करौंथा कांड: 16 साल चली सुनवाई, 500 पेज की चार्जशीट, 79 गवाह, गोली किसने चलाई पता नहीं
रामपाल सहित 24 को करौंथा कांड केस में बरी कर दिया गया है। वहीं तीन को आर्म्स एक्ट में दो-दो साल की सजा हुई है। एएसजे राकेश सिंह की अदालत ने 200 पेज का फैसला सुनाया है।
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विस्तार
हरियाणा के रोहतक के करौंथा कांड में 16 साल बाद मंगलवार को सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल सहित 24 आरोपियों को बरी कर दिया गया। जबकि तीन आरोपियों करौंथा निवासी कृष्णकांत, काठमंडी निवासी देवेंद्र व झज्जर के गुराना निवासी सुनील को आर्म्स एक्ट में दो-दो साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि बरवाला कांड में उम्रकैद की सजा के चलते रामपाल अभी जेल में ही रहेगा।
मामले के अनुसार रामपाल के बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट ने करौंथा में सतलोक आश्रम खोला था, लेकिन स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी के चलते आर्य समाजियों व आसपास के ग्रामीणों ने विरोध किया। 12 जुलाई 2006 को करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर भीड़ एकत्रित हो गई।
तनाव के बीच गोली लगने से झज्जर जिले के गांव बाघपुर के युवक सोनू की मौत हो गई थी, जबकि 61 लोग घायल हुए। पुलिस ने रामपाल सहित 38 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज आश्रम को सील कर कब्जे में ले लिया था। हालांकि, हाईकोर्ट से रामपाल को दो साल बाद जमानत मिल गई।
2013 में आश्रम को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट को दे दिया गया। इसी बीच रामपाल समर्थकों ने बरवाला में भी आश्रम बना लिया। करौंथा में दोबारा हुई हिंसा के बाद रामपाल बरवाला में शिफ्ट हो गए। नवंबर 2014 में करौंथा कांड की सीबीआई से जांच की मांग कराने की मांग उठी।
हाईकोर्ट ने रामपाल की जमानत रद्द कर दी और अदालत में पेश होने के लिए कहा। रामपाल हाईकोर्ट में पेश नहीं हुआ, इसके चलते कोर्ट ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के लिए पुलिस प्रशासन को आदेश दिए। जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची तो बरवाला में हिंसा हो गई। रामपाल को बरवाला के एक केस में उम्रकैद की सजा हुई है, जबकि रोहतक के करौंथा कांड में मंगलवार को फैसला आया है।
तीन दोषियों में से दो काट चुके हैं सजा से ज्यादा जेल, एक के चार माह बाकी
अदालत ने मामले में करौंथा निवासी कृष्णकांत, काठमंडी निवासी देवेंद्र व झज्जर के बुराना गांव निवासी सुनील को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। तीनों दोषियों से पुलिस ने दूसरों के लाइसेंसी हथियार बरामद किए थे। तीनों हथियारों को दोषियों के पास अवैध माना गया। ऐसे में अदालत ने तीनों को दो-दो साल की सजा सुनाई है। कृष्णकांत व देवेंद्र दो साल से ज्यादा समय तक न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। जबकि सुनील 20 माह जेल में रहे। ऐसे में उनको 4 माह की सजा भुगतनी पड़ेगी। बचाव पक्ष के वकील जेके गक्खड़ का कहना है कि तीनों दोषियों की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
