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एमडीयू की परीक्षा प्रणाली में सेंध, फिर बदले छात्रा की उत्तर पुस्तिका के पेज
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:38 AM IST
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एमडीयू
- फोटो : file photo
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की उत्तर पुस्तिका में फर्जीवाड़े का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब 10 दिन बाद फिर से झज्जर के फतेहपुरी स्थित सीबीएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की एक छात्रा की आंसर कॉपी के पेज निकालने का खुलासा हुआ है। हालांकि, यह मामला कई माह पहले का है, लेकिन सीक्रेसी ब्रांच के डिप्टी रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार दहिया की शिकायत पर पीजीआई थाना पुलिस ने अब इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट प्रोफेसर समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
दरअसल, दिसंबर 2015 में एमडीयू की बीटेक की परीक्षाएं हुईं थीं। इंस्टीट्यूट में झज्जर के सिलानी गेट की रहने वाली दिव्या नाम की एक छात्रा ने बीटेक की परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पता चला कि छात्रा की उत्तर पुस्तिका से अंदर के पेज गायब हैं। मामला पकड़ में आने पर एमडीयू की तरफ से जांच बैठाई गई। जांच में सामने आया है कि इंस्टीट्यूट के एक असिस्टेंट प्रोफेसर समेत एक स्टाफ मेंबर और छात्र कमल कुमार ने मिलीभगत कर उत्तर पुस्तिका से पेज निकाले हैं।
छात्र कमल को पास कराने के लिए दिव्या की उत्तर पुस्तिका से पेज निकाले गए थे। उस समय असिस्टेंट प्रोफेसर सिविल डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष थे। जांच के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार की तरफ से एसपी रोहतक को शिकायत दी गई। एसपी ने इसे झज्जर थाना पुलिस के पास भेज दिया, लेकिन मामला एमडीयू से जुड़ा होने के चलते अब मामला पीजीआई थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर हरवीर लोरा, स्टाफ मेंबर प्रदीप चौधरी और छात्र कमल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
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10 दिन पहले भी आया था मामला सामने
इस इंस्टीट्यूट में फर्जीवाड़े का यह पहला मामला नहीं है। 10 दिन पहले भी राहुल तिवारी नाम के एक बीटेक छात्र की उत्तर पुस्तिका से पेज निकालने के मामले का खुलासा हुआ था। राहुल ने दिसंबर 2016 में बीटेक छठे सेमेस्टर की परीक्षा दी थी, लेकिन जब परिणाम आया तो राहुल फेल हो गया। राहुल ने आरटीआई के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका निकलवाई तो उसके होश उड़ गए। उसकी कॉपी के बीच के पेज किसी ने बदल रखे थे।
सिर्फ आगे और पीछे का पेज ही राहुल की कॉपी के थे। बाद में खुलासा हुआ कि उसके सहपाठी कबूलपुर निवासी सचिन ने उत्तर पुस्तिका के पेज बदले हैं। पुलिस इस मामले में भी जांच कर रही है।
इंस्टीट्यूट में बड़े फर्जीवाड़े का संकेत
जिस तरीके से इस इंस्टीट्यूट के लगातार दो मामले पकड़ में आ चुके हैं, ऐसे में अब उस पर सवाल उठ रहे हैं। एक ही तरीके से होनहार छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के पेज निकालकर मुन्नाभाई छात्रों की उत्तर पुस्तिका में लगाएं गए हैं, वह किसी बड़े गिरोह की तरफ इशारा कर रहा है। फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाला यह गिरोह केवल बीटेक डिपार्टमेंट में ही या फिर पूरा ही इंस्टीट्यूट घेरे में है, यह तो जांच का विषय है। लेकिन जिस तरीके से एक के बाद एक मामला सामने आया है, उससे कहीं न कहीं इंस्टीट्यूट के साथ-साथ यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली भी खतरे हैं।
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दरअसल, दिसंबर 2015 में एमडीयू की बीटेक की परीक्षाएं हुईं थीं। इंस्टीट्यूट में झज्जर के सिलानी गेट की रहने वाली दिव्या नाम की एक छात्रा ने बीटेक की परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पता चला कि छात्रा की उत्तर पुस्तिका से अंदर के पेज गायब हैं। मामला पकड़ में आने पर एमडीयू की तरफ से जांच बैठाई गई। जांच में सामने आया है कि इंस्टीट्यूट के एक असिस्टेंट प्रोफेसर समेत एक स्टाफ मेंबर और छात्र कमल कुमार ने मिलीभगत कर उत्तर पुस्तिका से पेज निकाले हैं।
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छात्र कमल को पास कराने के लिए दिव्या की उत्तर पुस्तिका से पेज निकाले गए थे। उस समय असिस्टेंट प्रोफेसर सिविल डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष थे। जांच के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार की तरफ से एसपी रोहतक को शिकायत दी गई। एसपी ने इसे झज्जर थाना पुलिस के पास भेज दिया, लेकिन मामला एमडीयू से जुड़ा होने के चलते अब मामला पीजीआई थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर हरवीर लोरा, स्टाफ मेंबर प्रदीप चौधरी और छात्र कमल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
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10 दिन पहले भी आया था मामला सामने
इस इंस्टीट्यूट में फर्जीवाड़े का यह पहला मामला नहीं है। 10 दिन पहले भी राहुल तिवारी नाम के एक बीटेक छात्र की उत्तर पुस्तिका से पेज निकालने के मामले का खुलासा हुआ था। राहुल ने दिसंबर 2016 में बीटेक छठे सेमेस्टर की परीक्षा दी थी, लेकिन जब परिणाम आया तो राहुल फेल हो गया। राहुल ने आरटीआई के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका निकलवाई तो उसके होश उड़ गए। उसकी कॉपी के बीच के पेज किसी ने बदल रखे थे।
सिर्फ आगे और पीछे का पेज ही राहुल की कॉपी के थे। बाद में खुलासा हुआ कि उसके सहपाठी कबूलपुर निवासी सचिन ने उत्तर पुस्तिका के पेज बदले हैं। पुलिस इस मामले में भी जांच कर रही है।
इंस्टीट्यूट में बड़े फर्जीवाड़े का संकेत
जिस तरीके से इस इंस्टीट्यूट के लगातार दो मामले पकड़ में आ चुके हैं, ऐसे में अब उस पर सवाल उठ रहे हैं। एक ही तरीके से होनहार छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के पेज निकालकर मुन्नाभाई छात्रों की उत्तर पुस्तिका में लगाएं गए हैं, वह किसी बड़े गिरोह की तरफ इशारा कर रहा है। फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाला यह गिरोह केवल बीटेक डिपार्टमेंट में ही या फिर पूरा ही इंस्टीट्यूट घेरे में है, यह तो जांच का विषय है। लेकिन जिस तरीके से एक के बाद एक मामला सामने आया है, उससे कहीं न कहीं इंस्टीट्यूट के साथ-साथ यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली भी खतरे हैं।