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जेई, एमई और एक्सईएन की निरीक्षण रिपोर्ट के साथ ही जमा होगी फाइल

Sun, 12 Mar 2017 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 12 Mar 2017 02:06 AM IST
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JE, ME & exan report after file save, report
नगर ‌‌िननिगम - फोटो : amar ujala
शहर के विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। अब ज्वाइंट कमिश्नर की टेबल पर फाइल जमा करवाने से पहले जेई, एमई, एक्सईएन और एसई की निरीक्षण रिपोर्ट भी साथ लगानी होगी। इस संबंध में नगर निगम आयुक्त एवं डीसी अतुल कुमार ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। काफी समय से आयुक्त को भुगतान संबंधी गड़बड़ियों की शिकायत मिल रही थी। इसके चलते यह कदम उठाया गया है।
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 नियमों के तहत सबसे पहले निगम की इंजीनियरिंग ब्रांच विकास कार्य की अनुमानित लागत का रिकार्ड तैयार करती है। इसमें 10 लाख तक के विकास कार्य का अनुमान एक्सईएन और 50 लाख तक एसई की ओर से तैयार किया जाता है। इससे के बाद तकनीकी अनुमति एसई से ली जाती है, जबकि प्रशासनिक अनुमति संयुक्त आयुक्त देते हैं। इसके बाद एक्सईएन की ओर से टेंडर जारी किया जाता है। समय-समय पर जेई और एमई निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करते हैं। बाद में सैंपल लेकर लैब में भेजे जाते हैं।
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भुगतान को लेकर उलझ जाते हैं ठेकेदार
एक ठेकेदार ने बताया कि विकास कार्यों को समय-समय पर निगम भुगतान करता है, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया बेहद जटिल है। जेई बिल तैयार करता है, जबकि एमई रिपोर्ट बनाता है। एक्सईएन के हस्ताक्षर के बाद भुगतान के लिए ज्वाइंट कमिश्नर के पास फाइल भेजी जाती है। इसके बाद फाइल ऑडिट ब्रांच में जाती है, जहां से चेक जारी होता है। भुगतान राशि लेने के लिए ठेकेदार को फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचने के लिए पसीना बहाना पड़ता है।
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एक्सईएन, एमई और जेई की रिपोर्ट के बाद ही भुगतान
निगम आयुक्त ने आदेश जारी किए हैं कि विकास कार्यों का सुपरविजन और निरीक्षण अधीक्षक अभियंता, कार्यकारी अभियंता, नगर अभियंता और कनिष्ठ अभियंता करेंगे। कार्यकारी अभियंता के साथ-साथ एमई और जेई प्रत्येक कार्य की निरीक्षण व कार्य गुणवत्ता रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद ही फाइल भुगतान के लिए ज्वाइंट कमिश्नर के पास जाएगी। ज्वाइंट कमिश्नर भी तीनों अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट के बिना भुगतान जारी नहीं करेंगे।


पारदर्शिता लाने के लिए उठाया कदम
विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए कदम उठाए गए हैं। तीन-तीन अधिकारियों के निरीक्षण के बाद किसी तरह की गुणवत्ता में कमी की संभावना नहीं रहेगी। इसके चलते यह फैसला लिया गया है।
- अतुल कुमार, डीसी एवं निगम आयुक्त।
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