{"_id":"67b48969953f8becc109da59","slug":"discussion-on-community-participation-in-environmental-protection-rohtak-news-c-17-roh1020-602725-2025-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी पर मंथन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी पर मंथन
Wed, 19 Feb 2025 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 19 Feb 2025 01:49 AM IST
विज्ञापन
18सीटीके04-एमडीयू के समाजशास्त्र विभाग में व्याख्यान कार्यक्रम में मौजूद शिक्षक व विद्यार्थी।
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के समाजशास्त्र विभाग में मंगलवार को महत्वपूर्ण सामाजिक-पर्यावरणीय मुद्दों पर विस्तार व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। चौ. चरण सिंह कृषि महाविद्यालय बावल के डाॅ. राधेश्याम तथा राजकीय महाविद्यालय गुरुग्राम के डॉ. भूप सिंह ने बतौर रिसोर्स पर्सन व्याख्यान दिए।
डाॅ. राधेश्याम ने पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी विषय पर व्याख्यान में स्थायी पर्यावरणीय प्रथाओं को बढ़ावा देने में जमीनी स्तर के प्रयासों की भूमिका पर जोर देने की बात कही। उन्होंने जल शक्ति अभियान, करनाल में टिकाऊ खेती, अरावली जैव विविधता पार्क और हरियाणा में संयुक्त वन प्रबंधन (जेएफएम) जैसी सफल परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. भूप सिंह ने डॉ. बीआर आंबेडकर के जाति के सिद्धांत के अध्ययन और अध्यापन की प्रासंगिकता पर एक व्यावहारिक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डाॅ. आंबेडकर के लेखन का अध्ययन करने से जाति-आधारित भेदभाव के ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों को समझने में मदद मिलती है।
समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. देसराज ने इस व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता की। प्रो. देशराज ने कहा कि वास्तविक दुनिया के सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को संबोधित करने में विषय अनुसंधान और शैक्षणिक चर्चाओं के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर डाॅ. खजान सिंह सांगवान, डाॅ. जितेंद्र प्रसाद और डाॅ. सुप्रीति समेत विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
डाॅ. राधेश्याम ने पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी विषय पर व्याख्यान में स्थायी पर्यावरणीय प्रथाओं को बढ़ावा देने में जमीनी स्तर के प्रयासों की भूमिका पर जोर देने की बात कही। उन्होंने जल शक्ति अभियान, करनाल में टिकाऊ खेती, अरावली जैव विविधता पार्क और हरियाणा में संयुक्त वन प्रबंधन (जेएफएम) जैसी सफल परियोजनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. भूप सिंह ने डॉ. बीआर आंबेडकर के जाति के सिद्धांत के अध्ययन और अध्यापन की प्रासंगिकता पर एक व्यावहारिक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डाॅ. आंबेडकर के लेखन का अध्ययन करने से जाति-आधारित भेदभाव के ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों को समझने में मदद मिलती है।
विज्ञापन
समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. देसराज ने इस व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता की। प्रो. देशराज ने कहा कि वास्तविक दुनिया के सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को संबोधित करने में विषय अनुसंधान और शैक्षणिक चर्चाओं के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर डाॅ. खजान सिंह सांगवान, डाॅ. जितेंद्र प्रसाद और डाॅ. सुप्रीति समेत विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विज्ञापन