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पीजीआईएमएस हॉस्टल में रैगिंग
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 30 Sep 2016 01:12 AM IST
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पीजीअाइ राेहतक
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और पीजीआईएमएस के नियमों को ताक पर रखते हुए एमबीबीएस के चार सीनियर छात्रों ने अपने 11 नये जूनियर साथियों के साथ रैगिंग की घटना को अंजाम दिया है। जब इसकी भनक एंटी रैगिंग कमेटी को लगी तो उन्होंने जांच शुरू की। इस मामले में सर्वप्रथम गाज हास्टल के गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मचारी पर गिरी है। कर्मचारी को सेवा मुक्त करते हुए टीम ने जूनियर छात्रों से लिखित शिकायत लेकर जांच शुरू कर दी है।
संस्थान की जांच टीम के अनुसार पीजीआईएमएस के इंटर्न हास्टल में बुधवार रात को एमबीबीएस का एक सीनियर छात्र अपने चार साथियों के साथ अपनी बकाया जन्मदिन की पार्टी करता है। इसमें वे मादक पदार्थ का सेवन करते हैं। पार्टी में तीन छात्र वर्ष 2014 एमबीबीएस बैच और एक अन्य बैच का था। इन चारों के साथ एक निजी मेडिकल कालेज से माइग्रेशन करवा कर आया एमबीबीएस का सीनियर छात्र भी था। जांच टीम के सामने आया कि इन पांचों छात्रों में से एक छात्र अपने कमरे में रुक गया और बाकी चार में से एक ने नये बैच के छात्र को फोन किया। जांच में सामने आया कि ये दोनों पीछे बैच मेट रहे हैं। जब ये चारों ब्वायज हास्टल में पहुंचे तो वहां उन्होंने जूनियरों से बातचीत की और उन्हें नाचने, गाने जैसे प्रतिबंधित कार्य कराए। हालांकि, उन्होंने आश्वासन भी दिया कि भविष्य में उन्हें संस्थान में कोई परेशानी नहीं आएगी। रात एक बजकर 40 मिनट से सुबह तीन बज कर 40 मिनट तक ब्लाक आठ के कक्ष में हाई वोल्टेज ड्रामा जारी रहा। जब इसकी जानकारी सुबह अधिकारियों को लगी तो उन्होंने मौके पर जा कर जांच पड़ताल की। पहले तो जूनियर छात्र डर के मारे कुछ बोलने को तैयार नहीं थे, लेकिन जब उनसे अलग पूछा गया तो उन्होंने सारी बात बता दी। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में एंटी रैगिंग कमेटी के एक सदस्य की संस्थान के एक प्रोफेसर से इस संबंध में कहा सुनी भी हुई। इस रैगिंग की घटना में उक्त प्रोफेसर का एक रिश्तेदार भी पीड़ित था, जब प्रोफेसर ने सवाल उठाया तो मामले की जांच शुरू हुई। गौरतलब है कि संस्थान में रैगिंग जैसे छोटे मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर जांच कर सीनियर छात्रों को निलंबित कर मामला सुलझा लेते थे। लेकिन इस बार मामला लीक हो गया है। इस संबंध में बातचीत के लिए जब कुलपति से संपर्क साधा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं संस्थान के प्रवक्ता डॉ. प्रशांत ने मामले पर बताया कि उनके कार्यालय में इसकी कोई अपडेट नहीं है।
कैसे रुके रैगिंग, नजर रखने वाला कोई नहीं
पीजीआईएमएस के हास्टल में न्यू कमर के साथ क्या हो रहा है, इस पर नजर रखने वाला कोई नहीं है। यहां कहने के लिए जगह-जगह रैगिंग न करने की चेतावनी बोर्ड और अधिकारियों के फोन नंबर सार्वजनिक हैं। लेकिन बोर्ड पर अंकित अधिकांश अधिकारी या तो बदल गए हैं या वे फोन ही नहीं उठाते।
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संस्थान के हास्टल की स्थिति कई सालों से बदतर चली आ रही है। यहां हास्टल की फीस तो बढ़ा दी गई है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से सुविधाएं न के बराबर हैं। हास्टल में न तो सीसीटीवी कैमरों की सुविधा है और न ही गेट पर सुरक्षा कर्मचारी। बुधवार रात रैगिंग मामले में एक बार फिर हास्टल में मादक पदार्थ के सेवन की बात सामने आई। जांच में खुलासा हुआ कि हास्टल पर तैनात सुरक्षा गार्ड घटना के दौरान अपनी ड्यूटी पर ही नहीं था। गौरतलब है कि संस्थान के अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा के लिए तो सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती अपने कार्यालय और घरों में करवा रखी है, लेकिन हास्टल और कैंपस की सुरक्षा नदारद है। संस्थान की सुरक्षा प्रशासन ने एक निजी कंपनी को दे रखी है, लेकिन सरकारी सुरक्षा अधिकारी और कर्मचारी भी हास्टल की व्यवस्थाओं की ओर ध्यान नहीं देते।
