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दांगी का 14 दिन का रिमांड बना पुलिस का हनीमून टूर, सिर्फ 3 गिरफ्तारी, बरामदगी एक पैसे की नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 16 Apr 2016 02:22 AM IST
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रूप सिंह दांगी
- फोटो : अमर उजाला
एआईपीएमटी पेपर लीक प्रकरण के मास्टरमाइंड रूप सिंह दांगी का 14 दिन का पुलिस रिमांड पुलिस का हनीमून टूर बनकर रह गया। पुलिस दांगी को लेकर 6 प्रदेशों में घूमी, लेकिन हाथ खाली ही रहे। दांगी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मात्र तीन लोगों को ही दबोच सकी, लेकिन एक भी पैसे की रिकवरी नहीं हुई। कुल 14 दिन का रिमांड पूरा होने के बाद शुक्रवार को मदीना गांव निवासी दांगी को कोर्ट में पेश किया गया।
पुलिस ने कहा कि दांगी से पूछताछ पूरी हो गई है। इस पर कोर्ट ने दांगी को न्यायिक हिरासत में सुनारिया जेल भेज दिया। बता दें कि पुलिस ने रिमांड अवधि के दौरान दांगी के साथ हिमाचल प्रदेश के शिमला, राजस्थान के बहरोड़, यूपी के लखनऊ, दिल्ली, बिहार के पटना और सीतामढ़ी की खाक छानी।
बता दें कि पेपर लीक होने से लेकर उम्मीदवार परीक्षार्थियों को आंसर-की उपलब्ध कराए जाने तक मामले में करोड़ों का खेल खेला गया। दांगी की गिरफ्तारी से पहले जितने भी आरोपी पकड़े गए, वे सभी रुपये की बात सामने आने पर दांगी की तरफ उंगली उठा देते। लेकिन पुलिस दांगी से एक भी रुपये की रिकवरी नहीं कर सकी। पुलिस ने अधिकारिक तौर पर दांगी से कोई बरामदगी नहीं दिखाई है।
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काम होने के बाद मिलना था दांगी को रुपया
मामले में एक बात ओर सामने आई है कि दांगी को पूरा काम होने के बाद रुपया मिलना था। मगर पुलिस ने पहले ही भांडाफोड़ कर दिया। पुलिस का कहना है कि दांगी ने मामले में किसी भी अभ्यर्थी से सीधे बात नहीं की थी बल्कि उसके गुर्गों ने ही अभ्यर्थियों से बात की और एडवांस के तौर पर रुपये लिये थे। दांगी तो अपने गुर्गों के ही भरोसे था। वहीं, प्रकरण का पूरा सेटअप जमाने में दांगी का ही लाखों रुपया खर्च हुआ। उसी ने पेपर लीक और उसे हल करने वालों का इंतजाम किया था। दांगी ने पुलिस ने बरामदगी के संबंध में पुलिस के सामने भी यही तथ्य रखा।
दो गिरफ्तारी तक सीमित कार्रवाई, तीसरी इत्तफाक
दांगी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मामले में अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए आधा दर्जन टीम बनाई गई। ताकि प्रश्नपत्र हल करने वालों तक भी पहुंचा जा सके। लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा। मामले में एमडीएन स्कूल का पीटीआई सतीश और रवींद्र जरूर पकड़े गए। दोनों आरोपियों ने परीक्षा से ठीक पहले पेपर दांगी के गुर्गे तक पहुंचाया था। अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ लगे अंडरगारमेंट्स मुहैया कराने वाले आरोपी कमल सैनी को पुलिस कुरुक्षेत्र जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई।
दावे ठोक रही थी पुलिस
दांगी की गिरफ्तारी से पहले पुलिस तरह तरह के दावे ठोक रही थी। पुलिस का कहना था कि दांगी के पकड़े जाने के बाद ही मामले का पटापेक्ष होगा। सभी आरोपी गिरफ्त में होंगे। लेकिन पुलिस की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस परीक्षा को रद्द कर दिया गया और सीबीएसई के अधिकारियों पर भी सवाल उठे। लेकिन पुलिस एक भी अधिकारी की संलिप्तता के बारे में खुलासा नहीं कर सकी। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने इस संबंध में एक बार भी दांगी से कोई पूछताछ नहीं की। बता दें कि पेपर लीक के समय पुलिस की तरफ से मामले में सीबीएसई के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के भी आरोप लगाए गए थे। हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को नकार दिया था।
गोच्छी के पूर्व सरपंच का बेटा भी फरार
पुलिस अभी तक बोहर, देव कॉलोनी और सनसिटी निवासी तीनों मास्टर सॉल्वर को नहीं पकड़ सकी है। पेपर आउट करने के लिए एमडीएन स्कूल घुसे गोच्छी के पूर्व सरपंच का बेटा भी अभी फरार है। आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए अहम है। पुलिस को इस आरोपी से ही पता चलेगा कि उसने दांगी के अलावा किन लोगों को प्रश्नपत्र भेजा था।
