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Rohtak News: दान किया जाता है परोपकार के लिए और त्याग किया जाता है संयम के लिए

Mon, 16 Sep 2024 04:22 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2024 04:22 AM IST
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Donation is done for charity and sacrifice is done for restraint
15सीटीके41..सराय मोहल्ला स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व में आठवें दिन उत्तम त्
रोहतक। त्याग अपने अंदर बैठे अहंकार का करो, अहंकार के त्याग से देश प्रदेश व समाज, संस्था तरक्की करेगी। आपस में प्रेम भाव बढ़ेगा। गुप्त दान का पुण्य बहुत भारी है। जैन शास्त्रों के अनुसार दान चार प्रकार का होता है, रूआहार दान, औषधि दान, अभय दान, ज्ञान दान और यह चार प्रकार के साधु मुनि, आर्यिका, श्रावक व श्राविका के समूह को देना चाहिए। जरूरतमंदों, दीन दुखियों, अहसाय, अनाथ व जीव दया की सहायता जरूरी करनी चाहिए। बुद्धिमान पुरुष अपनी आयु और अपने धन को अस्थिर समझकर दान में लगाते हैं। यह अमृतवर्षा जैन मुनियों ने रविवार को की। सराय मोहल्ला स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व में आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का दिन श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर बड़े धूमधाम से मनाया। सुबह से मंदिर के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ा है।
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मंदिर के मीडिया प्रभारी राजीव जैन ने बताया कि सुबह छह बजे भगवान पार्श्वनाथ का जलाभिषेक व महाशांति धारा योगाचार्य रवि जैन पाइप वाले ने परिवार सहित संपन्न की गई। इसके बाद बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप जैन ने समुच्चय पूजन सोलह कारण पूजन, विशेष भगवान पार्श्वनाथ पूजा, रतनत्य पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन, विधान व भगवान महावीर स्वामी के महाअध्य श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में चढ़ाए और शंभू स्त्रोत को भी पढ़ा। श्रद्धालुओं ने संगीतमयी महाआरती की।
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दान देने वाला कभी गरीब नहीं होता : जैन

समाजसेवी उद्योगपति राजेश जैन ने उत्तम त्याग धर्म के दिन पर बताया कि आमतौर पर दान करने को ही त्याग कहा व समझा जाता है। लेकिन, त्याग और दान में अंतर है। दान किया जाता है किसी उद्देश्य के लिए, परोपकार के लिए और त्याग किया जाता है संयम के लिए। त्याग करना धर्म है। दान देने वाला एक लाख दान में देता है तो दो लाख कमाने को आतुर रहता है। लेकिन त्यागी जो त्याग देता है फिर उसके चक्कर में नहीं रहता। त्याग से आत्मा को बल मिलता है। मोक्ष मार्ग की वृद्धि होती हैं। दान देने वाला कभी गरीब नहीं होता। उसका भंडार सदा भरपूर रहता है। इस कारण अपनी शक्ति के अनुसार हमें कुछ दान अवश्य करते रहना चाहिए पता नहीं कब आयु ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप जैन जाए।
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