ये है एंटी रैगिंग टीम और यहां की जा सकती है शिकायत
डॉ. एमसी गुप्ता, डॉ. समीर दत्ता, डॉ. एसके धत्तरवाल, डॉ. केएन रत्तन, डॉ. विवेक मलिक, डॉ. आरबी जैन, डॉ. सरिता मग्गू, डॉ. एचके अग्रवाल, डॉ. गजेंद्र सिंह, डीन कार्यालय, प्रो. विद्या देवी, ज्वाईंट डायरेक्टर कार्यालय, डॉ. ब्रिजेंद्र सिंह, डॉ. सुखबीर सिंह, बादाम सिंह, प्रभारी पुलिस पीजीआईएमएस थाना
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संस्थान की जांच टीम के अनुसार पीजीआईएमएस के इंटर्न हास्टल में बुधवार रात को एमबीबीएस का एक सीनियर छात्र अपने चार साथियों के साथ अपनी बकाया जन्मदिन की पार्टी करता है। इसमें वे मादक पदार्थ का सेवन करते हैं। पार्टी में तीन छात्र वर्ष 2014 एमबीबीएस बैच और एक अन्य बैच का था। इन चारों के साथ एक निजी मेडिकल कालेज से माइग्रेशन करवा कर आया एमबीबीएस का सीनियर छात्र भी था। जांच टीम के सामने आया कि इन पांचों छात्रों में से एक छात्र अपने कमरे में रुक गया और बाकी चार में से एक ने नये बैच के छात्र को फोन किया। जांच में सामने आया कि ये दोनों पीछे बैच मेट रहे हैं। जब ये चारों ब्वायज हास्टल में पहुंचे तो वहां उन्होंने जूनियरों से बातचीत की और उन्हें नाचने, गाने जैसे प्रतिबंधित कार्य कराए। हालांकि, उन्होंने आश्वासन भी दिया कि भविष्य में उन्हें संस्थान में कोई परेशानी नहीं आएगी। रात एक बजकर 40 मिनट से सुबह तीन बज कर 40 मिनट तक ब्लाक आठ के कक्ष में हाई वोल्टेज ड्रामा जारी रहा। जब इसकी जानकारी सुबह अधिकारियों को लगी तो उन्होंने मौके पर जा कर जांच पड़ताल की। पहले तो जूनियर छात्र डर के मारे कुछ बोलने को तैयार नहीं थे, लेकिन जब उनसे अलग पूछा गया तो उन्होंने सारी बात बता दी। सूत्रों की मानें तो इस संबंध में एंटी रैगिंग कमेटी के एक सदस्य की संस्थान के एक प्रोफेसर से इस संबंध में कहा सुनी भी हुई। इस रैगिंग की घटना में उक्त प्रोफेसर का एक रिश्तेदार भी पीड़ित था, जब प्रोफेसर ने सवाल उठाया तो मामले की जांच शुरू हुई। गौरतलब है कि संस्थान में रैगिंग जैसे छोटे मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर जांच कर सीनियर छात्रों को निलंबित कर मामला सुलझा लेते थे। लेकिन इस बार मामला लीक हो गया है। इस संबंध में बातचीत के लिए जब कुलपति से संपर्क साधा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं संस्थान के प्रवक्ता डॉ. प्रशांत ने मामले पर बताया कि उनके कार्यालय में इसकी कोई अपडेट नहीं है।
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कैसे रुके रैगिंग, नजर रखने वाला कोई नहीं
पीजीआईएमएस के हास्टल में न्यू कमर के साथ क्या हो रहा है, इस पर नजर रखने वाला कोई नहीं है। यहां कहने के लिए जगह-जगह रैगिंग न करने की चेतावनी बोर्ड और अधिकारियों के फोन नंबर सार्वजनिक हैं। लेकिन बोर्ड पर अंकित अधिकांश अधिकारी या तो बदल गए हैं या वे फोन ही नहीं उठाते।
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संस्थान के हास्टल की स्थिति कई सालों से बदतर चली आ रही है। यहां हास्टल की फीस तो बढ़ा दी गई है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से सुविधाएं न के बराबर हैं। हास्टल में न तो सीसीटीवी कैमरों की सुविधा है और न ही गेट पर सुरक्षा कर्मचारी। बुधवार रात रैगिंग मामले में एक बार फिर हास्टल में मादक पदार्थ के सेवन की बात सामने आई। जांच में खुलासा हुआ कि हास्टल पर तैनात सुरक्षा गार्ड घटना के दौरान अपनी ड्यूटी पर ही नहीं था। गौरतलब है कि संस्थान के अधिकारियों ने अपनी सुरक्षा के लिए तो सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती अपने कार्यालय और घरों में करवा रखी है, लेकिन हास्टल और कैंपस की सुरक्षा नदारद है। संस्थान की सुरक्षा प्रशासन ने एक निजी कंपनी को दे रखी है, लेकिन सरकारी सुरक्षा अधिकारी और कर्मचारी भी हास्टल की व्यवस्थाओं की ओर ध्यान नहीं देते।
ये है एंटी रैगिंग टीम और यहां की जा सकती है शिकायत
डॉ. एमसी गुप्ता, डॉ. समीर दत्ता, डॉ. एसके धत्तरवाल, डॉ. केएन रत्तन, डॉ. विवेक मलिक, डॉ. आरबी जैन, डॉ. सरिता मग्गू, डॉ. एचके अग्रवाल, डॉ. गजेंद्र सिंह, डीन कार्यालय, प्रो. विद्या देवी, ज्वाईंट डायरेक्टर कार्यालय, डॉ. ब्रिजेंद्र सिंह, डॉ. सुखबीर सिंह, बादाम सिंह, प्रभारी पुलिस पीजीआईएमएस थाना