ये आरोपी अभी भगोड़े
- रवींद्र निवासी बरवाला, हिसार
- सुरेंद्र निवासी फतेहपुर
- मुकेश निवासी गांधरा, रोहतक
- प्रेम निवासी करौंथा, रोहतक
- आजाद निवासी पीपली, सोनीपत
पांच आरोपियों की हो चुकी है मौत
- धर्मेंद्र निवासी करौंथा, रोहतक
- कृष्ण निवासी करसौला, जींद
- हवासिंह निवासी पिल्लूखेड़ा, जींद
- सतीशचंद्र निवासी सुंडाना, रोहतक
- महेंद्र निवासी पंजाबी बाग, दिल्ली
रामपाल सहित 24 हुए बरी
अदालत ने रामपाल, उनके बेटे वीरेंद्र, मनोज, पुरुषोत्तम, विजेंद्र, सूरजमल, अनिल कुमार, जगबीर, हरजीत, हवलदार जसबीर, हवलदार बिजेंद्र, अमित, कृष्ण, बसंत, राजकुमार, प्रीतम, रामफल, राजेंद्र, जितेंद्र, रवींद्र ढाका, जगदीश, अशोक कुमार व दो अन्य को बरी कर दिया।
रामपाल के भाई महेंद्र के खिलाफ चलेगा अभी केस
बचाव पक्ष के वकील जेके गक्खड़ ने बताया कि रामपाल सहित 38 के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसमें रामपाल सहित 24 बरी हुए हैं। पांच आरोपियों की मौत हो चुकी है। जबकि पांच भगोड़े घोषित हैं। तीन को आर्म्स एक्ट में दो-दो साल की सजा हुई है। जबकि रामपाल का भाई महेंद्र केस में पीओ हो गया था। मई 2022 में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ यह केस अलग से चल रहा है।
16 साल चली सुनवाई, 500 पेज की चार्जशीट, 79 गवाह, फिर भी रामपाल सहित 24 बरी
साल 2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर हिंसा हुई। सदर थाने में रामपाल सहित 38 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 120बी, 148, 149 व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 79 गवाह बनाए गए। इसमें 26 स्वतंत्र गवाह थे। साथ ही पुलिस ने दो 315 बोर की रिवाल्वर, आठ 12 बोर की गन, एक एसएलएआर व एक स्टेनगन बरामद की। केस में झज्जर जिले के गांव बाघपुर निवासी 20 वर्षीय सोनू की गोली लगने से मौत हुई। यह गोली 315 बोर की रिवाल्वर से चली थी, लेकिन पुलिस अदालत में यह साबित नहीं कर सकी कि सोनू को गोली पुलिस द्वारा बरामद हथियारों में से चली है। दूसरा, गवाह यह नहीं बता सके कि किसने गोली चलाई। ऐसे साक्ष्यों के अभाव में रामपाल सहित 24 आरोपी बरी हो गए।
- 1999 : रामपाल ने करौंथा में सतलोक आश्रम स्थापित किया।
- 2004 : स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी से आर्य समाजी नाराज हो गए।
- 2006 : आर्य समाजी व आसपास के गांवों के लोग सतलोक आश्रम के बाहर एकत्रित हुए। हिंसा में गोली लगने से झज्जर जिले के गांव बाघपुर के युवक सोनू की मौत हो गई। जबकि 61 घायल हुए।
- 2008 : हाईकोर्ट से रामपाल को जमानत मिली।
- 2013 : सुुप्रीम कोर्ट ने सतलोक आश्रम वापस रामपाल को सौंप दिया।
- 2014 : बरवाला में हिंसा हुई, जिसके बाद दोबारा रामपाल गिरफ्तार हुआ।
- 2017: बरवाला हिंसा में रामपाल को उम्रकैद की सजा हुई, तभी से हिसार जेल में है बंद।
- 2022 : करौंथा कांड में आया अदालत का फैसला, रामपाल सहित 24 बरी
मृतक के परिजन बोले-आर्य प्रतिनिधि सभा ने ही लड़ा केस
