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एमबीबीएस के छात्र की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 26 May 2016 01:57 AM IST
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छात्रों से जानकारी लेते अधिकारी
- फोटो : amar ujala
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पीजीआईएमएस के जल घर के वाटर टैंक में डूबने से हुई एमबीबीएस के छात्र सचिन की मौत को उसके दोस्तों ने करीब पांच घंटे तक छिपाये रखी। सचिन अपने दो दोस्तों के साथ बुधवार सुबह करीब पांच बजे वाटर टैंक में नहाने गया था। सचिन के डूबने के बाद उसके साथ गए दोनों दोस्त हॉस्टल में आकर अपने कमरे में सो गए। सुबह करीब दस बजे उन्होंने पीजीआई प्रशासन को सचिन के डूबने की बात बताई। दोस्तों का कहना है कि वह सचिन के डूबने से डर गए थे इसलिए काफी देर तक चुप रहे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें? लेकिन उनकी गतिविधियों से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकार बताते हैं कि यदि सचिन के दोस्त उसके डूबते समय ही मदद मांगते तो सचिन को बचाया जा सकता था। क्योंकि डूबने के बाद कुछ देर बाद तक व्यक्ति की मौत नहीं होती है। हो सकता है कि इस बीच राहत एवं बचाव कार्य चलाकर उसे बचा लिया जाता। यही नहीं दोस्तों की पांच घंटे की खामोशी भी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। ऐसी कौन सी बात थी जिसकी वजह से वह डर गए थे? जबकि ऐसी घटनाओं में अमूमन साथ आए लोग तुरंत मामले की जानकारी लोगों को दे देते हैं। बचाने के लिए मदद मांगते हैं। सचिन के दोस्तों ने ऐसा क्यों नहीं किया? दोस्त के डूबने के बाद वह कमरे में आकर सो कैसे सकते हैं? घटना के करीब पांच घंटे बाद ऐसा क्या हुआ कि दोस्तों ने इसकी जानकारी पीजीआई प्रशासन को दी? यही वजह रही कि सचिन के जल घर के वाटर टैंक में डूबने की बात मौके पर पहुंचे किसी को हजम नहीं हो रही थी।
बारह फीट गहरा है वाटर टैंक
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पीजीआई के जल घर का वाटर टैंक तकरीबन 12 फीट गहरा है, लेकिन इस समय पानी कम होने के चलते टैंक के किनारे पर तीन और अंदर आठ फीट पानी है। यदि सचिन अंदर की ओर नहीं जाता तो बच जाता।
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एफएसएल टीम पहुंची मौके पर
सचिन की मौत का कारण जानने के लिए एफएसएल टीम भी मौके पर पहुंची। महिला जांच अधिकारी सरोज दहिया ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित किये। अधिकारी के कहने पर सचिन का चश्मा, टी शर्ट और लोवर भी तलाशा गया।
पुलिस वाले ने वाटर टैंक में उतरने पर जताई हैरानी
सचिन का शव वाटर टैंक से निकलने के लिए उसमें उतरने से पुलिस वाले भी डर रहे थे। हालांकि दो पुलिस वालों ने किसी तरह टैंक में उतर कर सचिन के शव को बाहर निकला। लेकिन एक कर्मचारी ने तो पानी की गहराई में जाने से पहले आशंका तक जता दी कि कहीं वह अंदर उलझ न जाए। ऐसे में तीनों छात्र जोकि तैरना तक नहीं जानते थे, उनका अंदर जाना सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा आश्चर्य तब हुआ जब जल घर का टैंक तलाशने में निजी सुरक्षा अधिकारियों, सरकारी सुरक्षा अधिकारियों के साथ संस्थान के अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। टैंक में चारों तरफ घास-फूस के साथ झाड़ियां उगी हुई हैं। सुबह-सुबह ऐसे टैंक में कोई नहाने की कैसे सोच सकता है, यह बात भी पुलिस वालों सहित हर किसी के जेहन में उठ रही थी।
