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अकादमी और निजी स्कूल संचालकों में सांठ-गांठ से चल रहा ‘नॉन अटेंडिंग’ का खेल
ब्यूरो अमर उजाला राेहतक
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:49 AM IST
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परीज्ञा देने जाते बच्चचे
- फोटो : beuro
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निजी स्कूल संचालकों की सांठ-गांठ से शहर की प्राइवेट अकादमियों में ‘नॉन अटेंडिंग’ का खेल खूब चल रहा है। इन अकादमी में आप 50-60 हजार रुपये जमा करिए और घर में आराम फरमाइए। आपको स्कूल में बच्चे को भेजने की जरूरत नहीं है। अगर कोई अधिकारी चेकिंग करने पहुंच भी गया तो बच्चे की हाजिरी पूरी दिखाई जाएगी। यही नहीं, प्रेक्टिकल के साथ सेमेस्टर के अनुसार होने वाले असेसमेंट टेस्ट में भी 100 फीसदी नंबर लगवाने की जिम्मेदारी अकादमी के संचालक की रहेगी। यदि कसर रह गई तो बोर्ड परीक्षा में बच्चे को नकल कराने की पूरी गारंटी भी दी जा रही है। शहर में कुकुरमुत्ते की तरह उगी अकादमियों में प्रेेक्टिकल और असेसमेंट में पूरे नंबर दिलाने का भी दावा किया जा रहा है। दरअसल, छात्रों से पैसे लेकर पास कराने वाली एएस अकादमी के संचालक को वीरवार को गिरफ्तार किया गया था। इससे शिक्षा के साथ हो रहे खिलवाड़ का खुलासा भी हुआ लेकिन प्रशासनिक अमले ने कोई कार्रवाई नहीं की। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को शहर की कई प्राइवेट अकादमियों में जाकर पड़ताल की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
हाजिरी-प्रेेक्टिकल के नंबर के लिए न लें टेंशन
सोनीपत रोड पर एक शोरूम के पास एक प्राइवेट अकादमी में दोपहर एक बजे अमर उजाला की टीम पहुंची। यहां पूछताछ केंद्र पर बैठी एक महिला ने बताया कि 11वीं कक्षा में मेडिकल संकाय से नॉन अटेंडिंग कराने के लिए करीब 52 हजार रुपये लगेंगे। इसमें 10 हजार रुपये दाखिला फीस के साथ एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस, 3350 रुपये मासिक ट्यूशन फीस, 1200 एनुअल फीस के साथ एक हजार रुपये एग्जाम फीस है। अभिभावक चाहे तो 52 हजार रुपये किश्तों या एकमुश्त में भी दे सकता है। 10 अप्रैल से पहले दाखिला लेने वाले विद्यार्थी को टैब भी मुफ्त में दिया जाएगा। विद्यार्थी को हाजिरी या प्रेक्टिकल के नंबर के लिए टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। यह जिम्मेदारी उनकी है। बच्चा चाहे एक भी दिन स्कूल में न जाए, लेकिन हाजिरी पूरी रहेगी। महिला ने दावा किया कि उनका दोनों बोर्ड के स्कूलों के साथ अच्छी सेटिंग है। बच्चे को किसी तरह की समस्या नहीं आएगी।
प्राइवेट अकादमी के होते हैं एग्जामिनर, 100 फीसदी लगेंगे नंबर
दोपहर 1:30 बजे अमर उजाला की टीम प्रेम नगर में एक प्राइवेट अकादमी में गई। यहां चंद कदमों की दूरी पर एक निजी स्कूल भी चल रहा है। यहां पहुंचकर टीम के साथी ने अपनी बहन के लिए हरियाणा बोर्ड से 10वीं कराने की जानकारी चाही। अकादमी के एडमिशन इंचार्ज ने बताया कि 11वीं और 12वीं के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के लिए करीब 50 हजार रुपये फीस लगेगी। अगर बच्चा दूसरे स्कूल से नॉन अटेंडिंग कर रहा है तो साइंस के तीनों विषयों की ट्यूशन फीस करीब 30 हजार रुपये रहेगी। दूसरे स्कूल से नॉन अटेंडिंग कराने के साथ प्रेक्टिकल व असेसमेंट मेें नंबर लगवाने की जिम्मेदारी अभिभावक की रहेगी। अगर उनकी अकादमी से बच्चा नॉन अटेंडिंग कर रहा है