पुलिस ने दांगी को कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग नहीं की। पुलिस ने कहा कि उनकी जांच पूरी हो चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया।
मुकेश कश्यप, दांगी के वकील।
दांगी से रिमांड अवधि में बहुत कु छ बरामद किया गया है। लेकिन बरामदगी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यह जांच का हिस्सा है।
राकेश सैनी, प्रभारी सीआईए-2
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पुलिस ने कहा कि दांगी से पूछताछ पूरी हो गई है। इस पर कोर्ट ने दांगी को न्यायिक हिरासत में सुनारिया जेल भेज दिया। बता दें कि पुलिस ने रिमांड अवधि के दौरान दांगी के साथ हिमाचल प्रदेश के शिमला, राजस्थान के बहरोड़, यूपी के लखनऊ, दिल्ली, बिहार के पटना और सीतामढ़ी की खाक छानी।
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बता दें कि पेपर लीक होने से लेकर उम्मीदवार परीक्षार्थियों को आंसर-की उपलब्ध कराए जाने तक मामले में करोड़ों का खेल खेला गया। दांगी की गिरफ्तारी से पहले जितने भी आरोपी पकड़े गए, वे सभी रुपये की बात सामने आने पर दांगी की तरफ उंगली उठा देते। लेकिन पुलिस दांगी से एक भी रुपये की रिकवरी नहीं कर सकी। पुलिस ने अधिकारिक तौर पर दांगी से कोई बरामदगी नहीं दिखाई है।
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काम होने के बाद मिलना था दांगी को रुपया
मामले में एक बात ओर सामने आई है कि दांगी को पूरा काम होने के बाद रुपया मिलना था। मगर पुलिस ने पहले ही भांडाफोड़ कर दिया। पुलिस का कहना है कि दांगी ने मामले में किसी भी अभ्यर्थी से सीधे बात नहीं की थी बल्कि उसके गुर्गों ने ही अभ्यर्थियों से बात की और एडवांस के तौर पर रुपये लिये थे। दांगी तो अपने गुर्गों के ही भरोसे था। वहीं, प्रकरण का पूरा सेटअप जमाने में दांगी का ही लाखों रुपया खर्च हुआ। उसी ने पेपर लीक और उसे हल करने वालों का इंतजाम किया था। दांगी ने पुलिस ने बरामदगी के संबंध में पुलिस के सामने भी यही तथ्य रखा।
दो गिरफ्तारी तक सीमित कार्रवाई, तीसरी इत्तफाक
दांगी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मामले में अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए आधा दर्जन टीम बनाई गई। ताकि प्रश्नपत्र हल करने वालों तक भी पहुंचा जा सके। लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा। मामले में एमडीएन स्कूल का पीटीआई सतीश और रवींद्र जरूर पकड़े गए। दोनों आरोपियों ने परीक्षा से ठीक पहले पेपर दांगी के गुर्गे तक पहुंचाया था। अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ लगे अंडरगारमेंट्स मुहैया कराने वाले आरोपी कमल सैनी को पुलिस कुरुक्षेत्र जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई।
दावे ठोक रही थी पुलिस
दांगी की गिरफ्तारी से पहले पुलिस तरह तरह के दावे ठोक रही थी। पुलिस का कहना था कि दांगी के पकड़े जाने के बाद ही मामले का पटापेक्ष होगा। सभी आरोपी गिरफ्त में होंगे। लेकिन पुलिस की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस परीक्षा को रद्द कर दिया गया और सीबीएसई के अधिकारियों पर भी सवाल उठे। लेकिन पुलिस एक भी अधिकारी की संलिप्तता के बारे में खुलासा नहीं कर सकी। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने इस संबंध में एक बार भी दांगी से कोई पूछताछ नहीं की। बता दें कि पेपर लीक के समय पुलिस की तरफ से मामले में सीबीएसई के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के भी आरोप लगाए गए थे। हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को नकार दिया था।
गोच्छी के पूर्व सरपंच का बेटा भी फरार
पुलिस अभी तक बोहर, देव कॉलोनी और सनसिटी निवासी तीनों मास्टर सॉल्वर को नहीं पकड़ सकी है। पेपर आउट करने के लिए एमडीएन स्कूल घुसे गोच्छी के पूर्व सरपंच का बेटा भी अभी फरार है। आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए अहम है। पुलिस को इस आरोपी से ही पता चलेगा कि उसने दांगी के अलावा किन लोगों को प्रश्नपत्र भेजा था।
पुलिस ने दांगी को कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग नहीं की। पुलिस ने कहा कि उनकी जांच पूरी हो चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया।
मुकेश कश्यप, दांगी के वकील।
दांगी से रिमांड अवधि में बहुत कु छ बरामद किया गया है। लेकिन बरामदगी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यह जांच का हिस्सा है।
राकेश सैनी, प्रभारी सीआईए-2