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बगैर मतलब जांच न लिखने की बात पर डॉक्टर ही उठाने लगे सवाल

Fri, 05 Mar 2021 01:40 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 01:40 AM IST
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Doctors started raising questions about not writing tests without meaning
पीजीआईएमएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग ने संस्थान के क्लीनिकल डॉक्टरों के लिए फरमान तो जारी किया है कि वह बगैर जरूरत के मरीजों को जांच न लिखें। इससे विभाग पर जांच करने का दबाव पड़ता है। इसका विरोध भी संस्थान के ही डॉक्टरों ने किया है कि वह क्यों किसी की बगैर कारण जांच लिखेंगे। हालांकि बायोकेमिस्ट्री विभाग ने इस संबंध में निदेशक से सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुला कर दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही है।
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बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से जारी पत्र पर सवाल उठने लगा है कि क्या संस्थान के डॉक्टर मरीजों की जांच जानबूझ कर करवाते हैं या विभाग स्वयं जांच करना नहीं चाहता। स्थिति यह है कि प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस में प्रतिदिन पांच से सात हजार मरीज ओपीडी में जांच करवाने के लिए आते हैं। इसमें से तकरीबन दो हजार मरीजों की जांच लिखी जाती है। सरकारी संस्थान होने के चलते ओपीडी में डॉक्टर मरीजों को निजी लैब में जाने की सलाह भी नहीं दे सकते। संस्थान का बायोकेमिस्ट्री विभाग मरीजों की जांच करने को तैयार नहीं है। ऐसे में मरीज के लिए उपचार पाना ही मुसीबत बना हुआ है। संस्थान के डॉक्टरों ने ही सवाल उठाया है कि अब बायोकेमिस्ट्री विभाग से पूछकर वह जांच लिखेंगे कि किस मरीज को कौन सी जांच करवानी है। मरीज की कौन सी जांच होनी चाहिए यह तो क्लीनिकल जांच कर रहा डॉक्टर ही तय करेगा। संस्थान के डॉक्टरों का कहना है कि वह पहले जांच लिखते हैं इसके बाद उनके जूनियर पर्ची बनाते हैं फिर सैंपल रिपोर्ट मंगाई जाती है। इतने कार्य बेवजह नहीं किए जाते।
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पूर्व विभागाध्यक्ष की सेवानिवृत्ति से हो रही समस्या
पीजीआईएमएस में बायोकेमिस्ट्री विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीणा गहलोत की सेवानिवृत्ति के बाद से ही संस्थान की जांच प्रक्रिया में व्यवधान आ रहा है। समय पर रिजेंट न आने के चलते जांच प्रभावित हो रही है। संस्थान प्रतिदिन 200 के करीब ही जांच कर रहा है। इसके चलते मरीज और डॉक्टर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। 2019 में अधिकारी की सेवानिवृत्ति के बाद अगली प्रभारी डॉ. सिम्मी खरब किन्हीं कारणों के चलते पहले अवकाश पर चली गई तो रिजेंट ऑर्डर नहीं हो पाए। इस विभाग के टेंडर रुक गए और अब पूरे विभाग की कार्रवाई बाधित हो रही है।
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ये होती हैं अहम जांच
गुर्दे, शुगर, हड्डी, कैलशियम, फास्फोरस, चर्बी, लीवर, दिल, सोडियम, पोटाशियम सहित 15 से 20 जांच विभाग की प्रभावित हो रही हैं। इनकी विभाग के पास लोकल पर्चेज करने की भी क्षमता है। हालांकि जांच संख्या अधिक होने के चलते यह लोकल पर्चेज के बस से बाहर है। विभाग को इसके लिए नियमित सप्लाई चाहिए।

बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया है। हमारा प्रयास है कि जो साधन हमारे पास उपलब्ध है, उसका सही प्रयोग हो सके। पीछे कुछ समस्या आ रही थी, उसे दूर किया जा रहा है। एक से दो माह में समस्या का समाधान हर हाल में कर दिया जाएगा।
- डॉ. गजेंद्र, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस
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