अदालत द्वारा करौंथा कांड में रामपाल सहित 24 आरोपियों को बरी करने के मामले में मृतक सोनू निवासी बाघपुर जिला झज्जर के परिजनों का कहना है कि वे इस संबंध में कुछ नहीं कहना चाहते। केस आर्य प्रतिनिधि सभा की तरफ से लड़ा गया है।
आर्य समाज ने रामपाल के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। वकील से बात करेंगे, कहां कमी रह गई। साथ ही रोहतक अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। - उमेद शर्मा, महासचिव आर्य प्रतिनिधि सभा दयानंद मठ, रोहतक
झज्जर व रोहतक जिला प्रशासन व पुलिस हुई थी हिंसा रोकने में नाकाम साबित
रोहतक जिला अदालत द्वारा रामपाल सहित 24 आरोपियों को बरी करने से करौंथा कांड का घटनाक्रम एक बार फिर ताजा हो गया है। जब डीघल गांव में हुई 27 गांवों की पंचायत में उमड़ी भीड़ को रोहतक व झज्जर पुलिस प्रशासन रोकने में नाकाम साबित हुआ था। दंगा विरोधी दस्ता (आरएएफ) दिल्ली से रोहतक पहुंचा और रातों-रात पांच हजार की भीड़ को खदेड़कर रामपाल व उसके दो हजार से ज्यादा अनुयायियों को सतलोक आश्रम से बाहर निकाला।
अदालत में दाखिल 500 पेज से ज्यादा की चार्जशीट में पुलिस की तरफ से बताया गया कि काफी समय से आर्य समाजियों व रामपाल समर्थकों के बीच तनाव चल रहा था। जुलाई 2006 में मामला और ज्यादा गरमा गया। बचाव पक्ष के वकील सुनील नानकवाल ने बताया कि पूर्णिमा पर एक तरफ जहां सतलोक आश्रम में दो हजार से ज्यादा रामपाल समर्थक आ गए, दूसरी तरफ डीघल गांव में 27 गांवों की पंचायत हुई। प्रशासन को टकराव का अंदेशा हो गया था। इसलिए झज्जर रोड के एक तरफ झज्जर के तत्कालीन डीसी, एसपी व दूसरी तरफ करौंथा गांव के पास रोहतक के उस समय के डीसी, एसपी व एसडीएम पहुंच गए। भारी संख्या में पुलिस बल के बावजूद भीड़ को आश्रम की तरफ बढ़ने से रोका नहीं जा सका। क्योंकि लोग खेतों के रास्ते आश्रम तक पहुंच गए।
पहले पथराव हुआ, फिर सोनू को गोली लगी
आश्रम के गेट से थोड़ी देर पर भीड़ जमा थी, जबकि रामपाल समर्थक आश्रम की छत पर मोर्चा संभाले हुए थे। दोनों तरफ से पथराव हो गया। अचानक गोली भीड़ में खड़े झज्जर जिले के बाघपुर निवासी सोनू को लगी। इससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए। तत्काल सोनू को पीजीआई ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। हिंसा में 61 लोग भी घायल हुए।
रात के अंधेरे में भीड़ को खदेड़ा आरएएफ ने
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खुद के जिले में हालात बेकाबू होते देखकर गृह मंत्रालय से मदद मांगी। रात आठ बजे तक अर्धसैनिक बलों की टीम रोहतक पहुंच गई थी। करौंथा की तरफ से अर्ध सैनिक बल आगे बढ़े। भीड़ को खदेड़ दिया गया। लोग बाइक व दोपहिया वाहन छोड़कर भागने लगे। सुबह 5 बजे तक रोडवेज व दूसरी निजी बसों में बैठाकर रातों-रात सतलोक आश्रम में से रामपाल समर्थकों को दूर ले जाय गया। साथ ही पुलिस ने रामपाल सहित 38 लोगों को हत्या के केस में गिरफ्तार कर लिया था।
सोनू को 315 बोर की पिस्तौल से चली गोली लगी थी, लेकिन पुलिस द्वारा बरामद 315 बोर की पिस्तौल की जांच से यह साबित नहीं हो सका कि यह गोली बरामद पिस्तौल से चली है। दूसरा, किसी गवाह ने यह नहीं कहा कि भीड़ में से किसने गोली चलाई। - सुनील कुमार नानकवाल, वकील बचाव पक्ष