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गर्मी और पीपीई किट कर रही डॉक्टरों को परेशान
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कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे पीजीआईएमएस के कोविड अस्पताल में पीपीई किट में तैनात डॉक्टरों व स्टाफ की हालत खराब है। यहां तैनात स्टाफ गर्मी और पीपीई किट के चलते डी हाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। इसके चलते कुछ डॉक्टरों व स्टाफ को कुछ समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार बुधवार को कोविड अस्पताल में तैनात एक महिला पीजी को गर्मी के चलते चक्कर आ गया। पीजी डॉक्टर की तबीयत को देखते हुए उसे खुले में बैठाया गया, जब स्थिति सामान्य हुई तो उसने फिर काम करना शुरू कर दिया। कोविड अस्पताल के स्टाफ की मानें तो सबसे अधिक समस्या महिला डॉक्टर व महिला स्टाफ को होती है। गर्मी के चलते पीपीई किट में कई घंटे गुजारना मुश्किल हो जाता है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कोविड अस्तपाल के सेंट्रल एसी को बंद किया गया है।
एक मरीज दो रिपोर्ट, पूरा परिवार परेशान
कोरोना के एक मरीज को बुधवार उस समय परेशानी झेलनी पड़ी, जब उसकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव बता दी गई। उसके बाद युवक सोच में पड़ गया कि वह संक्रमित कैसे हो गया। हालांकि युवक कंटेनमेंट जोन में रह रहा है। युवक ने जब डॉक्टरों से दोबारा जांच की बात की तो उसका रिकॉर्ड फिर जांचा गया और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव बताई गई। व्यक्ति ने बताया कि लिपिकीय गलती डॉक्टर के लिए आम हो सकती है, लेकिन जिसे यह रिपोर्ट बताई जाती है वह उस पर बुरा प्रभाव डालती है। कोरोना को लेकर पहले ही लोग मानसिक दबाव में हैं।
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बुुधवार को कोरोना के तीन शवों को नगर निगम को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। इसके अलावा एक मौत हुई है, लेकिन वह कोरोना मरीज है, कह नहीं सकते। इसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकता है। इसके अलावा सैंपल रिपोर्ट में कहां गड़बड़ी हो रही है, उसे ठीक कराया जाएगा।
डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस रोहतक।
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सूत्रों के अनुसार बुधवार को कोविड अस्पताल में तैनात एक महिला पीजी को गर्मी के चलते चक्कर आ गया। पीजी डॉक्टर की तबीयत को देखते हुए उसे खुले में बैठाया गया, जब स्थिति सामान्य हुई तो उसने फिर काम करना शुरू कर दिया। कोविड अस्पताल के स्टाफ की मानें तो सबसे अधिक समस्या महिला डॉक्टर व महिला स्टाफ को होती है। गर्मी के चलते पीपीई किट में कई घंटे गुजारना मुश्किल हो जाता है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कोविड अस्तपाल के सेंट्रल एसी को बंद किया गया है।
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एक मरीज दो रिपोर्ट, पूरा परिवार परेशान
कोरोना के एक मरीज को बुधवार उस समय परेशानी झेलनी पड़ी, जब उसकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव बता दी गई। उसके बाद युवक सोच में पड़ गया कि वह संक्रमित कैसे हो गया। हालांकि युवक कंटेनमेंट जोन में रह रहा है। युवक ने जब डॉक्टरों से दोबारा जांच की बात की तो उसका रिकॉर्ड फिर जांचा गया और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव बताई गई। व्यक्ति ने बताया कि लिपिकीय गलती डॉक्टर के लिए आम हो सकती है, लेकिन जिसे यह रिपोर्ट बताई जाती है वह उस पर बुरा प्रभाव डालती है। कोरोना को लेकर पहले ही लोग मानसिक दबाव में हैं।
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बुुधवार को कोरोना के तीन शवों को नगर निगम को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। इसके अलावा एक मौत हुई है, लेकिन वह कोरोना मरीज है, कह नहीं सकते। इसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकता है। इसके अलावा सैंपल रिपोर्ट में कहां गड़बड़ी हो रही है, उसे ठीक कराया जाएगा।
डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस रोहतक।