{"_id":"0a25c693c25b9deebca869a1daaf010d","slug":"theft-case-9-lack-taken-for-providing-27-lack-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"27 लाख दिलवाने का झांसा देकर ऐंठ लिए साढ़े नौ लाख","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
27 लाख दिलवाने का झांसा देकर ऐंठ लिए साढ़े नौ लाख
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 09 Jan 2016 02:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक निजी कंपनी का सुपरवाइजर ठगी का शिकार हो गया। शातिरों ने वर्षों पहले
विज्ञापन
शेयर बाजार में लगाए रुपये की बीमा राशि सहित कुल 27 लाख रुपये की रकम
दिलवाने का लालच देकर उससे साढ़े नौ लाख रुपये ऐंठ लिए। धोखाधड़ी की भनक
लगने पर पीड़ित ने एसपी से कार्रवाई की गुहार लगाई। एक माह तक दौड़भाग के
बाद सिविल लाइन थाने में बीमा कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया
गया है।
दरअसल, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सेक्टर-1 निवासी रंजन भाटिया हिसार रोड स्थित एपीएस कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। अपनी शिकायत में रंजन ने बताया कि उसने वर्ष 2005 में ईजीएल कंपनी से 80 हजार रुपये के शेयर खरीदे थे।
शेयर खरीदने के दो साल बाद कंपनी बंद हो गई। इसके बाद रंजन ने रुपये वापस मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी। रंजन का कहना है कि जून, 2015 में उनके पास दिल्ली से एक बीमा कंपनी के कर्मचारी ने फोन किया। उसने बताया कि जिस कंपनी से उन्होंने शेयर खरीदे थे उसकी तरफ से बीमा राशि सहित करीब 27.29 लाख आए हैं, जो रंजन को देने हैं।
यूं शुरू हुआ खेल
बीमा कंपनी के कर्मचारी ने रंजन को अपने जाल में फंसाकर औपचारिकता पूरी करने के लिए अपने खाते में 18 हजार 600 रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियोें ने फोन कर उससे कई बार में पौने चार लाख रुपये ऐंठ लिए और रंजन से कहा कि कुछ दिन में बैंक खाते में रुपये आ जाएंगे।
मगर, दो दिन बाद कंपनी ने बड़ी रकम का हवाला देकर एनओसी फीस के बहाने रंजन से साढ़े पांच लाख रुपये और मांग लिए। कंपनी ने रुपये वापस मिलने का आश्वासन दिया तो रंजन ने ये रकम भी खाते में डाल दी। इसके बाद भी खाते में रुपया नहीं आया तो रंजन ने कंपनी से संपर्क साधा।
इस पर कर्मचारी ने कहा कि उन्होंने सर्विस टैक्स नहीं भरा है, इसलिए पेमेंट रुक गई है। अबकी बार कंपनी ने रंजन से रुपये भेजने की एवज में पौने चार लाख रुपये मांग लिए। इस पर रंजन को शक हो गया। उसने कंपनी को दिए सारे रुपये के दस्तावेज मांगे तो कर्मचारियों ने इनकार कर दिया। इसके बाद रंजन ने एसपी को शिकायत की।
आरोपियों के मोबाइल नंबर हैं चालू
जिस कंपनी के कर्मचारियों ने रंजन से ठगी की, उनके मोबाइल नंबर अभी तक चालू हैं। इसके बाद भी पुलिस ने उनसे पूछताछ करने की जरूरत नहीं समझी। रंजन ने बताया कि 10 दिसंबर को एसपी से शिकायत की थी, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसके बाद डीएसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों से भी गुहार लगाई गई। हालांकि शिकायत के एक माह बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि अभी तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। संबंधित मोबाइल नंबर पर बातचीत की जाएगी।
दरअसल, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सेक्टर-1 निवासी रंजन भाटिया हिसार रोड स्थित एपीएस कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। अपनी शिकायत में रंजन ने बताया कि उसने वर्ष 2005 में ईजीएल कंपनी से 80 हजार रुपये के शेयर खरीदे थे।
शेयर खरीदने के दो साल बाद कंपनी बंद हो गई। इसके बाद रंजन ने रुपये वापस मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी। रंजन का कहना है कि जून, 2015 में उनके पास दिल्ली से एक बीमा कंपनी के कर्मचारी ने फोन किया। उसने बताया कि जिस कंपनी से उन्होंने शेयर खरीदे थे उसकी तरफ से बीमा राशि सहित करीब 27.29 लाख आए हैं, जो रंजन को देने हैं।
यूं शुरू हुआ खेल
बीमा कंपनी के कर्मचारी ने रंजन को अपने जाल में फंसाकर औपचारिकता पूरी करने के लिए अपने खाते में 18 हजार 600 रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियोें ने फोन कर उससे कई बार में पौने चार लाख रुपये ऐंठ लिए और रंजन से कहा कि कुछ दिन में बैंक खाते में रुपये आ जाएंगे।
मगर, दो दिन बाद कंपनी ने बड़ी रकम का हवाला देकर एनओसी फीस के बहाने रंजन से साढ़े पांच लाख रुपये और मांग लिए। कंपनी ने रुपये वापस मिलने का आश्वासन दिया तो रंजन ने ये रकम भी खाते में डाल दी। इसके बाद भी खाते में रुपया नहीं आया तो रंजन ने कंपनी से संपर्क साधा।
इस पर कर्मचारी ने कहा कि उन्होंने सर्विस टैक्स नहीं भरा है, इसलिए पेमेंट रुक गई है। अबकी बार कंपनी ने रंजन से रुपये भेजने की एवज में पौने चार लाख रुपये मांग लिए। इस पर रंजन को शक हो गया। उसने कंपनी को दिए सारे रुपये के दस्तावेज मांगे तो कर्मचारियों ने इनकार कर दिया। इसके बाद रंजन ने एसपी को शिकायत की।
आरोपियों के मोबाइल नंबर हैं चालू
जिस कंपनी के कर्मचारियों ने रंजन से ठगी की, उनके मोबाइल नंबर अभी तक चालू हैं। इसके बाद भी पुलिस ने उनसे पूछताछ करने की जरूरत नहीं समझी। रंजन ने बताया कि 10 दिसंबर को एसपी से शिकायत की थी, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसके बाद डीएसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों से भी गुहार लगाई गई। हालांकि शिकायत के एक माह बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि अभी तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। संबंधित मोबाइल नंबर पर बातचीत की जाएगी।