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छात्रा से गैंगरेप मामला ः निष्पक्ष जांच न हुई तो देंगे अनिश्चितकालीन धरना
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 30 Jul 2016 02:32 AM IST
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आरोपियों के परिजनों का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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भिवानी की छात्रा से गैंगरेप के आरोप में जेल भेजे गए जगमोहन, संदीप कुमार और अमित के परिजनों ने शुक्रवार को लघु सचिवालय में पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग उठाते हुए पुलिस प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। सुरक्षा के लिहाज से पुुलिस ने परिजनों को न तो डीसी से मिलने दिया और न ही एसपी से। इस दौरान परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे लघु सचिवालय में अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठ जाएंगे। मामला बढ़ता देख सीटीएम महेंद्र पाल परिजनों से मिलने पहुंचे और उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
रिमांड के बाद जेल भेजे गए आरोपी अमित, जगमोहन और संदीप के परिजन बुधवार को भिवानी से शहर पहुंचे। यहां उन्होंने पहले महिला थाने के बाहर पुलिस और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू की। इसके बाद पैदल मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय आए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लघु सचिवालय में पहले ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों को लघु सचिवालय के गेट पर पुलिस ने रोक दिया। आरोपियों के परिजन डीसी और एसपी से मिलने की मांग कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
उनका आरोप था कि पुलिस ने मीडिया और कुछ सामाजिक संगठनों के दबाव में तीनों निर्दोष को जेल भेज दिया। विरोध बढ़ता देख जिला प्रशासन हरकत में आया और सीटीएम महेंद्र पाल को परिजनों से मिलने भेजा गया। परिजनों ने सीटीएम के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने तीनों को जेल से बाहर लाने और निष्पक्ष जांच की मांग की। सीटीएम को पीएम, कमिश्नर, एसपी रोहतक और भिवानी के नाम ज्ञापन सौंपा।
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आधे घंटे तक गेट पर रोका
तीनों आरोपियों के परिजनों को पुलिस ने आधे घंटे तक लघु सचिवालय के गेट पर रोके रखा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यदि वे नारेबाजी नहीं करते तो एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने दिया जाता। मगर अब सुरक्षा के लिहाज से मिलने नहीं दिया जा सकता।
ये बोले आरोपियोें के परिजन
पूरी पड़ताल करने के बावजूद पुलिस के पास जगमोहन, अमित और संदीप कुमार के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। बाद में पकड़े गये दो आरोपियों के खिलाफ पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं। इसके बावजूद पुलिस ने तीनों को केस से डिस्चार्ज करने की मांग करने की बजाय जेल भेज दिया।
हरबंस, आरोपी जगमोहन का भाई।
ऐसे तो कोई भी जेल चला जाएगा
यदि ऐसे ही हालात रहे तो किसी निर्दोष को भी आसानी से जेल भेजा जा सकता है। पुलिस और प्रदेश सरकार ने केवल छात्रा की बात सुनी। मगर जगमोहन, अमित और संदीप की बेगुनाही के सबूत जांचने का प्रयास नहीं किया। केवल छात्रा के आरोप के आधार पर ही तीनों को जेल भेज दिया गया। ढाई साल बाद अमित जेल से बाहर आया था।
छाजूराम, आरोपी अमित के दादा।
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रिमांड के बाद जेल भेजे गए आरोपी अमित, जगमोहन और संदीप के परिजन बुधवार को भिवानी से शहर पहुंचे। यहां उन्होंने पहले महिला थाने के बाहर पुलिस और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू की। इसके बाद पैदल मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय आए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लघु सचिवालय में पहले ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों को लघु सचिवालय के गेट पर पुलिस ने रोक दिया। आरोपियों के परिजन डीसी और एसपी से मिलने की मांग कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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उनका आरोप था कि पुलिस ने मीडिया और कुछ सामाजिक संगठनों के दबाव में तीनों निर्दोष को जेल भेज दिया। विरोध बढ़ता देख जिला प्रशासन हरकत में आया और सीटीएम महेंद्र पाल को परिजनों से मिलने भेजा गया। परिजनों ने सीटीएम के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने तीनों को जेल से बाहर लाने और निष्पक्ष जांच की मांग की। सीटीएम को पीएम, कमिश्नर, एसपी रोहतक और भिवानी के नाम ज्ञापन सौंपा।
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आधे घंटे तक गेट पर रोका
तीनों आरोपियों के परिजनों को पुलिस ने आधे घंटे तक लघु सचिवालय के गेट पर रोके रखा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यदि वे नारेबाजी नहीं करते तो एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने दिया जाता। मगर अब सुरक्षा के लिहाज से मिलने नहीं दिया जा सकता।
ये बोले आरोपियोें के परिजन
पूरी पड़ताल करने के बावजूद पुलिस के पास जगमोहन, अमित और संदीप कुमार के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। बाद में पकड़े गये दो आरोपियों के खिलाफ पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं। इसके बावजूद पुलिस ने तीनों को केस से डिस्चार्ज करने की मांग करने की बजाय जेल भेज दिया।
हरबंस, आरोपी जगमोहन का भाई।
ऐसे तो कोई भी जेल चला जाएगा
यदि ऐसे ही हालात रहे तो किसी निर्दोष को भी आसानी से जेल भेजा जा सकता है। पुलिस और प्रदेश सरकार ने केवल छात्रा की बात सुनी। मगर जगमोहन, अमित और संदीप की बेगुनाही के सबूत जांचने का प्रयास नहीं किया। केवल छात्रा के आरोप के आधार पर ही तीनों को जेल भेज दिया गया। ढाई साल बाद अमित जेल से बाहर आया था।
छाजूराम, आरोपी अमित के दादा।