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पापा, मैं बेटा हूं तुम्हारा, चिंता मत करना...

Wed, 05 Oct 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Wed, 05 Oct 2016 01:55 AM IST
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परिवार में सबसे बड़ी थी कविता, छोटी बहन और एक भाई - फोटो : amar ujala
पापा, मैं बेटी नहीं, बेटा हूं तुम्हारा, कभी चिंता मत करना। यह बात अपने पिता जितेंद्र चौहान के सामने हमेशा बोलती थी मौत को गले लगाने वाली कविता। अपनी बहादुर और समझदार बेटी के शव को देखकर बिलखते हुए पिता उक्त बातें ही बार बार कह रहे थे। चौहान धीमी आवाज में बिलखते हुए कह रहे थे कि कहां चला गया मेरा बहादुर बेटा।
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केवल पिता ही नहीं बल्कि चाचा सहित परिवार के दूसरे सदस्य भी कविता मौत की खबर से सदमे जैसी स्थिति में हैं। देर शाम तक परिवार के कुछ सदस्यों को उसके दुनिया से चले जाने की जानकारी नहीं दी गई थी। कविता के पिता एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट हैं। एक छोटी बहन और भाई में कविता सबसे बड़ी थी। कविता दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में इन्टर्नशिप की थी। पिता ने बताया कि एक बार उनका किसी के साथ झगड़ा हो गया। इस पर कविता ने कई वकीलों को पैरवी के लिए लाकर खड़ा कर दिया था।
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दो दिन पहले ही घर से आई थी कविता

इन्टर्नशिप के चलते कविता पढ़ाई के अधिकतर समय घर पर रही। परिजनों ने बताया कि परीक्षाओं की तैयारी के लिए कविता 15 सितंबर को दिल्ली से हॉस्टल में शिफ्ट हुई थी। इसके कुछ दिन बाद वह बीमार हो गई। इसके बाद पिता उसे अपने साथ घर ले गये थे। 2 अक्तूबर को ही वह पिता के साथ रोहतक आई थी। उसे हॉस्टल में छोड़कर पिता घर चले गये थे। हॉस्टल आने के दो दिन बाद बेटी की मौत की खबर परिजनों के पास पहुंच गई। परिजनों का कहना है कि कविता घर से रोहतक आई थी तो बहुत खुश थी। कविता आत्मघाती कदम भी उठा सकती है इसका तो परिवार के सदस्यों को अंदेशा तक नहीं था।
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जब चीफ जस्टिस के सामने पैरवी को खड़ी हुई थी कविता

बिलखते हुए पिता ने बेटी की बहादुरी के कई प्रसंग का जिक्र किया। बताया कि कविता की पढ़ाई अभी पूरी नहीं हुई थी। इन्टर्नशिप के दौरान कुछ दिन पहले वह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस वीएस ठाकुर के सामने एक केस की पैरवी के लिए गई थी। देश की सर्वोच्च अदालत में बेटी को पैरवी करता देखा पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। कविता हमेशा पिता से वादा करती थी कि वह एक दिन देश की शानदार वकील बनेगी। कविता के दुनिया से चले जाने के बाद पिता के सपने भी खत्म हो गये।


हॉस्टल में भी करती रहती थी हंसी मजाक

घर में ही नहीं कविता हॉस्टल में भी अन्य लड़कियों के साथ हंसी-मजाक करती रहती थी। सभी लड़कियों के साथ वह मिलनसार थी। कविता के साथ उसके कमरे में जेबीटी की छात्रा रहती है। इस समय हॉस्टल में करीब 35 लड़कियां रह रही हैं। इनमें अधिकतर पढ़ाई-लिखाई करती हैं।
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