सावधानः एक महीने में ऑनलाइन ठगी की 33 वारदात, अकेले 25 एसबीआई के खाता धारकों के साथ
शहर में एटीएम कार्ड का क्लोन बना कर ठगी करने वाला गिरोह पूरी तरह से सक्रिय है। ठगों ने मंगलवार को दो युवकों के एटीएम कार्ड का क्लोन बना कर 83 हजार रुपयों की चपत लगा दी। दोनों पीड़ितों ने पुलिस को इसकी शिकायत दी। नया बस अड्डा चौकी पुलिस ने पीड़िुतों की शिकायतों पर केस दर्ज कर ठगों की तलाश शुरू कर दी है।
नया बस अड्डा चौकी पुलिस को दी शिकायत में कृष्ण निवासी गांव किरसोला जींद ने बताया कि 6 जनवरी को वह बहादुरगढ़ से अपने गांव जा रहा था। रोहतक बस स्टैंड स्थित एसबीआई के एटीएम से उसने 40 हजार रुपये निकाल लिए और घर चला गया। उसने बताया कि 7 जनवरी को उसके मोबाइल फोन पर मैसेज आया, जिसमें एटीएम से 21 हजार रुपये और निकलने का मैसेज मिला था। इसके बाद वह तुरंत बैंक में गया। जहां पर पूछताछ के दौरान पता लगा कि उक्त 21 हजार की राशि भी नया बस स्टैंड रोहतक स्थित एसबीआई के एटीएम से ही निकाली गई है।
वहीं, दूसरी ओर नया बस अड्डा चौकी पुलिस को शिकायत देते हुए सुनील कुमार निवासी घनी पुरा ने बताया कि वह 5 जनवरी दोपहर डेढ़ बजे परिवार सहित सोनीपत जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़ा था। उसने बताया कि जिस बस में वह सवार हुआ, उस बस में काफी भीड़ थी। इसी भीड़ का फायदा उठाते हुए किसी अज्ञात ने उसकी जेब से पर्स निकाल लिया।
पर्स में 20 हजार रुपयों की नकदी सहित दो एटीएम कार्ड व अन्य जरूरी कागजात थे। साथ ही एटीएम का पिन नंबर भी एक पर्ची पर लिखकर पर्स में डाला हुआ था। उसने बताया कि 7 जनवरी को उसके मोबाइल फोन पर एटीएम से रुपये निकासी संबंधित मैसेज आया। जिसमें 62 हजार 500 रुपये निकाले गए थे। उसने बताया कि उसका भी खाता एसबीआई में है।
एटीएम धोखाधड़ी की दिसंबर माह में 33 वारदात
एक तरफ देश को कैशलेस बनाने की कवायद चल रही है, दूसरी तरफ डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था पर चोरों, ठगों की निगाहें टिकी हुई हैं। जैसे जैसे एटीएम कार्ड धारकों की संख्या बढ़ती जा रही है, धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
रोहतक में एटीएम धोखाधड़ी की दिसंबर माह में 33 वारदात घटित हुई। जिसमें अधिकतर वारदात देश के दूसरे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाताधारकों के साथ घटित हुई है। कुल 33 में से 25 वारदात एसबीआई खाताधारकों के साथ हुई है। जिसमें लोगों को करीब 20 लाख रुपयों का चूना लगा है। इन धोखाधड़ी के मामलों में शातिर बिना एटीएम कार्ड को हाथ लगाए, बैंक अकाउंट में रखी राशि का सफाया कर देते हैं।
दिसंबर 2019 में ये हुई एटीएम कार्ड क्लोन की वारदात:
थाना वारदात एसबीआई खाता धारकों से वारदात
आर्य नगर 05 03
बहुअकबरपुर 04 03
आईएमटी 00 00
कलानौर 04 03
लाखनमाजरा 00 00
महम 01 01
पीजीआईएमएस 01 01
पुरानी सब्जी मंडी 03 02
सिटी 02 02
सिविल लाइन थाना 03 02
सदर 00 00
सांपला 04 03
शिवाजी कालोनी 05 04
अर्बन एस्टेट 01 01
कुल 33 25
कैसे बचें एटीएम फ्रॉड से
- बैंक के निर्देशों को अनदेखा न करें। बैंक अधिकारी कहते हैं कि कैश निकालते वक्त रसीद पर साइन कर दें। हमेशा अपने एटीएम का पिन बदलते रहें ताकि कोई दूसरा न जाने।
- .एटीएम मशीन से पैसे निकलते समय मशीन को अच्छे से चेक कर लें कि वहां कोई दूसरा की बोर्ड तो नहीं लगा हुआ है। मशीन को देखें कि उसमें कोई अतिरिक्त मशीन या कैमरा तो नहीं लगा हुआ है।
- जब भी ट्रांजेक्शन करें किसी और को रूम के भीतर न घुसने दें तो वहीं अपने पासवर्ड को सुरक्षित तरीके से एंटर करें। पैसा निकाल कर अपनी रिसीप्ट को एटीएम के रूम में न फेंकें।
- जब भी एटीएम रूम से बाहर निकलें हमेशा इस बात को चेक करें कि आपका ट्रांजेक्शन पूरा हो गया है और मशीन की हरी लाइट जलने लगी है।
- कहीं भी जब आप अपना एटीएम कार्ड यूज कर रहे हैं या स्वाइप करवा रहे हैं तो उसे अपनी आंखों के सामने ही करवाएं।
- एटीएम कार्ड खो जाने पर तुरंत अपने बैंक के इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें और उसे ब्लॉक करवाएं। साथ ही नया कार्ड बनवाने पर पुराने को नष्ट कर दें। हमेशा अपने मोबाइल नंबर को रजिस्टर करवाएं ताकि जब भी आपके कार्ड से पैसे निकाले जाएं आपको इस बात की जानकारी हो।
- एटीएम में पैसे निकालने के दौरान किसी भी दूसरे व्यक्ति की मदद न लें। एटीएम या डेबिट कार्ड पर उसका पिन लिखकर न रखें। एटीएम या डेबिट कार्ड का पिन गोपनीय होता है, पिन के बारे में न तो बैंक कर्मचारियों को बताएं न ही अपने घर के किसी व्यक्ति को बताएं।
यह इत्तफाक है कि अधिकतर वारदात एसबीआई खाता धारकों के साथ हुई है। इसके लिए एसबीआई अधिकारियों को सुरक्षा संबंधित दिशा निर्देश देते हुए उचित कदम उठाने के बारे में कहा जाएगा। जिले के सभी एटीएम खासतौर से एसबीआई एटीएम की सुरक्षा संबंधित जांच भी करवाई जाएगी। एटीएम मशीन पर ट्रांजेक्शन करने से पहले व बाद में कैंसिल का बटन दबाकर भी इन वारदातों से बचा जा सकता है।- मुकेश जैन, एलडीएम।