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पूर्व सीएम हुड्डा और एमडीयू प्रोफेसर के वकील हुए पेश, 6 के पास नहीं पहुंचा नोटिस

Sun, 21 Aug 2016 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 21 Aug 2016 02:08 AM IST
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bhupendra sing hudda, mdu, jat reservation, servey, fraud, rohtak, haryana
bhupinder singh hudda - फोटो : demo pic
जाट आरक्षण लागू करने के लिए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के सर्वे में कथित फर्जीवाड़े संबंधी पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट में शनिवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरफ से उनके वकील नसीब पंघाल और एमडीयू के पूर्व प्रोफेसर खजान सिंह के वकील योगेंद्र दलाल पेश हुए। मामले में बाकी छह लोगों के पास कोर्ट का नोटिस नहीं पहुंचने के कारण कोर्ट की कार्यवाही नहीं चल सकी। कोर्ट ने शेष छह लोगों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।
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चरखी दादरी के गांव निमली निवासी शिकायतकर्ता वेदप्रकाश के वकील भारत जैन ने बताया कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूर्व सीएम को जवाब पेश करने का नोटिस जारी किया था। इसी के साथ अन्य को भी नोटिस जारी किया गया था। लेकिन 6 लोगों के पास नोटिस नहीं पहुंचा। सभी की तरफ से जवाब पेश होने के बाद ही बहस शुरू होगी। शिकायतकर्ता के वकील भारत जैन ने तीन मई को कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इससे पहले जिला अदालत ने वेदप्रकाश की याचिका को 4 जनवरी 2016 को खारिज कर दिया था।
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सीधे एसपी को शिकायत देने पर खारिज हुई थी याचिका

जिला एवं सत्र न्यायालय ने शिकायतकर्ता वेद प्रकाश के केस दर्ज करने संबंधी याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि मामले की शिकायत पहले संबंधित थाना एसएचओ को नहीं करके सीधे एसपी को की गई। याची को शिकायत पहले संबंधित थाने के एसएचओ को करनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने याचिका दाखिल कर जाट आरक्षण की रिपोर्ट के संबंध में पूर्व सीएम सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद वेदप्रकाश ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। इससे पहले भी याचिका निचली अदालत ने खारिज कर दी थी।
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ये है मामला

वेदप्रकाश जांगड़ा ने अपनी याचिका में कहा है कि जाटों को आरक्षण देने के लिए तीन वर्ष पहले करवाया गया सर्वे फर्जी था। उन्होंने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन केसी गुप्ता, एमडीयू के पूर्व वीसी रामफल हुड्डा और एमडीयू के समाज शास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर खजान सिंह सांगवान पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने वर्ष 2012 में सेंटर फॉर रिसर्च इन रुरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एजेंसी को सर्वे का काम दिया था। एजेंसी को पता करना था कि आरक्षण के लिए जाट सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर हैं या नहीं? सर्वे में 40 लाख रुपये खर्च होने के बाद 31 मार्च 2012 को एजेंसी ने रिपोर्ट दी। वेदप्रकाश का कहना है कि सर्वे के इसी काम को 30 अप्रैल 2012 को एमडीयू को दिया गया, जिसने 60 लाख रुपये खर्च कर जुलाई 2012 में पूरा किया। एमडीयू की रिपोर्ट में जाटों को पिछड़ा बताया गया। इस सर्वे के प्रोजेक्ट निदेशक, एमडीयू के प्रोफेसर खजान सिंह सांगवान थे। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा में 24 जनवरी 2013 को जाट समेत सभी पांच जातियों को आरक्षण दिया गया। बाद में आरक्षण पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। यह मामला अदालत में चल रहा है।
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