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Rohtak News: गांव में चिट्ठी लिख और पढ़कर साहित्य के प्रति प्रेम बढ़ा

Tue, 28 Jan 2025 02:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Tue, 28 Jan 2025 02:24 AM IST
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Dr. Santram Deshwal, selected for Padmashree award, completed his studies through scholarship in MDU.
27सीटीके09- डॉ. संतराम देशवाल।
विकास सैनी/मनोज कौशिक
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रोहतक/बादली। पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित साहित्यकार संतराम देशवाल के गांव खेड़का गुज्जर में खुशी का माहौल है। संतराम देशवाल भले ही सोनीपत में रहते हैं, लेकिन गांव में उनका लगातार आना जाना रहता है। अब ग्रामीण संतराम देशवाल के स्वागत की तैयारी में लग गए हैं। संतराम ने कहा कि गांव में पढ़ा-लिखा होने के चलते ग्रामीण आए दिन चिट्ठियां लिखवाने और पढ़वाने के लिए आते थे। इसी दौरान लिखने और पढ़ने के प्रति आकर्षण बढ़ गया। चचेरे भाई करतार सिंह ने बताया कि गांव मेें रहते हुए कई तरह के विचार वह लिखकर प्रकट करते रहे।
वहीं, संतराम देशवाल के छोटे भाई अजीत ने बताया कि साधारण परिवार से निकलकर संतराम ने पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। बचपन में पिता की मृत्यु होने पर परिवार की आर्थिक स्थित खराब हो गई। ऐसे में मां और दादा ने एक बार संतराम को पढ़ने से मना कर दिया, लेकिन उनकी जिद ने पढ़ाई को जारी रखा। गांव में कोई सरकारी स्कूल न होने के चलते दुल्हेड़ा स्कूल और झज्जर से स्नातक करने के बाद दादा उन्हें मास्टर लगवाना चाहते थे, लेकिन संतराम रोहतक पढ़ने के लिए चले गए।
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डॉ. संतराम देशवाल ने बढ़ाया एमडीयू का मान
एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि डाॅ. संतराम देशवाल को पद्मश्री अवाॅर्ड मिलने जा रहा है। सरकार की घोषणा ने उनके साथ एमडीयू को भी मान दिया है। यह विवि परिवार के लिए गौरवपूर्ण है। एमडीयू की उपलब्धियों में यह साल की पहली बड़ी उपलब्धि है। विवि परिवार, विद्यार्थी व एलुमनाई के लिए यह सम्मान की बात है। यह सम्मान विवि को नई पहचान देगा। विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। डॉ. संतराम ने एमडीयू से पढ़ाई कर खुद को तराशा। अपने कौशल को निखार कर उन्होंने साहित्य को नया नाम व नई ऊंचाई दी। साहित्यकार के रूप में बड़ी पहचान बनाई। एमडीयू के हिंदी व अंग्रेजी विभाग के इस पूर्व छात्र ने यहां से स्नातकोत्तर के बाद एमफिल व पीएचडी की पढ़ाई की। बाद में यहीं से एलएलबी की पढ़ाई की। यह अपने आपमें सराहनीय है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णा जून ने कहा कि डॉ. संतराम देशवाल ने विभाग से पढ़ाई की है। यहां पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी शिक्षा को जीवन में लागू किया।
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