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सावधानी से चलाएं वाहन, तेज रफ्तार लील रही जिंदगी
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बालंद चौक के पास हुए सड़क हादसे के बाद मौके पर खड़ा डंपर। विज्ञप्ति
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सावधान! सड़क पर सावधानी के साथ वाहन लेकर निकलें। क्योंकि आपकी जरा सी लापरवाही आपके ऊपर ही नहीं, दूसरों पर भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में खुद के परिवार के साथ-साथ दूसरों के बारे में भी सोचें, जिन्होंने असमय अपनों को खो दिया। जिले के अंदर मात्र दो सप्ताह में तेज रफ्तार वाहनों ने छह लोगों की जिंदगी ली ली। अब उनके बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
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डंपर की तेज रफ्तार ने छीन लिया तीन माह की माही का पिता
शिमली गांव निवासी विकास ने बताया कि उनके चाचा जयकिशन (42) फैक्टरी में नौकरी करते थे। साथ ही दो साल पहले ही यूपी में विवाह किया था। उनकी तीन माह की बेटी माही है। बुधवार सुबह वह चाचा के साथ स्कूटी पर रोहतक आया था। करीब आठ बजे दोनों लौट रहे थे। वह स्कूटी चला रहा था, जबकि उनके चाचा जयकिशन पीछे बैठे थे। झज्जर रोड पर नामदेव चौक से आगे बालसमंद चौक से पहले उसने स्कूटी रोकी और शौच के लिए सड़क किनारे चला गया। उनके चाचा जयकिशन स्कूटी के पास खड़े थे। इसी बीच पीछे से डंपर तेज गति से आया और उनके चाचा को टक्कर मार दी। चालक थोड़ा आगे डंपर छोड़कर फरार हो गया। उनके चाचा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। विकास ने बताया कि डंपर चालक की लापरवाही से एक परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। तीन माह की बेटी को अहसास नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि उनकी चाची इंदू भी बेहाल हैं।
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राजमिस्त्री के परिवार के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट
भैणीभेरो के अजय बताते हैं कि उनके चाचा बलवान सिंह (44) राजमिस्त्री थे। सुबह काम पर जाने के बाद शाम को बाइक पर घर आ जाते थे। 13 फरवरी की शाम को बाइक पर जब घर आ रहे थे। रास्ते में सामने से आ रही दूसरी बाइक के चालक ने तेज गति से ड्राइविंग करते हुए उनके चाचा की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से उनके सिर में गंभीर चोट आई। वह मौके पर पहुंचा तो उनके चाचा लहूलुहान हालत में थे। बाइक साइड में पड़ी थी। तत्काल वह चाचा को पीजीआई ले गया, जहां उनकी मौत हो गई। उनके चाचा के तीन बच्चे हैं। एक 16 साल का तो दो की उम्र 12 व 8 वर्ष है। वे परिवार में अकेले कमाने वाले थे। आय के दूसरे साधन नहीं हैं। दूसरों की लापरवाही ने उनके चाचा के परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। साथ ही तीन बच्चों के सिर पर अब पिता का साया नहीं रहा। ऐसे में सड़क पर निकलते समय लापरवाही न बरतें। किसी की लापरवाही न केवल खुद, बल्कि दूसरों पर भी भारी पड़ जाती है।
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एक ट्रैक्टर चालक की लापरवाही तीन परिवारों पर पड़ी भारी
शहर के चुन्नीपुरा निवासी विवेक कौशिक एसी की एजेंसी चलाते थे, जिसके पास दूसरे युवक भी नौकरी करते थे। पांच फरवरी को विवेक भिवानी में एसी लगाने के लिए गया था। साथ में बोहर निवासी योगेश, चुन्नीपुरा निवासी सोमबीर व ओल्ड आईटीआई निवासी पंकज भी थे। चारों काम पूरा होने के बाद कार से रोहतक लौट रहे थे। लाहली गांव के नजदीक आगे एक ट्रैक्टर चालक गन्ने से भरी दो ट्रॉली जोड़कर चल रहा था। पिछली ट्रॉली गलत ड्राइविंग के चलते इधर-उधर हो रही थी। जब कार ओवरटेक करने लगी तो ट्रॉली में सीधी टक्कर हो गई। हादसे में विवेक, सोमबीर व पंकज की मौत हो गई। योगेश के दोनों पैर टूट गए। एक ट्रैक्टर चालक की लापरवाही तीन परिवारों पर भारी पड़ गई। विवेक के परिवार के करीबी जयभगवान बताते हैं कि एक साल पहले विवेक के पिता गोताराम की कोराना संक्रमण के चलते मौत हो गई थी। विवेक ने परिवार को संभाला, लेकिन एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की टेढ़ी चाल तीन परिवारों पर भारी पड़ गई।
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ये है जुर्माना
अपराध जुर्माना
बिना हेलमेट 1 हजार रुपये
बिना लाइसेंस 5 हजार रुपये
ओवर स्पीड 1 हजार रुपये
शराब पीकर ड्राइविंग 10 हजार रुपये
ओवरलोडिंग प्रति टन 20 हजार रुपये
बिना सीट बेल्ट 1 हजार रुपये
नाबालिग द्वारा ड्राइविंग अभिभावक पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना
बिना इंश्योरेंस वाहन 2 हजार रुपये
बाइक पर ट्रिपल राइडिंग 2 हजार रुपये
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हर माह 35 से 40 लाख लग रहा जुर्माना
ट्रैफिक नियम तोड़ने पर पुलिस भारी जुर्माना वसूल रही है। बावजूद इसके हर माह 35 से 40 लाख तक के चालान काट रही है। सबसे ज्यादा चालान बिना हेलमेट के काटे जा रहे हैं। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
वर्जन
शहर को ट्रैफिक के हिसाब से दो जोन में बांटा हुआ है। आउटर में जहां मुख्य मार्गों के अलावा संबंधित थाना पुलिस नाके लगाकर वाहनों की जांच करती है, जबकि शहर में ट्रैफिक पुलिस व थाना पुलिस भी कार्रवाई करती है। सबसे ज्यादा दोपहिया वाहनों के चालान कटते हैं। इसमें भी बिना हेलमेट ड्राइविंग करने के मामले ज्यादा हैं। आम लोगों को चाहिए कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें। इससे न केवल खुद, बल्कि दूसरे भी सुरक्षित रहेंगे।
- इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, प्रभारी ट्रैफिक थाना
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डंपर की तेज रफ्तार ने छीन लिया तीन माह की माही का पिता
शिमली गांव निवासी विकास ने बताया कि उनके चाचा जयकिशन (42) फैक्टरी में नौकरी करते थे। साथ ही दो साल पहले ही यूपी में विवाह किया था। उनकी तीन माह की बेटी माही है। बुधवार सुबह वह चाचा के साथ स्कूटी पर रोहतक आया था। करीब आठ बजे दोनों लौट रहे थे। वह स्कूटी चला रहा था, जबकि उनके चाचा जयकिशन पीछे बैठे थे। झज्जर रोड पर नामदेव चौक से आगे बालसमंद चौक से पहले उसने स्कूटी रोकी और शौच के लिए सड़क किनारे चला गया। उनके चाचा जयकिशन स्कूटी के पास खड़े थे। इसी बीच पीछे से डंपर तेज गति से आया और उनके चाचा को टक्कर मार दी। चालक थोड़ा आगे डंपर छोड़कर फरार हो गया। उनके चाचा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। विकास ने बताया कि डंपर चालक की लापरवाही से एक परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। तीन माह की बेटी को अहसास नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि उनकी चाची इंदू भी बेहाल हैं।
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राजमिस्त्री के परिवार के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट
