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Rohtak News: 33% महिला आरक्षण की मांग, महिलाएं करेंगी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
Tue, 14 Jul 2026 08:17 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 14 Jul 2026 08:17 PM IST
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16-पत्रकारों से बात करतीं अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा डॉ. जगमति सांग
फोटो : 16
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जगमति सांगवान का कहना है कि महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर 20 जुलाई से 13 अगस्त तक जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसको लेकर देशभर के कई महिला संगठन, नागरिक समाज समूहों और सामाजिक संगठन एकजुट हैं।
ये सभी संगठन केंद्र सरकार से मानसून सत्र में आवश्यक संशोधन करने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन के माध्यम से सरकार पर 24 महिला आरक्षण लागू करने का दबाव बनाया जाएगा। डॉ. जगमति मंगलवार को मैना पर्यटन केंद्र में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि महिला आरक्षण शीघ्र लागू किया जाए। भाजपा इस कानून के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि सांसद व विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए महिलाओं का आंदोलन दशकों पुराना है।
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सबसे पहले बिल 1996 यानी 30 साल पहले लाया गया था। आखिरकार जब 2023 में महिला आरक्षण कानून पास हुआ तो इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया।
केंद्रीय समिति सदस्य प्रो. मंजीत राठी ने कहा कि सरकार परिसीमन के अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए महिला आरक्षण का इस्तेमाल कर रही है। यह शर्म की बात है कि संसद में 13 प्रतिशत और विधानसभा में 9 प्रतिशत से भी कम महिलाएं हैं। महिला आरक्षण में और देरी करना महिलाओं के संघर्ष के साथ धोखा है।
राज्य महासचिव उषा सरोहा ने कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है तो उसे मानसून सत्र में जरूरी बदलाव कर 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करे। इस मौके पर समिति की राज्य अध्यक्ष सविता, राजकुमारी दहिया, मुनमुन हजारिका, किरण, मनीषा, डॉ. नीलिमा दहिया, सुशीला देशवाल समेत अनेक महिलाएं मौजूद रहीं।
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जगमति सांगवान का कहना है कि महिला आरक्षण अधिनियम-2023 को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर 20 जुलाई से 13 अगस्त तक जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसको लेकर देशभर के कई महिला संगठन, नागरिक समाज समूहों और सामाजिक संगठन एकजुट हैं।
ये सभी संगठन केंद्र सरकार से मानसून सत्र में आवश्यक संशोधन करने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन के माध्यम से सरकार पर 24 महिला आरक्षण लागू करने का दबाव बनाया जाएगा। डॉ. जगमति मंगलवार को मैना पर्यटन केंद्र में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
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महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि महिला आरक्षण शीघ्र लागू किया जाए। भाजपा इस कानून के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि सांसद व विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए महिलाओं का आंदोलन दशकों पुराना है।
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सबसे पहले बिल 1996 यानी 30 साल पहले लाया गया था। आखिरकार जब 2023 में महिला आरक्षण कानून पास हुआ तो इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया।
केंद्रीय समिति सदस्य प्रो. मंजीत राठी ने कहा कि सरकार परिसीमन के अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए महिला आरक्षण का इस्तेमाल कर रही है। यह शर्म की बात है कि संसद में 13 प्रतिशत और विधानसभा में 9 प्रतिशत से भी कम महिलाएं हैं। महिला आरक्षण में और देरी करना महिलाओं के संघर्ष के साथ धोखा है।
राज्य महासचिव उषा सरोहा ने कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है तो उसे मानसून सत्र में जरूरी बदलाव कर 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करे। इस मौके पर समिति की राज्य अध्यक्ष सविता, राजकुमारी दहिया, मुनमुन हजारिका, किरण, मनीषा, डॉ. नीलिमा दहिया, सुशीला देशवाल समेत अनेक महिलाएं मौजूद रहीं।