फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Due to corruption, my soul does not allow me to work in PGI... I wrote my resignation

Rohtak News: भ्रष्टाचार के कारण आत्मा गवाही नहीं देती कि पीजीआई में काम करूं... लिख दिया इस्तीफा

Tue, 22 Jul 2025 02:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jul 2025 02:16 AM IST
विज्ञापन
Due to corruption, my soul does not allow me to work in PGI... I wrote my resignation
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

रोहतक। पीजीआई में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर परचेज सेक्शन के डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश ने इस्तीफा दे दिया है। पत्र में लिखा-यहां फैले भ्रष्टाचार के कारण मेरी आत्मा गवाही नहीं देती कि मैं पीजीआई में काम करूं। इससे आहत होकर नौकरी से त्याग पत्र दे रहा हूं।
सोनीपत के गढ़ी सिसाना निवासी डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश का इस्तीफा सोशल मीडिया पर वायरल है। हालांकि, इसकी अमर उजाला किसी तरह की पुष्टि नहीं करता है।
पत्र में लिखा है कि वर्ष 2019 में उसने बड़े चाव से नौकरी की जिम्मेदारी संभाली थी। यहां भ्रष्टाचार फैला हुआ है। उसने स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचके अग्रवाल, पीजीआई निदेशक डाॅ. एसके सिंघल, सीओएफ राजेश, एओ सचदेवा, एसओ आशा व देवदत्त पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन


पहले भी लग हैं आरोप
पीजीआई में आयुष्मान कार्ड से अमीरों का इलाज करने का खुलासा हुआ था। इस मामले में सीएम फ्लाइंग ने छापा मार कर रिकॉर्ड जब्त किया था। कुछ चिकित्सकों को भी जांच के दायरे में लिया गया था। इसकी रिपोर्ट व कार्रवाई दोनों लंबित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गायब हो गए करोड़ों के इंप्लांट

पीजीआई के हड्डी रोग विभाग में करोड़ों रुपये के इंप्लांट के मामले का खुलासा हुआ था। जांच में करीब पांच करोड़ रुपये का इंप्लाइंट मिला था। मेडिकल मोड़ स्थित दवा विक्रेता की दुकान से लाया गया। गिरोह सीधे मरीज से ऑपरेशन के सामान की सूची लेकर सामान मुहैया करता था। इस मामले में जांच के नाम पर मामला खिंचता रहा और इंप्लांट भी गायब होता गया।

कर्मचारियों का वेतन घोटाला
पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारियों ने करीब सौ करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। कर्मचारी भ्रष्टाचार के खुलासे व खुद को एचकेआरएन के तहत समायोजित करने की मांग को लेकर करीब डेढ़ माह से हड़ताल पर बैठे हैं।

शीर्ष अफसरों ने साधी चुप्पी
आरोपाें पर संस्थान के शीर्ष अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। अमर उजाला ने कुलपति से लेकर दूसरे अधिकारियों को वायरल पत्र भेजा, मैसेज किया, फोन भी लगाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इस प्रकरण पर फोन किया
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed