता जोग
- फोटो : रोहतक के देव कॉलोनी निवासी पायलट लोकेन्दर सिंह सिंधू।
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। राजस्थान के चूरू में बुधवार दोपहर लड़ाकू विमान जगुआर के क्रैश हो जाने से शहीद पायलट लोकेन्दर सिंह सिंधू (33) ऑपरेशन सिंदूर का भी हिस्सा थे। एयर स्ट्राइक के वक्त वह बॉर्डर पर नापाक दुश्मन के विमानों पर नजरें गड़ाए रहे थे। सूरतगढ़ में तैनात लोकेन्दर ने बलिदान से करीब तीन घंटे पहले ही अपने 29 दिन के बेटे का चेहरा देखा था। अब तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह वीरवार को यहां पहुंचेगी।
मूल रूप से खेड़ी साध के रहने वाले जोगेन्दर सिंह एमडीयू में अधीक्षक के पद से पांच साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। तीन भाई-बहनों में लोकेन्दर सबसे छोटे थे। बड़े भाई ज्ञानेन्दर सिंह निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर हैं। बहन अंशी भी फ्लाइट लेफ्टिनेंट रहकर अब निजी कंपनी में काम कर रही हैं।
वायुसेना में 2015 में पायलट बने लोकेन्दर की ड्यूटी राजस्थान के सूरतगढ़ में थी। वह स्क्वाड्रन लीडर थे। उनका जिम्मा उड़ानों का नेतृत्व, प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों की देखरेख का था।
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इसी कारण पहलगाम में आतंकी हमले के बाद जब वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया तो उनकी ड्यूटी दुश्मन के विमानों पर नजर रखने की लगाई गई। बड़े भाई ज्ञानेन्दर सिंह ने बताया कि वह को-पायलट को ट्रेनी जगुआर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। इसी समय न जाने क्या हुआ कि विमान क्रैश हो गया। उनकी अंत्येिष्ट वीरवार को कहां होगी, यह देर शाम तक तय नहीं हो सका था।
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रोहतक। राजस्थान के चूरू में बुधवार दोपहर लड़ाकू विमान जगुआर के क्रैश हो जाने से शहीद पायलट लोकेन्दर सिंह सिंधू (33) ऑपरेशन सिंदूर का भी हिस्सा थे। एयर स्ट्राइक के वक्त वह बॉर्डर पर नापाक दुश्मन के विमानों पर नजरें गड़ाए रहे थे। सूरतगढ़ में तैनात लोकेन्दर ने बलिदान से करीब तीन घंटे पहले ही अपने 29 दिन के बेटे का चेहरा देखा था। अब तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह वीरवार को यहां पहुंचेगी।
मूल रूप से खेड़ी साध के रहने वाले जोगेन्दर सिंह एमडीयू में अधीक्षक के पद से पांच साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। तीन भाई-बहनों में लोकेन्दर सबसे छोटे थे। बड़े भाई ज्ञानेन्दर सिंह निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर हैं। बहन अंशी भी फ्लाइट लेफ्टिनेंट रहकर अब निजी कंपनी में काम कर रही हैं।
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वायुसेना में 2015 में पायलट बने लोकेन्दर की ड्यूटी राजस्थान के सूरतगढ़ में थी। वह स्क्वाड्रन लीडर थे। उनका जिम्मा उड़ानों का नेतृत्व, प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों की देखरेख का था।
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इसी कारण पहलगाम में आतंकी हमले के बाद जब वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया तो उनकी ड्यूटी दुश्मन के विमानों पर नजर रखने की लगाई गई। बड़े भाई ज्ञानेन्दर सिंह ने बताया कि वह को-पायलट को ट्रेनी जगुआर विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। इसी समय न जाने क्या हुआ कि विमान क्रैश हो गया। उनकी अंत्येिष्ट वीरवार को कहां होगी, यह देर शाम तक तय नहीं हो सका था।