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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद चार माह में केवल 14 शिकायतें मिलीं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 24 Jul 2016 01:49 AM IST
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आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन झा ने लोगों से की शिकायत करने की अपील
- फोटो : amar ujala
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फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए करीब चार माह पहले गठित न्यायिक आयोग को अभी तक प्रदेश भर से केवल 14 शिकायतें मिली हैं। इनमें से तीन शिकायतें रोहतक जिले की हैं। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन झा ने पीड़ितों से आयोग के समक्ष शिकायत करने की अपील की है, ताकि आयोग का काम तेजी से हो सके।
न्यायिक आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन झा शनिवार को कैनाल रेस्ट हाउस पहुंचे। उनके साथ आयोग के सदस्य सेवानिवृत्त आईपीएस एनसी पाधि और आयोग के सचिव संजीव सिंगला भी थे। आयोग के अध्यक्ष का मानना है कि विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद भी कम शिकायतें मिलने का कारण कम्युनिकेशन गैप है। उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग मामले की तह तक जाने के लिए प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करेगा। शिकायतें मिलने के बाद पहली बैठक का कार्यकाल 6 महीने का होगा।
बता दें कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की सच्चाई तक पहुंचने के लिए प्रदेश सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन करने के लिए 8 अप्रैल को अधिसूचना जारी की थी। 18 अप्रैल को आयोग के सदस्यों ने कार्यभार संभाल लिया था। 17 जून को समाचार पत्रों में विज्ञापन छपने के बाद पब्लिक नोटिस प्रकाशित कराया गया था। इसमें शिकायतें भेजने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
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शिकायतों के आधार पर जारी होंगे नोटिस
पत्रकारों से बात करते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन झा ने कहा कि आयोग के गठन संबंधी विज्ञापन क ा सही तरीके से प्रचार नहीं हो सका। इस कारण पीड़ितों तक इसकी सूचना नहीं पहुंची। यही वजह रही कि आयोग के पास नाममात्र की शिकायतें पहुंची। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर हिंसा के समय मौजूद अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। आयोग का गठन हिंसा के पीछे के षड्यंत्र का पता लगाने के लिए किया गया है। चूंकि आयोग को घटनाओं पर स्वयं संज्ञान लेने की अनुमति नहीं है। इस कारण पीड़ितों की शिकायतें बहुत मायने रखती हैं।
सात दिनों के अंदर भेज सकते हैं शिकायत
आयोग को अभी तक भले ही उम्मीद से कम शिकायतें मिली हों, लेकिन झा का कहना है कि जल्द ही पीड़ित शिकायत लेकर आयोग के पास पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की ओर से सात दिनों के अंदर शिकायतें भेजी जा सकती हैं। पीड़ित पक्ष अपनी शिकायत को गुड़गांव के सेक्टर 47 स्थित हरियाणा सतर्कता ब्यूरो के भवन के ग्राउंड फ्लोर पर भेज सकते हैं। पीड़ित को अपनी शिकायत सचिव, झा कमीशन आयोग के नाम लिखनी होगी। शिकायत को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो बिल्डिंग, ग्राउंड फ्लोर नजदीक सामुदायिक केंद्र, सेक्टर-47, गुरुग्राम 122001 के पते पर भेजना होगा।
आमजन और संगठन भी कर सकते हैं शिकायत
न्यायिक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पीड़ित पक्ष के अलावा कोई भी व्यक्ति या संगठन हिंसा के संबंध में शिकायत कर सकता है। लेकिन उन्हें घटना की पूरी जानकारी होनी चाहिए। शिकायत के साथ शपथ पत्र आयोग के पास भेजना होगा। शिकायतें व्यक्तिगत तौर पर या डाक के माध्यम से भेजी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आयोग का गठन किया गया है। शिकायत प्राप्त होने के बाद जांच के लिए आयोग प्रभावित जिलों का दौरा करेगा। यदि किसी व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलवाने की आवश्यकता होगी तो उसे समन भेजकर बुलाया जाएगा।
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न्यायिक आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन झा शनिवार को कैनाल रेस्ट हाउस पहुंचे। उनके साथ आयोग के सदस्य सेवानिवृत्त आईपीएस एनसी पाधि और आयोग के सचिव संजीव सिंगला भी थे। आयोग के अध्यक्ष का मानना है कि विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद भी कम शिकायतें मिलने का कारण कम्युनिकेशन गैप है। उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग मामले की तह तक जाने के लिए प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करेगा। शिकायतें मिलने के बाद पहली बैठक का कार्यकाल 6 महीने का होगा।
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बता दें कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की सच्चाई तक पहुंचने के लिए प्रदेश सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन करने के लिए 8 अप्रैल को अधिसूचना जारी की थी। 18 अप्रैल को आयोग के सदस्यों ने कार्यभार संभाल लिया था। 17 जून को समाचार पत्रों में विज्ञापन छपने के बाद पब्लिक नोटिस प्रकाशित कराया गया था। इसमें शिकायतें भेजने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
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शिकायतों के आधार पर जारी होंगे नोटिस
पत्रकारों से बात करते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन झा ने कहा कि आयोग के गठन संबंधी विज्ञापन क ा सही तरीके से प्रचार नहीं हो सका। इस कारण पीड़ितों तक इसकी सूचना नहीं पहुंची। यही वजह रही कि आयोग के पास नाममात्र की शिकायतें पहुंची। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर हिंसा के समय मौजूद अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। आयोग का गठन हिंसा के पीछे के षड्यंत्र का पता लगाने के लिए किया गया है। चूंकि आयोग को घटनाओं पर स्वयं संज्ञान लेने की अनुमति नहीं है। इस कारण पीड़ितों की शिकायतें बहुत मायने रखती हैं।
सात दिनों के अंदर भेज सकते हैं शिकायत
आयोग को अभी तक भले ही उम्मीद से कम शिकायतें मिली हों, लेकिन झा का कहना है कि जल्द ही पीड़ित शिकायत लेकर आयोग के पास पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की ओर से सात दिनों के अंदर शिकायतें भेजी जा सकती हैं। पीड़ित पक्ष अपनी शिकायत को गुड़गांव के सेक्टर 47 स्थित हरियाणा सतर्कता ब्यूरो के भवन के ग्राउंड फ्लोर पर भेज सकते हैं। पीड़ित को अपनी शिकायत सचिव, झा कमीशन आयोग के नाम लिखनी होगी। शिकायत को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो बिल्डिंग, ग्राउंड फ्लोर नजदीक सामुदायिक केंद्र, सेक्टर-47, गुरुग्राम 122001 के पते पर भेजना होगा।
आमजन और संगठन भी कर सकते हैं शिकायत
न्यायिक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पीड़ित पक्ष के अलावा कोई भी व्यक्ति या संगठन हिंसा के संबंध में शिकायत कर सकता है। लेकिन उन्हें घटना की पूरी जानकारी होनी चाहिए। शिकायत के साथ शपथ पत्र आयोग के पास भेजना होगा। शिकायतें व्यक्तिगत तौर पर या डाक के माध्यम से भेजी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आयोग का गठन किया गया है। शिकायत प्राप्त होने के बाद जांच के लिए आयोग प्रभावित जिलों का दौरा करेगा। यदि किसी व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलवाने की आवश्यकता होगी तो उसे समन भेजकर बुलाया जाएगा।