भैणीभेरो के अजय बताते हैं कि उनके चाचा बलवान सिंह (44) राजमिस्त्री थे। सुबह काम पर जाने के बाद शाम को बाइक पर घर आ जाते थे। 13 फरवरी की शाम को बाइक पर जब घर आ रहे थे। रास्ते में सामने से आ रही दूसरी बाइक के चालक ने तेज गति से ड्राइविंग करते हुए उनके चाचा की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से उनके सिर में गंभीर चोट आई। वह मौके पर पहुंचा तो उनके चाचा लहूलुहान हालत में थे। बाइक साइड में पड़ी थी। तत्काल वह चाचा को पीजीआई ले गया, जहां उनकी मौत हो गई। उनके चाचा के तीन बच्चे हैं। एक 16 साल का तो दो की उम्र 12 व 8 वर्ष है। वे परिवार में अकेले कमाने वाले थे। आय के दूसरे साधन नहीं हैं। दूसरों की लापरवाही ने उनके चाचा के परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। साथ ही तीन बच्चों के सिर पर अब पिता का साया नहीं रहा। ऐसे में सड़क पर निकलते समय लापरवाही न बरतें। किसी की लापरवाही न केवल खुद, बल्कि दूसरों पर भी भारी पड़ जाती है।
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एक ट्रैक्टर चालक की लापरवाही तीन परिवारों पर पड़ी भारी
शहर के चुन्नीपुरा निवासी विवेक कौशिक एसी की एजेंसी चलाते थे, जिसके पास दूसरे युवक भी नौकरी करते थे। पांच फरवरी को विवेक भिवानी में एसी लगाने के लिए गया था। साथ में बोहर निवासी योगेश, चुन्नीपुरा निवासी सोमबीर व ओल्ड आईटीआई निवासी पंकज भी थे। चारों काम पूरा होने के बाद कार से रोहतक लौट रहे थे। लाहली गांव के नजदीक आगे एक ट्रैक्टर चालक गन्ने से भरी दो ट्रॉली जोड़कर चल रहा था। पिछली ट्रॉली गलत ड्राइविंग के चलते इधर-उधर हो रही थी। जब कार ओवरटेक करने लगी तो ट्रॉली में सीधी टक्कर हो गई। हादसे में विवेक, सोमबीर व पंकज की मौत हो गई। योगेश के दोनों पैर टूट गए। एक ट्रैक्टर चालक की लापरवाही तीन परिवारों पर भारी पड़ गई। विवेक के परिवार के करीबी जयभगवान बताते हैं कि एक साल पहले विवेक के पिता गोताराम की कोराना संक्रमण के चलते मौत हो गई थी। विवेक ने परिवार को संभाला, लेकिन एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की टेढ़ी चाल तीन परिवारों पर भारी पड़ गई।
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ये है जुर्माना
अपराध जुर्माना
बिना हेलमेट 1 हजार रुपये
बिना लाइसेंस 5 हजार रुपये
ओवर स्पीड 1 हजार रुपये
शराब पीकर ड्राइविंग 10 हजार रुपये
ओवरलोडिंग प्रति टन 20 हजार रुपये
बिना सीट बेल्ट 1 हजार रुपये
नाबालिग द्वारा ड्राइविंग अभिभावक पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना
बिना इंश्योरेंस वाहन 2 हजार रुपये
बाइक पर ट्रिपल राइडिंग 2 हजार रुपये
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हर माह 35 से 40 लाख लग रहा जुर्माना
ट्रैफिक नियम तोड़ने पर पुलिस भारी जुर्माना वसूल रही है। बावजूद इसके हर माह 35 से 40 लाख तक के चालान काट रही है। सबसे ज्यादा चालान बिना हेलमेट के काटे जा रहे हैं। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
वर्जन
शहर को ट्रैफिक के हिसाब से दो जोन में बांटा हुआ है। आउटर में जहां मुख्य मार्गों के अलावा संबंधित थाना पुलिस नाके लगाकर वाहनों की जांच करती है, जबकि शहर में ट्रैफिक पुलिस व थाना पुलिस भी कार्रवाई करती है। सबसे ज्यादा दोपहिया वाहनों के चालान कटते हैं। इसमें भी बिना हेलमेट ड्राइविंग करने के मामले ज्यादा हैं। आम लोगों को चाहिए कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें। इससे न केवल खुद, बल्कि दूसरे भी सुरक्षित रहेंगे।
- इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, प्रभारी ट्रैफिक थाना