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Rohtak News: भूखे पेट खेलने वाली बेटियों को नहीं मिली खेल राशि

Sun, 18 Feb 2024 01:58 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 18 Feb 2024 01:58 AM IST
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Daughters who played on hungry stomach did not get playing money
रोहतक। भूखे पेट भजन न होई गोपाला.. यह कहावत एमडीयू की रग्बी खिलाड़ियों पर सटीक बैठ रही है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 18 से 20 जनवरी तक हुई इंटर यूनिवर्सिटी रग्बी स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली बेटियों को अब तक खेल राशि नहीं मिली है। यही नहीं, भूखे पेट मैदान में खेलने वाली इन बेटियों ने मैच के बाद अपनी जेब से रुपये खर्च कर खाना खाया। इसका भी भुगतान विवि की ओर से नहीं किया गया है।
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खिलाड़ियों का कहना है कि एमडीयू में खेल के अनुसार ही खिलाड़ियों से बरताव होता है। नामी व ज्यादा खेले जाने वाले खेलों और उनके खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलता है, जबकि अन्य पर फोकस नहीं किया जाता है। रग्बी टीम कुछ इसी तरह की नजर आ रही है। यही वजह है कि अब तक टीम की खिलाड़ियों को उनके खाने-पीने व खेल राशि का भुगतान नहीं किया गया है। खिलाड़ियों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि कम खेले जाने वाले खेलों के खिलाड़ियों को किट भी अच्छी नहीं दी जाती है। इस कारण खिलाड़ी को अच्छी किट अपनी जेब से खरीदनी पड़ती है।
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खिलाड़ियों ने बताया कि 15 से 18 जनवरी तक ट्रेनिंग कैंप लगा था। इसका सारा खर्च खिलाड़ियों ने अपने पास से किया। कैंप की राशि भी बजट पर ही निर्भर है। खिलाड़ी बजट के इंतजार में हैं कि कब बजट पास हो औ कब उन्हें इनामी और शिविर की राशि मिले।
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रग्बी कोच नरेंद्र का कहना है कि खाने के लिए खिलाड़ियों को अपने पास से रुपये दिए गए थे। बजट पास होने के बाद ही उन्हें सारी राशि मिल पाएगी। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में खेलने गए खिलाड़ियों के खाने के लिए सारी व्यवस्था की गई थी। खिलाड़ियों का कोई खर्च नहीं कराया गया है।



एमडीयू के किसी भी खिलाड़ी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है। खिलाड़ियों के लिए खाने, रहने और साधन की व्यवस्था एमडीयू की ओर से की जाती है। पहले किसी कारणवश खिलाड़ियों को राशि नहीं दी जाती तो बाद में पूरी राशि दी जाती है।

- प्रो. आरपी गर्ग, खेल निदेशक, एमडीयू।
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