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एक चक्कर में कमाते थे पांच गुना मुनाफा

Sat, 05 Aug 2017 01:04 AM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:04 AM IST
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एक चक्कर  में कमाते थे पांच गुना  मुनाफा
एक चक्कर की सप्लाई में कमाते थे पांच गुना मुनाफा
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चरखी दादरी।
मध्य प्रदेश व राजस्थान से लाकर हरियाणा- पंजाब बॉर्डर तक डोडा पोस्त की तस्करी लंबे समय से हो रही थी। तस्कर सप्ताह में एक बार माल सप्लाई करते थे और प्रति चक्कर पांच गुणा प्रति किलोग्राम डोडा पोस्त पर मुनाफा कमाते थे। इनमें से एक तस्कर तो पहले बिजली तारें चोरी करता था। उस पर चार-पांच मामले भी दर्ज हैं। चोरी की वारदातों में कामयाब न रहने पर उसने डोडा पोस्त की तस्करी शुरू कर दी थी। ये खुलासा सीआईए की गिरफ्त में 31 जुलाई को आए दोनों तस्करों बाढड़ा उपमंडल के गांव नौरंगाबास निवासी सुभाष व आसलवास थाना निवासी महेश कुमार ने किया है। सीआईए ने दोनों आरोपियों को कोर्ट से पांच दिन के रिमांड पर ले रखा है और छह अगस्त को यह अवधि पूरी होने के बाद सीआईए उन्हें दोबारा से कोर्ट में पेश करेगी। इनके पास से बरामद माल की कीमत करीब बीस लाख पुलिस ने आंकी है।
दादरी जिले के जरिए अंतरराज्यीय मादक पदार्थों की तस्करी करने के कबूलनामे के बाद जिला पुलिस प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। दोनों तस्करों ने पुलिस के सामने खुलासा किया है कि मध्य प्रदेश बॉर्डर से लेकर पंजाब-हरियाणा बॉर्डर की करीब 800 किलोमीटर दूरी वो अप्रोच रास्तों के रिए ही तय करते थे और पिछले डेढ़ साल इसी तरह डोडा पोस्त की तस्करी की जा रही थी। गौरतलब है कि गत 31 जुलाई को सीआईए प्रभारी हितेंद्र दांगी की टीम ने नौरंगाबास राजपूतान टी -प्वाइंट पर नाकेबंदी कर दो तस्करों को पिकअप गाड़ी व 3.05 क्विंटल डोडा पोस्त बरामद किया है। आरोपियों के खिलाफ मादक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इसके बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया था। रिमांडवधि के दौरान आरोपियों ने पुलिस के सामने कबूल किया कि इस नशीले पदार्थ को वो तस्करी के लिए हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर ले जा रहे थे। जिला पुलिस प्रशासन ने डोडा पोस्त की यह अब तक की सबसे बड़ी तस्करी पकड़ी थी।
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चार राज्यों की पुलिस को डेढ़ साल से दे रहे थे गच्चा
सीआईए प्रभारी हितेंद्र दांगी ने बताया कि आरोपियों ने कबूल किया है कि वो मध्य प्रदेश बॉर्डर से नशीले पदार्थ की गाड़ी भरकर चलते थे। इसके बाद वो वाया राजस्थान होते हुए हरियाणा में प्रवेश करते थे और फिर इसके बाद इसकी सप्लाई पंजाब बॉर्डर पर देते थे। ऐसे में चार राज्यों की पुलिस की नजर भी इन तस्करों पर नहीं पड़ पाई और पुलिस को गच्चा देने में सफल रहे। इन्होंने बेखौफ डेढ़ साल तक तस्करी जारी रखी। इस बार दादरी सीआईए के हत्थे ये चढ़ गए। तस्करों ने बताया कि इस बार उनके पास पहले के मुकाबले अधिक माल था।
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वर्जन:
दोनों तस्करों ने कबूल किया है कि वो पिछले करीब डेढ़ साल से लगातार तस्करी कर रहे थे। ये अप्रोच रास्तों का प्रयोग करते थे और तस्करी पर इन्हें पांच गुधा तक मुनाफा होता था। इनमें से एक तस्कर चोरी की वारदातों में भी शामिल है। आरोपियों को रिमांडवधि पूरी होने के बाद दोबारा कोर्ट में पेश करेंगे।
हितेंद्र दांगी, सीआईए प्रभारी
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