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Rohtak News: पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारियों की एचकेआरएन में शामिल करने की मांग
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रोहतक। पीजीआईएमएस के चतुर्थ श्रेणी के अनुबंधित कर्मचारियाें ने रविवार को नवीन जयहिंद से उनके तंबू में मुलाकात की। कर्मचारियों ने अपनी समस्या सुनाते हुए उन्हें एचकेआरएन (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) के तहत नहीं लिए जाने की बात कही। संस्थान के अधिकारी व ठेकेदार पर जानबूझकर ऐसा नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया। कर्मचारियों ने 12 नवंबर को राज्यपाल व मंत्री से मिलकर मांगों का ज्ञापन सौंपने का भी फैसला लिया।
पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब 10 से 15 साल से ये कर्मचारी पीजीआई में अनुबंध के तहत काम कर रहे हैं। सरकार ने हरियाणा में ठेका प्रथा बंद करने की घोषणा की है। अब सभी विभागों में एचकेआरएन के तहत भर्ती की जा रही है। एचकेआरएन के तहत कर्मचारियों को ज्यादा वेतन दिया जा रहा है। ठेके के तहत काम रहे कर्मचारियों को वेतन कम मिल रहा है। कई महीनों का बकाया वेतन भी ठेकेदार ने अब तक नहीं दिया है। यही नहीं, ड्यूटी को लेकर भी प्रताड़ित किया जाता रहा है।
नवीन जयहिंद ने कर्मचारियों की सभी समस्याओं को सुना और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव व सरकार से उनकी समस्या का समाधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पीजीआई में कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। संस्थान का ठेका लेने वाली कंपनी का ठेकेदार या नेता अपने आप में सुधार करे। इन कर्मचारियों का कंपनी के माध्यम से शोषण बंद करे। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन के लिए तैयार रहे।
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पीजीआई के अनुबंधित कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब 10 से 15 साल से ये कर्मचारी पीजीआई में अनुबंध के तहत काम कर रहे हैं। सरकार ने हरियाणा में ठेका प्रथा बंद करने की घोषणा की है। अब सभी विभागों में एचकेआरएन के तहत भर्ती की जा रही है। एचकेआरएन के तहत कर्मचारियों को ज्यादा वेतन दिया जा रहा है। ठेके के तहत काम रहे कर्मचारियों को वेतन कम मिल रहा है। कई महीनों का बकाया वेतन भी ठेकेदार ने अब तक नहीं दिया है। यही नहीं, ड्यूटी को लेकर भी प्रताड़ित किया जाता रहा है।
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नवीन जयहिंद ने कर्मचारियों की सभी समस्याओं को सुना और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव व सरकार से उनकी समस्या का समाधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पीजीआई में कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। संस्थान का ठेका लेने वाली कंपनी का ठेकेदार या नेता अपने आप में सुधार करे। इन कर्मचारियों का कंपनी के माध्यम से शोषण बंद करे। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन के लिए तैयार रहे।
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