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इस्माइला गांव की बेटी डॉ. कविता बनीं डीएसपी

Sat, 21 Dec 2019 12:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2019 12:48 AM IST
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Dr. Kavita, daughter of Ismaila village becomes DSP
फोटो : आरओएच 123
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बेटियों की सुरक्षा के लिए कुछ करने का जुनून...जज्बा...जोश...
हेडिंग : पिता को बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होते देखा तो ठाना एक दिन बनूंगी पुलिस अफसर
-इस्माईला गांव की बेटी सहायक प्रोफेसर डॉ. कविता वर्मा बनीं डीएसपी
- हरियाणा लोकसेवा आयोग की परीक्षा की पास
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। मैं बचपन से ही अपने पिता के ज्यादा करीब रही। कई बार पिता को बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित होते देखा। तभी मैंने मन में ठान लिया था कि मैं एक दिन अधिकारी बनकर सिस्टम में बदलाव लाने की कोशिक करूंगी। मेरे पिता ने हर कदम पर मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हूं। बहनों की शादी के लिए पिता को कर्ज लेने से लेकर इंतजाम करते देखा तो सपने को एक नई दिशा मिली। जुलाई 2012 में पहली बार हरियाणा लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी थी, लेकिन तब मुख्य परीक्षा पास नहीं कर सकी। उस समय पीजीटी अर्थशास्त्र के पद पर कार्यरत थी। इसके बाद आर्थिक स्थिरता के चलते पढ़ाई जारी रखी और एमडीयू में पीएचडी करके सांपला के राजकीय महिला महाविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग में सहायक प्रोफेसर बनीं। इसके बाद भी मन में सिविल सर्विस के सपने को संजोए रखा। कॉलेज से घर आकर 5 से 6 घंटे तक पढ़ाई करती, खाली समय में कॉलेज लाइब्रेरी में रहती। आज हरियाणा लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करके हरियाणा पुलिस में डीएसपी बनकर सपना पूरा हो गया है।
-जैसा इस्माईला गांव की बेटी डॉ. कविता वर्मा ने अमर उजाला को बताया।
रिश्तेदारों में बनाया शादी के लिए दबाव, लेकिन जिद पर अड़ी रही
कविता के वर्ष 2012 में पीजीटी पद पर कार्यरत होने के बाद से ही नाते-रिश्तेदारों ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था। लेकिन कविता अपनी जिद पर अड़ी रहीं। उन्होंने अभिभावकों को मनाया और लगातार परीक्षा की तैयारियों में जुटी रही। इसके बाद जब वह सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हुईं तो शादी के लिए रिश्तेदारों का दबाव ज्यादा हो गया। आलम यह था कि पड़ोसी भी पिता सतबीर को यह बोलने लगे थे कि अब तो प्रोफे सर भी बन गई है, कर दो बेटी की शादी। लेकिन पिता ने बेटी की लगन को देखा और हर कदम पर उसे सहयोग दिया।
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सेल्फ स्टडी से पाया मुकाम
कविता ने बताया कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी उन्होंने कोचिंग का सहारा नहीं लिया। कविता ने ज्यादा से ज्यादा समय किताबों में सेल्फ स्टडी के साथ बिताया। सिविल सर्विस का जुनून कविता पर इस कदर था कि उनका आज तक किसी सोशल साइट पर कोई अकाउंट नहीं। वह लगातार ज्यादा से ज्यादा समय लाइब्रेरी और घर में किताबों के साथ बिताती हैं।
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बेटियों की सेफ्टी के लिए उठाऊंगी ठोस कदम
कविता ने डीएसपी पद पर चयन होने पर खुशी जताते हुए कहा कि वह बेटियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएंगी। बचपन से आज तक पितृसत्ता के चलते हर कदम पर लड़कियों को झुकते हुए, डरते हुए देखा है। इसलिए वह बेटियों को सशक्त बनाने के लिए उन्हें सुरक्षा देने के लिए ठोस कदम उठाएंगी। बेटियों की सुरक्षा के लिए अभी कोई प्लानिंग नहीं की है, लेकिन उनका मकसद हर बहन, बेटी को सुरक्षित माहौल मुहैया कराना है।
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