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ऐतिहासिक होगा फैसला, तीन महीने में मिला इंसाफ

Sun, 20 Dec 2015 01:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 20 Dec 2015 01:53 AM IST
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नेपाली युवती गैंगरेप और हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपियों को पुलिस चालान में शामिल सभी धाराओं में दोषी माना है।
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वहीं कोर्ट ने दोषियों में शामिल राजेश उर्फ घूचडू को छह धाराओें सहित आईपीसी की धारा 377 में भी दोषी माना है। पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि राजेश उर्फ घूचडु वही दोषी है जिसने युवती से सबसे ज्यादा दरिंदगी की थी।
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इन धाराओं में दोषी पाए जाने के बाद केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में भी शामिल किया जा सकता है। यदि कोर्ट केस को इस श्रेणी में रखकर फैसला करता है तो दोषियों को फांसी की सजा तक मिल सकती है। वहीं, 21 दिसंबर को आने वाला फैसला भी रोहतक कोर्ट के लिए ऐतिहासिक होगा। तीन महीने में सजा सुनाए जाने वाला यह अपने आप में पहला मामला होगा।
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रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी के लिए करेंगे अपील
वकील मलिक ने बताया कि गंभीर धाराओं में दोषी पाए जाने के बाद कोर्ट में केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केटेगरी में शामिल करने की अपील करेंगे। दूसरी तरफ आरोपी पक्ष के वकील कोर्ट में दोषियों पर अलग अलग धाराओं में सजा सुनाने की मांग करेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने भी कई केसों में सुनाई फांसी
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मानें तो इन धाराओं से जुड़े अधिकतर केस को सुप्रीम कोर्ट में रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में शामिल किया गया है।

चाहे वह दिल्ली गैंगरेप हो या अन्य मामले। इस कैटेगरी में आने के बाद अधिकतर मामलों में मौत की सजा सुनाई गई है।

पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि वह अदालत में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फै सलों के उदाहरण पेश करेंगे। जो फैसले ऐसी गंभीर धाराओं से जुड़े थे और जिन केस को बाद में रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में शामिल कर दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। इससे पीड़िता के परिजनों को भी न्याय मिल सके।

फैसला बनेगा एक नजीर
पीड़ित पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि यदि कोर्ट मुकदमें में सोमवार को दोषियों को सजा सुना देती है तो यह फैसला एक नजीर बन जाएगा। रोहतक कोर्ट में इतनी जल्दी आजतक किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं सुनाई गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत ने दिल्ली गैंगरेप के संबंध में बनी फास्ट ट्रेक  कोर्ट से भी जल्दी आरोपियों को दोषी करार दिया है। दिल्ली के फास्ट ट्रेक कोर्ट में आरोपियों को करीब 6 महीने बाद दोषी करार देकर सजा सुनाई थी। जबकि इस के मुकाबले में स्थानीय कोर्ट ने 3 महीने से भी कम समय से आरोपियों को दोषी करार दे दिया।
 
 

दिल्ली और नेपाली युवती गैंगरेप एक नजर में-
दिल्ली गैंगरेप
 16 दिसंबर 2012 को निर्भया से गैंगरेप
29 दिसंबर 2012 को निर्भया की सिंगापुर में मौत
3 जनवरी 2013 को कोर्ट में चालान पेश
7 जनवरी को कोर्ट में ट्रायल शुरू
8 जुलाई को गवाही पूरी
10 सितंबर को सभी आरोपी दोषी करार
13 सितंबर को दोषियों को फांसी की सजा

नेपाली गैंगरेप  
21 जुलाई 2015 को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की।
3 सितंबर पुलिस ने दो महीने बाद कोर्ट में सप्लीमेंटरी चालान पेश किया।
15 अक्तूबर पहली गवाही हुई। लगातार 9 दिनों तक गवाहियों का दौर चला।
30 नवंबर 2015 को गवाही पूरी।
1 से 7 दिसंबर तक आरोपियों के 313 के बयान दर्ज किए गए।
18 दिसंबर को कोर्ट ने मामले में सात आरोपियों को दोषी करार देकर 21 दिसंबर तक फैसला सुरक्षित रख दिया।

इन धाराओं में सभी आरोपी पाए गए दोषी-
सभी सातों आरोपी पवन, प्रमोद उर्फ  पदम,  सरवर उर्फ  बिल्लू, मनबीर उर्फ  मन्नी, सुनील उर्फ  मिढ़ा,  सुनील उर्फ  शीला और राजेश उर्फ  घुचडू को आईपीसी की करीब 7 धाराओं में दोषी माना गया। इनमें आईपीसी की धारा 376 डी ‘गैंगरेप’ 302 ‘हत्या’  364 ‘अपहरण’ 201 ‘सबूत खुर्द-बुर्द करना’ 120 बी ‘साजिश रचना’ और 149 ‘5 या 5 से अधिक लोगों का वारदात स्थल पर इक ट्ठा होना’ शामिल है। वहीं, दोषियों में शामिल राजेश उर्फ  घुचडू को  377 ‘अप्राकृतिक यौन संबंध’ में भी दोषी करार दिया गया है।

वकीलों के तर्क-  
केस रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में आ सकता है। इसके आधार पर दोषियों को शत प्रतिशत फांसी की सजा होगी। यदि कोई आरोपी पीड़िता को बचाने का प्रयास करता तो शायद कोर्ट से उसे राहत मिलती।  
अतर सिंह पंवार- एडवोकेट

कोर्ट ने आरोपियों को चालान में शामिल सभी धाराओं के तहत दोषी माना है। हम 21 दिसंबर को कोर्ट में केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में शामिल करने को लेकर बहस क रेंगे। ताकि दोषियों को फांसी की सजा मिल सके।

प्रदीप मलिक- एडवोकेट

सभी आरोपियों को शत प्रतिशत फांसी की सजा होगी। फांसी की सजा मिलने के बाद ही ऐसा जघन्य अपराध करने वालों को सबक मिलेगा। ताकि कोई भविष्य में ऐसा करतूत करने क ा दुस्साहस न करें।
दीपक कुं डू, बार एसोसिएशन के प्रधान
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