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जिला परिषद चेयरमैन बलराज कुंडू पर हमले की प्लानिंग का मामला
Updated Sun, 19 Aug 2018 02:48 AM IST
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फ्लैग : जिप चेयरमैन व निगम पार्षद पर हमले की प्लानिंग फर्जी निकली, अदालत में दाखिल चार्जशीट नहीं ठहर सकी अदालत में
हेडिंग : 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से युवकों को पकड़ रही थी या टहल रही थी सीआईए वन
: युवक परमजीत के पिता को गिरफ्तारी से 11 घंटे पहले एएसआई ने की कॉल
: परिजनों का तर्क, पुलिस ने तड़के उठाए युवक, रात साढ़े 10 बजे दिखा दी मुठभेड़
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जिला परिषद चेयरमैन बलराज कुंडू व निगम पार्षद पर हमले से पहले चार युवकों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार करने की पुलिस की कहानी फर्जी निकली। एडीजे आरपी गोयल की अदालत ने चारों युवकों को सैनिक कॉलोनी निवासी परमजीत, भिवानी चुंगी निवासी कपिल, कुताना कालोनी गदद्ी खेड़ी निवासी मंजीत व गिरजा शंकर उर्फ बॉबी निवासी महगाव, जिला भींड एमपी को बरी कर दिया।
एडवोकेट संदीप सहलठ ने बताया कि 13 अप्रैल 2017 को सीआईए वन के एएसआई विनोद ने सदर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई कि वे एएसआई मुकेश सहित अन्य टीम के साथ कच्चा चमारिया रोड पर मौजूद थे। इसी दौरान उन्हें सामने से दो बाइक आती दिखाई दी। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों बाइक पर सवार चारों युवकों ने बाइक दौड़ा दी। उन्हाेंने गाड़ी से पीछा करना शुरू कर दिया। पुुलिस का आरोप था कि चारों युवकों ने चिल्लाकर कहा कि उनका पीछा करना छोड़ दें, नहीं तो गोली मार देंगे। थोड़ी आगे चलने पर बॉबी नाम के युवक ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली ड्राइवर साइड में शीशे पर लगी। दूसरी गोली गाड़ी के पीलर में लगी। इसके बाद युवकों ने दोनों बाइक कच्चे रास्ते पर उतार दी, जहां संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गए। पुलिस ने आरोपियों को काबू कर लिया। उनके कब्जे से गिरजा शंकर उर्फ बॉबी से मेड इन यूएसए रिवाल्वर बरामद हुई। आरोपियों को आईपीसी की धारा 307, 353, 186, 114आईपीसी व आर्म्ज एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने खुलासा किया था कि चारों युवक जिप चेयरमैन बलराज कुंडू व निगम के एक पार्षद पर हमला करने की फिराक में थे। हालांकि चार्जशीट के अंदर इसका पुलिस द्वारा जिक्र नहीं किया गया।
बाक्स
यूं दम तोड़ गई पुलिस की कहानी
केस पूरी तरह फर्जी था। क्योंकि 13 अप्रैल की सुबह गिरजा शंकर उर्फ बॉबी को उसके घर से पुलिस ने उठाया। उसकी पत्नी को एएसआई विनोद ने अपना मोबाइल नंबर व नाम एक पर्ची पर लिखकर दिया। दूसरा, उसी दिन दिन में 11 बजे एक एएसआई ने गिरफ्तार परमजीत के पिता को कॉल की। जबकि गिरफ्तारी उस दिन रात साढ़े नौ बजे के बाद दिखाई गई। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट पूरी तरह फर्जी साबित हुई। इतना ही नहीं, जिला परिषद चेयरमैन बलराज कुंडू व पार्षद पर हमले की प्लानिंग की बात सीआईए पुलिस द्वारा झूठी अफवाह फैलाई गई थी। अदालत में इसे साबित कर दिया गया है। इसके चलते अदालत ने चारों युवकों को बरी कर दिया।
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एडवोकेट संदीप सहलठ, वकील बचाव पक्ष
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हेडिंग : 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से युवकों को पकड़ रही थी या टहल रही थी सीआईए वन
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: परिजनों का तर्क, पुलिस ने तड़के उठाए युवक, रात साढ़े 10 बजे दिखा दी मुठभेड़
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जिला परिषद चेयरमैन बलराज कुंडू व निगम पार्षद पर हमले से पहले चार युवकों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार करने की पुलिस की कहानी फर्जी निकली। एडीजे आरपी गोयल की अदालत ने चारों युवकों को सैनिक कॉलोनी निवासी परमजीत, भिवानी चुंगी निवासी कपिल, कुताना कालोनी गदद्ी खेड़ी निवासी मंजीत व गिरजा शंकर उर्फ बॉबी निवासी महगाव, जिला भींड एमपी को बरी कर दिया।
एडवोकेट संदीप सहलठ ने बताया कि 13 अप्रैल 2017 को सीआईए वन के एएसआई विनोद ने सदर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई कि वे एएसआई मुकेश सहित अन्य टीम के साथ कच्चा चमारिया रोड पर मौजूद थे। इसी दौरान उन्हें सामने से दो बाइक आती दिखाई दी। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों बाइक पर सवार चारों युवकों ने बाइक दौड़ा दी। उन्हाेंने गाड़ी से पीछा करना शुरू कर दिया। पुुलिस का आरोप था कि चारों युवकों ने चिल्लाकर कहा कि उनका पीछा करना छोड़ दें, नहीं तो गोली मार देंगे। थोड़ी आगे चलने पर बॉबी नाम के युवक ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली ड्राइवर साइड में शीशे पर लगी। दूसरी गोली गाड़ी के पीलर में लगी। इसके बाद युवकों ने दोनों बाइक कच्चे रास्ते पर उतार दी, जहां संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गए। पुलिस ने आरोपियों को काबू कर लिया। उनके कब्जे से गिरजा शंकर उर्फ बॉबी से मेड इन यूएसए रिवाल्वर बरामद हुई। आरोपियों को आईपीसी की धारा 307, 353, 186, 114आईपीसी व आर्म्ज एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने खुलासा किया था कि चारों युवक जिप चेयरमैन बलराज कुंडू व निगम के एक पार्षद पर हमला करने की फिराक में थे। हालांकि चार्जशीट के अंदर इसका पुलिस द्वारा जिक्र नहीं किया गया।
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यूं दम तोड़ गई पुलिस की कहानी
केस पूरी तरह फर्जी था। क्योंकि 13 अप्रैल की सुबह गिरजा शंकर उर्फ बॉबी को उसके घर से पुलिस ने उठाया। उसकी पत्नी को एएसआई विनोद ने अपना मोबाइल नंबर व नाम एक पर्ची पर लिखकर दिया। दूसरा, उसी दिन दिन में 11 बजे एक एएसआई ने गिरफ्तार परमजीत के पिता को कॉल की। जबकि गिरफ्तारी उस दिन रात साढ़े नौ बजे के बाद दिखाई गई। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट पूरी तरह फर्जी साबित हुई। इतना ही नहीं, जिला परिषद चेयरमैन बलराज कुंडू व पार्षद पर हमले की प्लानिंग की बात सीआईए पुलिस द्वारा झूठी अफवाह फैलाई गई थी। अदालत में इसे साबित कर दिया गया है। इसके चलते अदालत ने चारों युवकों को बरी कर दिया।
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एडवोकेट संदीप सहलठ, वकील बचाव पक्ष