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कदमों की चाल करेगी मोबाइल चार्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 06 Sep 2015 02:59 AM IST
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अब मोबाइल की बैट्री डिस्चार्ज होने की नो टेंशन। वैसे तो मोबाइल बैट्री चार्ज करने के कई तरीके मार्केट में मौजूद हैं। लेकिन, अब एक ऐसा तरीका सामने आया है जो आपके ही कदमों की ताल से मोबाइल की बैट्री चार्ज हो जाएगी। जितने कदम आप चलेंगे बैैट्री को उतनी ही ऊर्जा मिलेगी। सुनने में भले ही थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन, ये सच है। दरअसल ये कमाल एमडीयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र ने कर दिखाया है।
छात्र ने ऐसा डिवाइज तैयार किया है जो जूतों के तलवों में लगाया जाएगा और फिर कदमों की चाल वॉल्टेज पैदा करेगी, जिससे जेब में रखा मोबाइल चार्ज हो जाएगा। खास बात यह है कि इस तरीके से न पर्यावरण को नुकसान होगा और न बिजली खर्च होगी।
एमडीयू केमैकेनिकल ब्रांच के फाइनल ईयर के छात्र अश्वनी कुमार ने महज 130 रुपये खर्च करके यह डिवाइज तैयार की है। बकौल अश्वनी कुमार नियमानुसार एक प्रोजेक्ट पर काम करना था। वह सिर्फ औपचारिकता के लिए प्रोजेक्ट वर्क नहीं करना चाहता था, इसलिए ऐसा काम चुना जो उपयोग भी हो सके।
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क्या है प्रोजेक्ट
अश्वनी ने बताया कि ऊर्जा दो श्रेणीकी होती है। पहली श्रेणी में खत्म होने वाली ऊर्जा आती है जिसमें पेट्रोल, डीजल, परमाणु ऊर्जा आदि शामिल है। जबकि दूसरी श्रेणी में नवीनीकरण की ऊर्जा गिनी जाती है, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और कंपन ऊर्जा को शामिल किया जाता है। व्यक्ति के चलने फिरने से कंपन होता है और यही कंपन ऊर्जा पैदा करता है। मोबाइल चार्ज करने के लिए शरीर के इसी कंपन को एसी डीसी करंट में तब्दील किया गया है, जिससे मोबाइल चार्ज किया जा सकता है।
कैसे करेगा काम
कंपन ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने के लिए पॉली विनाइलीडीन फ्लूओराइड नाम का पीजो इलेक्ट्रिक मटैरियल का उपयोग किया गया है। अश्वनी ने बताया कि पीवीडीएफ से बनी दो गोल पत्तियों (पैच) को जूते की सोल में लगाया गया। जूते पहन कर चलने से पैदा होने वाली कंपन को करंट में बदलने के लिए दोनों पैच को समांतर कनेक्शन में जोड़ा ताकि वोल्टेज की मात्रा को बढ़ाया जा सके। यह जूते पहनकर चलने से इन पत्तियों पर दबाव पड़ता है। इससे एसी करंट बनता है, लेकिन मोबाइल चार्ज करने के लिए डीसी करंट की जरूरत होती है। एसी को डीसी में बदलने के लिए एक डायोड रेक्टिफायर ब्रिज लगाया गया।
इसके बाद डीसी करंट को एक फिल्टरेशन सर्किट (कैपेसिटर) में जमा किया। इस करंट को एक आईसी 7804 से गुजारा ताकि चार्जिंग के लिए जरूरी कम से कम 4 वॉल्ट का करंट पैदा हो सके। इसके बाद वायर के थ्रू मोबाइल बैट्री चार्ज हो जाती है। अश्वनी ने बताया कि जब यह प्रयोग किया तो देखा 4 की बजाय 9 तक भी वोल्टेज बना है जो कि बैट्री को चार्ज करनेे के लिए काफी है।
सस्ता सुंदर और टिकाऊ
अश्वनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. दीपक झाबड़ा के अनुसार यह डिवाइज बेहद ही सस्ता, सुंदर और टिकाऊ है। इसे बनाने में महज 130 रुपये का खर्च आया है। महज 13 सौ कदम चलने पर बैट्री चार्ज करने जितना वॉल्टेज पैदा हो जाएगा। कदम ताल के अलावा यदि इन दोनों पत्तियों को हाथ केअंगूठे से भी दबाया जाए तो यह ऊर्जा पैदा करेगा।
इसलिए होगा आसान