फर्जी हाउस सर्जन की ड्यूटी करने के मामले में चल रही थी जांच
सूत्रों की मानें तो सचिन पर पीजीआईएमएस में फर्जी हाउस सर्जन की ड्यूटी करने के मामले की जांच चल रही थी। वह काफी समय से परेशान चल रहा था।
एक के बाद एक मौत, नहीं जाग रहा प्रशासन
पीजीआईएमएस के हॉस्टलों में एक के बाद एक एमबीबीएस छात्रों की मौत हो रही है, लेकिन प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। हॉस्टलों में शराब पीना, मारपीट करना आम बात हो गई है। पिछले दिनों हंगामा करने के मामले में एक पुलिस अधिकारी ने कार्रवाई करने की तैयारी की तो उलटा उस पर ही सवाल उठा दिए गए। जबकि संस्थान का एक छात्र जेएलएन में डूब कर, दूसरा हॉस्टल की छत से गिरकर जान गवां चुका है।
पढ़ाई में रोक टोक पसंद नहीं करता था सचिन
सचिन के सहयोगी साथियों ने बताया कि वह पढ़ाई में रोक टोक पसंद नहीं करता था। इसलिए उसने मुख्य दरवाजे पर ताला लगा रखा था। पिछले गेट के बारे में उसके खास साथी ही जानते थे। बताते हैं कि सचिन अपने कक्ष के मुख्य गेट पर हमेशा ताला लगाकर रखता था, जबकि अंदर का गेट खुला रखता था। अब सुरक्षा कर्मचारियों ने सचिन के कक्ष को बंद कर दिया है।
बोले अधिकारी
सचिन एमबीबीएस अंतिम वर्ष का छात्र था। उसको अब इंटर्नशिप पूरी करनी थी। वह अपने साथियों के साथ जल घर आया और बुधवार सुबह उसका शव टैंक में मिला। मामले में पुलिस जांच करेगी, तभी कोई बात सामने आ पाएगी।
- डॉ. ओपी कालरा, कुलपति, हेल्थ विश्वविद्यालय
पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा शव
फोरेंसिक विभाग ने एमबीबीएस छात्र सचिन का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया। देर शाम डॉक्टरों ने शव का पोस्टमार्टम किया। सूत्रों के अनुसार सचिन के पेट में पानी मिला है। आशंका जताई जा रही है उसकी मौत डूबने से हुई है। उसने शराब पी थी या नहीं इसके लिए विसरा लिया गया है।
सचिन का शव देख बिलख पडे़ परिजन
जिस बेटे को पढ़ाया लिखाया और बडे़ अरमानों से पीजीआईएमएस रोहतक डॉक्टर बनने के लिए भेजा उसका शव देख परिजन बिलख पडे़। पिता महेंद्र और मां देवी रानी को सचिन के साथियों ने दिलासा देने का प्रयास किया, लेकिन उनकी आंखों में कई सवाल तैर रहे थे।
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जानकार बताते हैं कि यदि सचिन के दोस्त उसके डूबते समय ही मदद मांगते तो सचिन को बचाया जा सकता था। क्योंकि डूबने के बाद कुछ देर बाद तक व्यक्ति की मौत नहीं होती है। हो सकता है कि इस बीच राहत एवं बचाव कार्य चलाकर उसे बचा लिया जाता। यही नहीं दोस्तों की पांच घंटे की खामोशी भी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। ऐसी कौन सी बात थी जिसकी वजह से वह डर गए थे? जबकि ऐसी घटनाओं में अमूमन साथ आए लोग तुरंत मामले की जानकारी लोगों को दे देते हैं। बचाने के लिए मदद मांगते हैं। सचिन के दोस्तों ने ऐसा क्यों नहीं किया? दोस्त के डूबने के बाद वह कमरे में आकर सो कैसे सकते हैं? घटना के करीब पांच घंटे बाद ऐसा क्या हुआ कि दोस्तों ने इसकी जानकारी पीजीआई प्रशासन को दी? यही वजह रही कि सचिन के जल घर के वाटर टैंक में डूबने की बात मौके पर पहुंचे किसी को हजम नहीं हो रही थी।
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बारह फीट गहरा है वाटर टैंक
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पीजीआई के जल घर का वाटर टैंक तकरीबन 12 फीट गहरा है, लेकिन इस समय पानी कम होने के चलते टैंक के किनारे पर तीन और अंदर आठ फीट पानी है। यदि सचिन अंदर की ओर नहीं जाता तो बच जाता।