तो वे जिम्मेदार होंगे। बोर्ड की ओर से लिए जा रहे प्रेक्टिकल में अमूमन एग्जामिनर भी प्राइवेट अकादमी के लगाए जाते हैं। इससे 100 फीसदी नंबर लगने की पूरी गारंटी रहती है। परीक्षा केंद्र पर भी सेटिंग करके पास कराने के लिए पूरा सहयोग किया जाता है। स्कूल से नॉन अटेंडिंग करते हुए अकादमी में भी कक्षाएं लगाई जाती हैं। यहां स्कूलों के लेक्चरर भी एक-एक घंटा पढ़ाने के लिए आते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से होती है सेटिंग, नाम पर जाने की जरूरत नहीं
अकादमी वालों के पास फुलप्रूफ व्यवस्था है। उनका कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से बोर्ड और सरकार की ओर से थोड़ी सख्ती की जा रही है। ऐसे में शहर के निजी स्कूलों की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल संचालकों से नॉन अटेंडिंग खेल की सेटिंग की जाती है। इसमें खतरा काफी कम रहता है। नॉन अटेंडिंग के लिए नाम पर जाने की जरूरत नहीं है। अकादमी में बताया गया कि सवाल केवल अच्छे नंबर लेने का है और इसकी गारंटी दी जाती है।
प्रमुख स्कूलों से नॉन अटेंडिंग लेकर कर सकते हैं पढ़ाई
दोपहर 2:00 बजे टीम डीएलएफ कॉलोनी स्थित एक घर में चल रही प्राइवेट अकादमी पर गई। यहां अकादमी संचालक ने बताया कि वे नॉन अटेंडिंग तो नहीं कराते हैं, लेकिन उन्होंने नॉन अटेंडिंग कराने वाले शहर के प्रमुख स्कूलाें के नाम बताए। यह स्कूल प्रेम नगर, दुर्गा कॉलोनी, सेक्टर-6, बजरंग भवन, गांधी कैंप और आईएमटी में चल रहे हैं। जहां पर छात्र नॉन अटेंडिंग से दाखिला लेकर उनके यहां कोर्स और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकता है।
नॉन अटेंडिंग कराने वाले निजी स्कूलाें की होगी जांच
सीबीएसई और एचबीएसई के निजी स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए नॉन अटेंडिंग कराने का जो खेल चल रहा है, वे इसकी जांच कराएंगी। इस बारे में शिकायत मिलने पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई भी होगी और दोषी पर नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- सुनीता रूहिल, डीईओ, रोहतक।
नान अटेंडिंग मान्य नहीं, लगाएंगे जिम्मेदारी
निजी स्कूलों में नॉन अटेंडिंग मान्य ही नहीं है। जो भी निजी स्कूल सेटिंग करके यह सब करा रहा है, वह जुर्म कर रहा है। ऐसे विद्यार्थियों को स्कूलों में मौजूदगी के तहत ही पकड़ा जा सकता है। वे इस मामले में जल्द ही बीईओ की जिम्मेदारी लगाएंगे।
- रोहतास वर्मा, डिप्टी डीईओ, रोहतक।
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हाजिरी-प्रेेक्टिकल के नंबर के लिए न लें टेंशन
सोनीपत रोड पर एक शोरूम के पास एक प्राइवेट अकादमी में दोपहर एक बजे अमर उजाला की टीम पहुंची। यहां पूछताछ केंद्र पर बैठी एक महिला ने बताया कि 11वीं कक्षा में मेडिकल संकाय से नॉन अटेंडिंग कराने के लिए करीब 52 हजार रुपये लगेंगे। इसमें 10 हजार रुपये दाखिला फीस के साथ एक हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस, 3350 रुपये मासिक ट्यूशन फीस, 1200 एनुअल फीस के साथ एक हजार रुपये एग्जाम फीस है। अभिभावक चाहे तो 52 हजार रुपये किश्तों या एकमुश्त में भी दे सकता है। 10 अप्रैल से पहले दाखिला लेने वाले विद्यार्थी को टैब भी मुफ्त में दिया जाएगा। विद्यार्थी को हाजिरी या प्रेक्टिकल के नंबर के लिए टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। यह जिम्मेदारी उनकी है। बच्चा चाहे एक भी दिन स्कूल में न जाए, लेकिन हाजिरी पूरी रहेगी। महिला ने दावा किया कि उनका दोनों बोर्ड के स्कूलों के साथ अच्छी सेटिंग है। बच्चे को किसी तरह की समस्या नहीं आएगी।
