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खुद को छोटा न समझें, लकड़ी के बुरादे से जलता था घर का चूल्हा, आज मैं मंत्री

Sun, 26 Mar 2017 01:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 26 Mar 2017 01:57 AM IST
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self do not little, small furniture cards burn gas, today i am minister
मंत्री ग्राोवर का स्‍वाागत करते ‌िननिगम कमीऱ्र्मी - फोटो : amar ujala
नगर निगम परिसर में कच्चे सफाई कर्मचारियों को जूते और ड्रेस बांटने पहुंचे सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर भावुक हो गए। सफाई कर्मचारियों को छोटा समझने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सफाई कर्मचारी बेचारे नहीं हैं। आज तो बीपीएल के कार्ड बनते हैं, लेकिन बंटवारे के बाद रोहतक आए तो बीपीएल कार्ड भी नहीं होते थे। घनीपुरा से चार किलोमीटर दूर विश्वकर्मा स्कूल में पढ़ने जाते थे। जयकिशन शर्मा प्रधान रहे हैं, चाहे उनसे पूछ लो? कंधे पर एक बड़ा सा थैला होता था। छुट्टी के बाद काठमंडी में ट्रक से लक्कड़ उतारते थे, फिर थैला भरकर बुरादा लाते थे, इसके बाद ही घर का चूल्हा जलता था।
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 ग्रोवर ने कहा कि वे साल 1987 में पहली बार नगर पालिका के पार्षद बने। उस समय आज का वार्ड नंबर-12 वार्ड 16 होता था। दूसरी बार साल 1991 में जीतकर आया, लेकिन तीसरी बार चुनाव से पहले पूर्व सीएम बंसीलाल के कार्यकाल में उनके वार्ड को काट दिया गया। जिस गली में वे रहते हैं, उसे महिला वर्ग के लिए आरक्षित वार्ड में शामिल कर दिया गया, ताकि तीसरी बार मनीष ग्रोवर पार्षद न बन सकें। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आपके बीच में से ही निकलकर आज मंत्री हैं। यही नहीं एससी समुदाय से ही रेनू डाबला प्रदेश के सबसे अहम नगर निगम की मेयर हैं। ऐसे में खुद को छोटा या बड़ा न समझें, सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें।
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परिवार नहीं, महापुरुषों को सम्मान दे रहे सीएम
ग्रोवर ने कहा कि सीएम मनोहर लाल खट्टर से पहले जो भी मुख्यमंत्री आए, उन्होंने परिवारवाद और क्षेत्रवाद को बढ़ावा दिया। किसी ने जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी के नाम पर संस्थाओं व संस्थानों का नाम रखा, तो किसी ने देवीलाल और रणबीर सिंह हुड्डा का नाम आगे किया। खट्टर ऐसे सीएम हैं, जिन्होंने डाक्टर बीआर अंबेडकर के नाम से कुरुक्षेत्र और कैथल में कॉलेज खोले हैं।
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कुरुक्षेत्र जिले में संस्कृत विश्वविद्यालय का नाम महर्षि बाल्मीकि के नाम पर रखा है। कार्यक्रम में सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान संजय बिड़लान, कार्यकारी अभियंता आनंद स्वरूप, सुखबीर चंदोलिया, रमेश भाटिया, सतीश आहूजा और धर्मबीर शर्मा, कुलविंद्र सिंह सिक्का, सुभाष चटोला, कौशल उगम, विक्की बिडलान, रवि चड्डा, रोशन बाल्मीकि, महाबीर बागड़ी और नीलम पांचाल मौजूद रहे।

सम्मान समारोह की झलकियां
- मेयर रेनू डाबला और डिप्टी मेयर अशोक भाटी एक साथ कार्यक्रम में आए और 40 मिनट तक सहकारिता मंत्री के आने का इंतजार करते रहे।
- संबोधन में मेयर रेनू डाबला ने मंच पर मौजूद पूर्व पार्षद सूरजमल किलोई का नाम नहीं लिया।
- भाजपा नेता रामअवतार बाल्मीकि ने डिप्टी मेयर अशोक भाटी और सूरजमल किलोई का नाम नहीं लिया।
- कार्यक्रम में 20 पार्षदों में से केवल मेयर रेनू डाबला, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, भाजपा पार्षद जयकिशन, ममता रानी, पूर्व पार्षद सूरजमल किलोई और नरोतामल भटनागर ही कार्यक्रम में पहुंचे।

- वक्ता सुभाष चटौला ने कहा कि जूते और ड्रेस से कुछ नहीं होगा। कच्चे कर्मचारियों का सरकार भला करना चाहती है तो पक्का कर दे। अफसरों के घरों में काम कर रहे सफाई कर्मियों को गलियों में लगाया जाए। फिर सफाई का ठेका देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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