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डॉ. ध्रुव ने प्रतिभागियों को दिया 4-डी का मंत्र

Sun, 02 Oct 2022 12:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 02 Oct 2022 12:30 AM IST
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Dr. Dhruv gave the 4-D mantra to the participants
पीजीआई में पीसीसीएम की वर्कशॉप में प्रतिभागियों को वेंटिलेटर की बारीकी समझाते डॉ. प्रशांत कुमार - फोटो : RohtakCity
रोहतक। एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल ने हमारे शरीर पर अपना असर दिखाना कम कर दिया है। इसके भविष्य में घातक परिणाम हो सकते हैं। आजकल देखने में आ रहा है कि मियादी बुखार में भी एंटीबायोटिक दवाएं अपना असर पहले जितना नहीं दिखा पा रही है। यह हमारी आने वाली पीढ़ी को बड़ा नुकसान पहुंचाएगी। यह कहना है पीजीआईएमएस के पल्मनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन (पीसीसीएम) विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी का।
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वे शनिवार को पीजीआई के डेंटल कॉलेज के लेक्चर थियेटर में पीसीसीएम एवं एससीसीएम की ओर से आयोजित छठी वार्षिक कांफ्रेंस में चिकित्सकों को संबोधित कर रहे थे। सीएमई के आर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. ध्रुव ने कहा कि सीएमई के पहले दिन पीजीआईडीएस में वर्कशाप का आयोजन कर प्रदेश के चिकित्सकों को हैंड्स ऑन ट्रेनिंग प्रदान की गई। इसमें उपकरणों के बेहतर उपयोग से मरीजों को सही इलाज देने की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि हमें मरीज का इलाज करते हुए 4 डी का पालन करना चाहिए। इसमें सही जांच (डायग्नोस), सही दवाई (ड्रग), सही मात्रा (डोज) व सही समयावधि (ड्यूरेशन) शामिल है। एंटीबायोटिक का अंधाधुंध प्रयोग मरीज को फायदा होने की जगह नुकसान देगा।
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कार्यशाला समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि सीएमई के पहले दिन चार जगह वर्कशाप का आयोजन किया गया। पहली वर्कशाप में 40 प्रतिभागियों और 12 फैकल्टी को अलग-अलग ग्रुप में बांटकर मेकेनिकल वेंटिलेशन के बारे में सिखाया गया। इसमें प्रतिभागियों ने खुद वेंटिलेशन को लगाना, उसे चलाना और परेशानी की सूरत में खुद सुलझना सीखा। वर्कशाप में न सिर्फ आईसीयू में रखे जाने वाले वेंटिलेशन पर मंथन किया गया, बल्कि घर पर बाईपैप के रूप में दिए जाने वाले वेंटिलेटशन पर भी चर्चा हुई।
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पीसीसीएम विभाग के डॉ. पवन कुमार ने दूसरी वर्कशाप में ब्रोंकोस्कोपी पर प्रशिक्षण दिया। सांस के रास्ते अल्ट्रासाउंड का प्रयोग करते हुए किसी भी टुकडे़ को जांच के लिए निकालने की तकनीक सिखाई। यह अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें प्रारंभिक चरण में कैंसर को पकड़ा जा सकता है। तीसरी वर्कशाप में कोऑर्डिनेटर डॉ. सुनीता सिंह ने मॉलिक्युलर पैथोलॉजी के बारे में विस्तार से बताते हुए फेफड़े की बीमारी की सटीक जांच के बारे में बताते हुए पैथो विभाग की महता व सटीकता पर चर्चा की। चौथी वर्कशाप में माइक्रोबॉयोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्पणा परमार ने एंटीमाइक्रोबीयल रेजिस्टेंस पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि बढ़ते हुए एडवासिंस के साथ जीवाणुओं में दवा की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती जा रही है। यह न सिर्फ मरीजों की बीमारी की गंभीरता को बढ़ाता है, बल्कि इलाज में दवा का असर न होने से जटिलता भी उत्पन्न करता है। सही समय पर सही दवा मिलने से मरीजों को जल्द ठीक होने के मदद मिलती है। वहीं अस्पताल व आईसीयू के बढ़ते खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण है। डॉ. मंजूनाथ ने कहा कि रविवार को फेफड़ों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर देश भर से विशेषज्ञ मंथन कर अपने अनुभव साझा करेंगे। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी, डॉ. मोनिका, डॉ. अर्पणा, डॉ. सुनीता, डॉ. एमसी गुप्ता, डॉ. पवन, डॉ. मंजूनाथ, डॉ. प्रीति, डॉ. लोकेश लालवानी, डॉ. हरनीत सिंह, प्रवीण उपस्थित रहे।
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