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प्राइवेट अकादमी के होते हैं एग्जामिनर, 100 फीसदी लगेंगे नंबर
दोपहर 1:30 बजे अमर उजाला की टीम प्रेम नगर में एक प्राइवेट अकादमी में गई। यहां चंद कदमों की दूरी पर एक निजी स्कूल भी चल रहा है। यहां पहुंचकर टीम के साथी ने अपनी बहन के लिए हरियाणा बोर्ड से 10वीं कराने की जानकारी चाही। अकादमी के एडमिशन इंचार्ज ने बताया कि 11वीं और 12वीं के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के लिए करीब 50 हजार रुपये फीस लगेगी। अगर बच्चा दूसरे स्कूल से नॉन अटेंडिंग कर रहा है तो साइंस के तीनों विषयों की ट्यूशन फीस करीब 30 हजार रुपये रहेगी। दूसरे स्कूल से नॉन अटेंडिंग कराने के साथ प्रेक्टिकल व असेसमेंट मेें नंबर लगवाने की जिम्मेदारी अभिभावक की रहेगी। अगर उनकी अकादमी से बच्चा नॉन अटेंडिंग कर रहा है तो वे जिम्मेदार होंगे। बोर्ड की ओर से लिए जा रहे प्रेक्टिकल में अमूमन एग्जामिनर भी प्राइवेट अकादमी के लगाए जाते हैं। इससे 100 फीसदी नंबर लगने की पूरी गारंटी रहती है। परीक्षा केंद्र पर भी सेटिंग करके पास कराने के लिए पूरा सहयोग किया जाता है। स्कूल से नॉन अटेंडिंग करते हुए अकादमी में भी कक्षाएं लगाई जाती हैं। यहां स्कूलों के लेक्चरर भी एक-एक घंटा पढ़ाने के लिए आते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से होती है सेटिंग, नाम पर जाने की जरूरत नहीं
अकादमी वालों के पास फुलप्रूफ व्यवस्था है। उनका कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से बोर्ड और सरकार की ओर से थोड़ी सख्ती की जा रही है। ऐसे में शहर के निजी स्कूलों की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल संचालकों से नॉन अटेंडिंग खेल की सेटिंग की जाती है। इसमें खतरा काफी कम रहता है। नॉन अटेंडिंग के लिए नाम पर जाने की जरूरत नहीं है। अकादमी में बताया गया कि सवाल केवल अच्छे नंबर लेने का है और इसकी गारंटी दी जाती है।
प्रमुख स्कूलों से नॉन अटेंडिंग लेकर कर सकते हैं पढ़ाई
दोपहर 2:00 बजे टीम डीएलएफ कॉलोनी स्थित एक घर में चल रही प्राइवेट अकादमी पर गई। यहां अकादमी संचालक ने बताया कि वे नॉन अटेंडिंग तो नहीं कराते हैं, लेकिन उन्होंने नॉन अटेंडिंग कराने वाले शहर के प्रमुख स्कूलाें के नाम बताए। यह स्कूल प्रेम नगर, दुर्गा कॉलोनी, सेक्टर-6, बजरंग भवन, गांधी कैंप और आईएमटी में चल रहे हैं। जहां पर छात्र नॉन अटेंडिंग से दाखिला लेकर उनके यहां कोर्स और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकता है।
नॉन अटेंडिंग कराने वाले निजी स्कूलाें की होगी जांच
सीबीएसई और एचबीएसई के निजी स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए नॉन अटेंडिंग कराने का जो खेल चल रहा है, वे इसकी जांच कराएंगी। इस बारे में शिकायत मिलने पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई भी होगी और दोषी पर नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- सुनीता रूहिल, डीईओ, रोहतक।
नान अटेंडिंग मान्य नहीं, लगाएंगे जिम्मेदारी
निजी स्कूलों में नॉन अटेंडिंग मान्य ही नहीं है। जो भी निजी स्कूल सेटिंग करके यह सब करा रहा है, वह जुर्म कर रहा है। ऐसे विद्यार्थियों को स्कूलों में मौजूदगी के तहत ही पकड़ा जा सकता है। वे इस मामले में जल्द ही बीईओ की जिम्मेदारी लगाएंगे।
- रोहतास वर्मा, डिप्टी डीईओ, रोहतक।