प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करने से पहले भी इसका डेमो विभाग में रखा गया। एक मोबाइल को चार्ज करके भी दिखाया। इसके बाद मैकेनिकल ब्रांच के एचओडी डॉ. अश्विनी ढिंगड़ा को रिपोर्ट सौंप दी गई है। डॉ. छाबड़ा का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या ज्यादा रहती है वहां के लोगों के लिए भी यह फायदेमंद होगा।
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छात्र ने ऐसा डिवाइज तैयार किया है जो जूतों के तलवों में लगाया जाएगा और फिर कदमों की चाल वॉल्टेज पैदा करेगी, जिससे जेब में रखा मोबाइल चार्ज हो जाएगा। खास बात यह है कि इस तरीके से न पर्यावरण को नुकसान होगा और न बिजली खर्च होगी।
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एमडीयू केमैकेनिकल ब्रांच के फाइनल ईयर के छात्र अश्वनी कुमार ने महज 130 रुपये खर्च करके यह डिवाइज तैयार की है। बकौल अश्वनी कुमार नियमानुसार एक प्रोजेक्ट पर काम करना था। वह सिर्फ औपचारिकता के लिए प्रोजेक्ट वर्क नहीं करना चाहता था, इसलिए ऐसा काम चुना जो उपयोग भी हो सके।
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क्या है प्रोजेक्ट
अश्वनी ने बताया कि ऊर्जा दो श्रेणीकी होती है। पहली श्रेणी में खत्म होने वाली ऊर्जा आती है जिसमें पेट्रोल, डीजल, परमाणु ऊर्जा आदि शामिल है। जबकि दूसरी श्रेणी में नवीनीकरण की ऊर्जा गिनी जाती है, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और कंपन ऊर्जा को शामिल किया जाता है। व्यक्ति के चलने फिरने से कंपन होता है और यही कंपन ऊर्जा पैदा करता है। मोबाइल चार्ज करने के लिए शरीर के इसी कंपन को एसी डीसी करंट में तब्दील किया गया है, जिससे मोबाइल चार्ज किया जा सकता है।
कैसे करेगा काम
कंपन ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने के लिए पॉली विनाइलीडीन फ्लूओराइड नाम का पीजो इलेक्ट्रिक मटैरियल का उपयोग किया गया है। अश्वनी ने बताया कि पीवीडीएफ से बनी दो गोल पत्तियों (पैच) को जूते की सोल में लगाया गया। जूते पहन कर चलने से पैदा होने वाली कंपन को करंट में बदलने के लिए दोनों पैच को समांतर कनेक्शन में जोड़ा ताकि वोल्टेज की मात्रा को बढ़ाया जा सके। यह जूते पहनकर चलने से इन पत्तियों पर दबाव पड़ता है। इससे एसी करंट बनता है, लेकिन मोबाइल चार्ज करने के लिए डीसी करंट की जरूरत होती है। एसी को डीसी में बदलने के लिए एक डायोड रेक्टिफायर ब्रिज लगाया गया।
इसके बाद डीसी करंट को एक फिल्टरेशन सर्किट (कैपेसिटर) में जमा किया। इस करंट को एक आईसी 7804 से गुजारा ताकि चार्जिंग के लिए जरूरी कम से कम 4 वॉल्ट का करंट पैदा हो सके। इसके बाद वायर के थ्रू मोबाइल बैट्री चार्ज हो जाती है। अश्वनी ने बताया कि जब यह प्रयोग किया तो देखा 4 की बजाय 9 तक भी वोल्टेज बना है जो कि बैट्री को चार्ज करनेे के लिए काफी है।
सस्ता सुंदर और टिकाऊ
अश्वनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. दीपक झाबड़ा के अनुसार यह डिवाइज बेहद ही सस्ता, सुंदर और टिकाऊ है। इसे बनाने में महज 130 रुपये का खर्च आया है। महज 13 सौ कदम चलने पर बैट्री चार्ज करने जितना वॉल्टेज पैदा हो जाएगा। कदम ताल के अलावा यदि इन दोनों पत्तियों को हाथ केअंगूठे से भी दबाया जाए तो यह ऊर्जा पैदा करेगा।
इसलिए होगा आसान
प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करने से पहले भी इसका डेमो विभाग में रखा गया। एक मोबाइल को चार्ज करके भी दिखाया। इसके बाद मैकेनिकल ब्रांच के एचओडी डॉ. अश्विनी ढिंगड़ा को रिपोर्ट सौंप दी गई है। डॉ. छाबड़ा का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या ज्यादा रहती है वहां के लोगों के लिए भी यह फायदेमंद होगा।