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Rohtak News: एनजीएस तकनीक से आनुवंशिक शोध की नई संभावनाओं पर मंथन
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32. एमडीयू में बायोकेमिस्ट्री विभाग में नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक को समझते शोधार्थी। स्
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में फ्रंटियर्स इन बायोकेमिकल रिसर्च विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। मंगलवार को शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी तकनीकों को समझा।
विभागाध्यक्ष नर सिंह चौहान ने बताया कि एनजीएस चिकित्सा और जैविक अनुसंधान की महत्वपूर्ण तकनीक है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों की पहचान, मानव स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य और जीवों के आनुवंशिक अध्ययन में तेजी आती है। देश के बड़े अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में रोगों के सटीक निदान के लिए इसका उपयोग हो रहा है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जैविक नमूनों से डीएनए निकालने, गुणवत्ता जांचने और सीक्वेंसिंग की प्रक्रिया सिखाई। प्रयोगशाला सत्र में प्रतिभागियों ने डीएनए आइसोलेशन का अभ्यास किया और आधुनिक उपकरणों का संचालन समझा। विशेषज्ञों ने बताया कि यह तकनीक भविष्य के अनुसंधान, व्यक्तिगत चिकित्सा और जैविक निदान में नई संभावनाएं खोल रही है। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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विभागाध्यक्ष नर सिंह चौहान ने बताया कि एनजीएस चिकित्सा और जैविक अनुसंधान की महत्वपूर्ण तकनीक है। इससे दुर्लभ आनुवंशिक रोगों की पहचान, मानव स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य और जीवों के आनुवंशिक अध्ययन में तेजी आती है। देश के बड़े अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में रोगों के सटीक निदान के लिए इसका उपयोग हो रहा है।
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कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जैविक नमूनों से डीएनए निकालने, गुणवत्ता जांचने और सीक्वेंसिंग की प्रक्रिया सिखाई। प्रयोगशाला सत्र में प्रतिभागियों ने डीएनए आइसोलेशन का अभ्यास किया और आधुनिक उपकरणों का संचालन समझा। विशेषज्ञों ने बताया कि यह तकनीक भविष्य के अनुसंधान, व्यक्तिगत चिकित्सा और जैविक निदान में नई संभावनाएं खोल रही है। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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