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एफएसएल टीम पहुंची मौके पर
सचिन की मौत का कारण जानने के लिए एफएसएल टीम भी मौके पर पहुंची। महिला जांच अधिकारी सरोज दहिया ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित किये। अधिकारी के कहने पर सचिन का चश्मा, टी शर्ट और लोवर भी तलाशा गया।
पुलिस वाले ने वाटर टैंक में उतरने पर जताई हैरानी
सचिन का शव वाटर टैंक से निकलने के लिए उसमें उतरने से पुलिस वाले भी डर रहे थे। हालांकि दो पुलिस वालों ने किसी तरह टैंक में उतर कर सचिन के शव को बाहर निकला। लेकिन एक कर्मचारी ने तो पानी की गहराई में जाने से पहले आशंका तक जता दी कि कहीं वह अंदर उलझ न जाए। ऐसे में तीनों छात्र जोकि तैरना तक नहीं जानते थे, उनका अंदर जाना सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा आश्चर्य तब हुआ जब जल घर का टैंक तलाशने में निजी सुरक्षा अधिकारियों, सरकारी सुरक्षा अधिकारियों के साथ संस्थान के अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। टैंक में चारों तरफ घास-फूस के साथ झाड़ियां उगी हुई हैं। सुबह-सुबह ऐसे टैंक में कोई नहाने की कैसे सोच सकता है, यह बात भी पुलिस वालों सहित हर किसी के जेहन में उठ रही थी।
फर्जी हाउस सर्जन की ड्यूटी करने के मामले में चल रही थी जांच
सूत्रों की मानें तो सचिन पर पीजीआईएमएस में फर्जी हाउस सर्जन की ड्यूटी करने के मामले की जांच चल रही थी। वह काफी समय से परेशान चल रहा था।
एक के बाद एक मौत, नहीं जाग रहा प्रशासन
पीजीआईएमएस के हॉस्टलों में एक के बाद एक एमबीबीएस छात्रों की मौत हो रही है, लेकिन प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। हॉस्टलों में शराब पीना, मारपीट करना आम बात हो गई है। पिछले दिनों हंगामा करने के मामले में एक पुलिस अधिकारी ने कार्रवाई करने की तैयारी की तो उलटा उस पर ही सवाल उठा दिए गए। जबकि संस्थान का एक छात्र जेएलएन में डूब कर, दूसरा हॉस्टल की छत से गिरकर जान गवां चुका है।
पढ़ाई में रोक टोक पसंद नहीं करता था सचिन
सचिन के सहयोगी साथियों ने बताया कि वह पढ़ाई में रोक टोक पसंद नहीं करता था। इसलिए उसने मुख्य दरवाजे पर ताला लगा रखा था। पिछले गेट के बारे में उसके खास साथी ही जानते थे। बताते हैं कि सचिन अपने कक्ष के मुख्य गेट पर हमेशा ताला लगाकर रखता था, जबकि अंदर का गेट खुला रखता था। अब सुरक्षा कर्मचारियों ने सचिन के कक्ष को बंद कर दिया है।
बोले अधिकारी
सचिन एमबीबीएस अंतिम वर्ष का छात्र था। उसको अब इंटर्नशिप पूरी करनी थी। वह अपने साथियों के साथ जल घर आया और बुधवार सुबह उसका शव टैंक में मिला। मामले में पुलिस जांच करेगी, तभी कोई बात सामने आ पाएगी।
- डॉ. ओपी कालरा, कुलपति, हेल्थ विश्वविद्यालय
पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा शव
फोरेंसिक विभाग ने एमबीबीएस छात्र सचिन का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया। देर शाम डॉक्टरों ने शव का पोस्टमार्टम किया। सूत्रों के अनुसार सचिन के पेट में पानी मिला है। आशंका जताई जा रही है उसकी मौत डूबने से हुई है। उसने शराब पी थी या नहीं इसके लिए विसरा लिया गया है।
सचिन का शव देख बिलख पडे़ परिजन
जिस बेटे को पढ़ाया लिखाया और बडे़ अरमानों से पीजीआईएमएस रोहतक डॉक्टर बनने के लिए भेजा उसका शव देख परिजन बिलख पडे़। पिता महेंद्र और मां देवी रानी को सचिन के साथियों ने दिलासा देने का प्रयास किया, लेकिन उनकी आंखों में कई सवाल तैर रहे थे।