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दीपोत्सव पर सेहत न बिगाड़ दे मिठाई का जायका

Wed, 27 Oct 2021 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 12:54 AM IST
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Do not spoil your health on Diwali, the taste of sweets
दीपोत्सव पर मिठाई का जायका कहीं सेहत न बिगाड़ दे। त्योहार से पहले बनाई जा रही मिठाई व इनकी नियमों के विरुद्ध बिक्री कुछ यहीं संकेत दे रही है। शहर हो या गांव ज्यादा मिठाई विक्रेताओं की दुकानों पर न तो मिठाई उपभोग करने का अंतिम दिन दर्शाया गया है न उनके बनाए जाने का दिन अंकित है। त्योहार पर मिठाइयों की मांग को ध्यान में रखते हुए बाजार अभी से सजने लगे हैं। दुकानों व गोदामों में पिछले कई दिनों से मिठाइयां बनाई जा रहीं हैं। कहीं मावा स्टोर किया जा रहा है तो कहीं, गुलाबजामुन व रसगुल्ले बनाए जा रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज में ये मिठाइयां स्टोर की जा रहीं हैं। जबकि त्योहार 8 दिन बाद हैं। त्योहार से पहले ही बनाई जा रही इन मिठाइयों की गुणवत्ता कितनी विश्वसनीय है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
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150 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही बर्फी
मिठाइयों की कीमत खुद उसकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा रही है। बर्फी ही 150 से 500 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है। शहर में कई बड़ी व नामी दुकानें हैं। यहां लगभग हर मिठाई के दाम 300 रुपये प्रति किलोग्राम से कम नहीं है। इसमें शहर के पॉश इलाके, बड़े मिष्ठान भंडार, रेस्टोरेंट शामिल हैं। जबकि शहर के कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां 150 रुपये किलोग्राम के भाव से मिठाइयां बिक रहीं हैं। इसमें डेयरी मोहल्ला, बड़ा बाजार, बाबरा मोहल्ला मुख्य हैं।
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धीमी रफ्तार से रही मिठाइयों की सैंपलिंग
मिठाइयों की गुणवत्ता सवालों के घेरे में हैं। बाजार में मावा बर्फी कहीं 500 रुपये के भाव बिक रही है तो कहीं 200 या 300 रुपये। दुकानों पर एक ही मिठाई के अलग-अलग दाम संशय पैदा करते हैं। ऐसे में इनमें मिलावट से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। यही नहीं, मिठाइयों व अन्य खाद्य सामग्री की सैंपलिंग भी धीमी रफ्तार से हो रही है। एफडीए विभाग के पास पर्याप्त संसाधनों का अभाव व कागजी कार्रवाई के चलते निर्धारित मानकों के अनुसार भी सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। जबकि इन दिनों ताबड़तोड़ सैंपल लिए जाने की जरूरत है।
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दिवाली के बाद आएगी जांच रिपोर्ट
खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए एफडीए विभाग सैंपल लेता है। विभाग को एक माह में कम से कम 30 सैंपल लेने होते हैं। त्योहारी सीजन को देखते हुए विभाग सितंबर की शुरुआत से सैंपल ले रहा है। ये सैंपल जांच के लिए तो लैब भेजे जा चुके हैं, मगर अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में दिवाली से पहले लिए जाने वाले सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए तो इनकी रिपोर्ट दिवाली के बाद ही आएगी। ऐसी स्थिति में यदि किसी की सेहत बिगड़ी तो हालात बिगड़ सकते हैं।
कोरोना के बाद बाजार खुले हैं। इस बार महंगाई की मार बाजार पर साफ नजर आ रही है। महंगाई करीब 20 प्रतिशत बढ़ी है। जबकि मिठाई विक्रेताओं ने बाजार के हालात को देखते हुए त्योहार व महामारी में समन्वय बनाने का प्रयास किया है। इसके चलते 10 से 20 प्रतिशत तक ही दाम बढ़ाए गए हैं। इसकी वजह घी, तेल, घरेलू गैस व अन्य खाद्य सामग्री महंगी होनी है। दुकानदार नियमानुसार मिठाई के बेहतर उपयोग की तिथि के साथ ही मिठाई बेच रहे हैं। जहां, इस बात का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, उनसे भी व्यवस्था बनाने की अपील की जाएगी।
- सुंदर श्याम, प्रधान, हलवाई यूनियन
खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत मिठाई के बेहतर उपभोग का समय निर्धारित करने के साथ इनके बनाए जाने का समय दर्शाना जरूरी है। यह ग्राहक की जागरूकता के लिए जरूरी है। नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

- ओम कुमार सिवाच, डीओ, एफडीए
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है। पनीर व मावा केंद्र बिंदु हैं। मिठाइयों व अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल लिए जा रहे हैं। टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। विक्रेताओं को भी मिठाई बनाने का दिन व उसके किस दिन तक उपभोग किए जाने का समय है, यह स्पष्ट करना होगा। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन
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