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Rohtak News: भ्रष्टाचार के कारण आत्मा गवाही नहीं देती कि पीजीआई में काम करूं... लिख दिया इस्तीफा
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। पीजीआई में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर परचेज सेक्शन के डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश ने इस्तीफा दे दिया है। पत्र में लिखा-यहां फैले भ्रष्टाचार के कारण मेरी आत्मा गवाही नहीं देती कि मैं पीजीआई में काम करूं। इससे आहत होकर नौकरी से त्याग पत्र दे रहा हूं।
सोनीपत के गढ़ी सिसाना निवासी डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश का इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल है। हालांकि, इसकी अमर उजाला किसी तरह की पुष्टि नहीं करता है।
पत्र में लिखा है कि वर्ष 2019 में उसने बड़े चाव से नौकरी की जिम्मेदारी संभाली थी। यहां भ्रष्टाचार फैला हुआ है। उसने स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचके अग्रवाल, पीजीआई निदेशक डाॅ. एसके सिंघल, सीओएफ राजेश, एओ सचदेवा, एसओ आशा व देवदत्त पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।
पहले भी लग हैं आरोप
पीजीआई में आयुष्मान कार्ड से अमीरों का इलाज करने का खुलासा हुआ था। इस मामले में सीएम फ्लाइंग ने छापा मार कर रिकॉर्ड जब्त किया था। कुछ चिकित्सकों को भी जांच के दायरे में लिया गया था। इसकी रिपोर्ट व कार्रवाई दोनों लंबित हैं।
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गायब हो गए करोड़ों के इंप्लांट
पीजीआई के हड्डी रोग विभाग में करोड़ों रुपये के इंप्लांट के मामले का खुलासा हुआ था। जांच में करीब पांच करोड़ रुपये का इंप्लाइंट मिला था। मेडिकल मोड़ स्थित दवा विक्रेता की दुकान से लाया गया। गिरोह सीधे मरीज से ऑपरेशन के सामान की सूची लेकर सामान मुहैया करता था। इस मामले में जांच के नाम पर मामला खिंचता रहा और इंप्लांट भी गायब होता गया।
कर्मचारियों का वेतन घोटाला
पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारियों ने करीब सौ करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। कर्मचारी भ्रष्टाचार के खुलासे व खुद को एचकेआरएन के तहत समायोजित करने की मांग को लेकर करीब डेढ़ माह से हड़ताल पर बैठे हैं।
शीर्ष अफसरों ने साधी चुप्पी
आरोपाें पर संस्थान के शीर्ष अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। अमर उजाला ने कुलपति से लेकर दूसरे अधिकारियों को वायरल पत्र भेजा, मैसेज किया, फोन भी लगाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इस प्रकरण पर फोन किया
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रोहतक। पीजीआई में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर परचेज सेक्शन के डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश ने इस्तीफा दे दिया है। पत्र में लिखा-यहां फैले भ्रष्टाचार के कारण मेरी आत्मा गवाही नहीं देती कि मैं पीजीआई में काम करूं। इससे आहत होकर नौकरी से त्याग पत्र दे रहा हूं।
सोनीपत के गढ़ी सिसाना निवासी डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश का इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल है। हालांकि, इसकी अमर उजाला किसी तरह की पुष्टि नहीं करता है।
पत्र में लिखा है कि वर्ष 2019 में उसने बड़े चाव से नौकरी की जिम्मेदारी संभाली थी। यहां भ्रष्टाचार फैला हुआ है। उसने स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचके अग्रवाल, पीजीआई निदेशक डाॅ. एसके सिंघल, सीओएफ राजेश, एओ सचदेवा, एसओ आशा व देवदत्त पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।
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पहले भी लग हैं आरोप
पीजीआई में आयुष्मान कार्ड से अमीरों का इलाज करने का खुलासा हुआ था। इस मामले में सीएम फ्लाइंग ने छापा मार कर रिकॉर्ड जब्त किया था। कुछ चिकित्सकों को भी जांच के दायरे में लिया गया था। इसकी रिपोर्ट व कार्रवाई दोनों लंबित हैं।
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गायब हो गए करोड़ों के इंप्लांट
पीजीआई के हड्डी रोग विभाग में करोड़ों रुपये के इंप्लांट के मामले का खुलासा हुआ था। जांच में करीब पांच करोड़ रुपये का इंप्लाइंट मिला था। मेडिकल मोड़ स्थित दवा विक्रेता की दुकान से लाया गया। गिरोह सीधे मरीज से ऑपरेशन के सामान की सूची लेकर सामान मुहैया करता था। इस मामले में जांच के नाम पर मामला खिंचता रहा और इंप्लांट भी गायब होता गया।
कर्मचारियों का वेतन घोटाला
पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारियों ने करीब सौ करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। कर्मचारी भ्रष्टाचार के खुलासे व खुद को एचकेआरएन के तहत समायोजित करने की मांग को लेकर करीब डेढ़ माह से हड़ताल पर बैठे हैं।
शीर्ष अफसरों ने साधी चुप्पी
आरोपाें पर संस्थान के शीर्ष अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। अमर उजाला ने कुलपति से लेकर दूसरे अधिकारियों को वायरल पत्र भेजा, मैसेज किया, फोन भी लगाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इस प्रकरण पर फोन किया