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मछली को दाना डालते समय दो दोस् त जलगृह में डूबे, नगर निगम कर्मचारी ने अपनी जान पर खेलकर बचाया
Updated Fri, 02 Feb 2018 03:12 AM IST
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मछली को दाना डालते समय कक्षा 5 में पढ़ने वाले दो दोस्त जलगृह में गिरे, नगर निगम कर्मचारी ने अपनी जान पर खेलकर बचाया
सोनीपत रोड स्थित जल गृह में डूब गये थे दो दोस्त, दोनों की जान बचाने वाले कर्मचारी की हर किसी ने की सराहना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
शहर के सोनीपत रोड स्थित जल गृह में मछली को दाना डालते समय वीरवार को कक्षा पांच में पढ़ने वाले दो दोस्त फिसलकर गिर गए और डूबने लगे। शोर शराबा होने पर नगर निगम का एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा तथा चंद मिनटों में ही अपनी जान पर खेलकर दोनों की जान बचाई। बाद में दोनों दोस्तों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मामले की सूचना पाते ही फायर विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गये थे। हर किसी ने नगर निगम के कर्मचारी की सराहना की है।
शहर की दुर्गा कॉलोनी निवासी अध्यापक सतपाल का पुत्र राहुल व जय सिंह का पुत्र आयुष शहर के मॉडल स्कूल में कक्षा 5 के छात्र है। बताया गया कि वीर वार को स्कूल की छुट्टी के बाद शाम पांच बजे दोनों सोनीपत रोड स्थित एक जल गृह में मछलियों को दाना डालने के लिये पहुंच गये। बताया गया कि मछली को दाना डालते समय अचानक ही पहले आयुष का पैर फिसल गया तथा वह जल गृह में गिर गया। आयुष को बचाने के प्रयास में उसका दोस्त राहुल भी जलगृह में कूद पड़ा। दोनों को डूबता देखकर यहां पर खडे़ दो मालियों ने नगर निगम में तैनात कर्मचारी सुनील को बताया। सुनील मौके पर पहुंचा तथा बच्चों की जान बचाने के लिये जल गृह में कूद पड़ा। कुछ देर बाद ही कर्मचारी ने दोनों बच्चों को जलगृह से लिया। इसी बीच राहुल की मां हेमा व आयुष के परिजन भी मौके पर आ पहुंचे। बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। हर किसी ने नगर निगम के कर्मचारी की सराहना की है। मामले की सूचना पाते ही फायर विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी।
मछली को दाना डालते समय ही दोनों दोस्त डूब गये थे। नगर निगम के कर्मचारी ने जान पर खेलकर दोनों की जान बचाई। दोनों की हालत खतरे से बाहर है।
- संजीव कुमार डागर, सहायक फायर अधिकारी
वीरवार को दो दोस्त जल गृह में डूब गये थे। जिन्हें नगर निगम व फायर के कर्मचारी ने बचा लिया। भविष्य में जल गृह के पास कोई न जाए, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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- सुरेश अहलावत, एसडीओ पब्लिक हेल्थ
पास ही था जल गृह के : सुनील
दोनो दोस्तों की जान बचाने वाले नगर निगम के कर्मचारी सुनील कौशिक ने बताया कि जब उसे बच्चों के डूबने की सूचना मिली। वह जल गृह के आसपास ही घूम रहा था। वह मौके पर पहुंचा और बिना कपड़े निकाले ही जल गृह में कूद पड़ा। तीन से चार मिनट में ही उसने दोनों को निकाल लिया। हालांकि उसका मोबाइल, रुपये व अन्य कागजात भी पानी में डूब गये। दोनों के परिजनों ने बच्चों को बचाने पर उसे जो प्यार दिया, उसे शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है। सुनील कौशिक ने बताया कि वह मूल रुप से रोहतक के इंद्रगढ़ गांव का रहने वाला है तथा पिछले 7 साल से नगर निगम में ही तैनात है। बताया कि उसने बचपन में ही गांव के ही तालाब में शौक के तौर ही तैराकी सीखी थी। आज उसकी तैराकी काम आ गई। उसे अपने पर गर्व महसूस हो रहा है।
जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे सुनील का अहसान
आयुष व राहुल के परिजनों ने कहा कि जिस तरह से अपनी जान पर खेलकर नगर निगम के कर्मचारी सुनील ने उनके बच्चों की जान बचाई है। उसका अहसान वे जिंदगी भर नहंी उतार पाएंगे। फरिश्ता बनकर सुनील बच्चों के जीवन में पहुंचा। राहुल की मां हेमा व पिता राहुल ने कहा कि सुनील जैसे लोगों से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
और बेटे को गले लगा बिलख पड़ी हेमा
जैसे ही हेमा को पुत्र राहुल के जल गृह में डूबने का पता लगा तो वह तुरंत ही बदहवाश अवस्था में मौके पर पहुंची तथा जैसे ही बेटे को बाहर निकाला गया हेमा काफी देर तक गले लगाकर बिलखती रही। बताया गया कि देर शाम अचानक हेमा की हालत सदमे में बिगड़ गई थी। हालांकि राहुल की हालत पूरी तरह से ठीक है।
आखिर जल गृह तक क ैसे पहुंचे बच्चे
यह सवाल भी हर किसी के दिमाग में घर कर रहा है कि दोनों दोस्त जल गृह तक कैसे पहुंचे। विभागीय अधिकारियों की कार्य प्रणाली भी इसको लेकर सवालों के घेरे में है। जल गृह के पास में ही मंदिर व फायर का कार्यालय भी है।
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मछली को दाना डालते समय कक्षा 5 में पढ़ने वाले दो दोस्त जलगृह में गिरे, नगर निगम कर्मचारी ने अपनी जान पर खेलकर बचाया
सोनीपत रोड स्थित जल गृह में डूब गये थे दो दोस्त, दोनों की जान बचाने वाले कर्मचारी की हर किसी ने की सराहना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
शहर के सोनीपत रोड स्थित जल गृह में मछली को दाना डालते समय वीरवार को कक्षा पांच में पढ़ने वाले दो दोस्त फिसलकर गिर गए और डूबने लगे। शोर शराबा होने पर नगर निगम का एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा तथा चंद मिनटों में ही अपनी जान पर खेलकर दोनों की जान बचाई। बाद में दोनों दोस्तों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मामले की सूचना पाते ही फायर विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गये थे। हर किसी ने नगर निगम के कर्मचारी की सराहना की है।
शहर की दुर्गा कॉलोनी निवासी अध्यापक सतपाल का पुत्र राहुल व जय सिंह का पुत्र आयुष शहर के मॉडल स्कूल में कक्षा 5 के छात्र है। बताया गया कि वीर वार को स्कूल की छुट्टी के बाद शाम पांच बजे दोनों सोनीपत रोड स्थित एक जल गृह में मछलियों को दाना डालने के लिये पहुंच गये। बताया गया कि मछली को दाना डालते समय अचानक ही पहले आयुष का पैर फिसल गया तथा वह जल गृह में गिर गया। आयुष को बचाने के प्रयास में उसका दोस्त राहुल भी जलगृह में कूद पड़ा। दोनों को डूबता देखकर यहां पर खडे़ दो मालियों ने नगर निगम में तैनात कर्मचारी सुनील को बताया। सुनील मौके पर पहुंचा तथा बच्चों की जान बचाने के लिये जल गृह में कूद पड़ा। कुछ देर बाद ही कर्मचारी ने दोनों बच्चों को जलगृह से लिया। इसी बीच राहुल की मां हेमा व आयुष के परिजन भी मौके पर आ पहुंचे। बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। हर किसी ने नगर निगम के कर्मचारी की सराहना की है। मामले की सूचना पाते ही फायर विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी।
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मछली को दाना डालते समय ही दोनों दोस्त डूब गये थे। नगर निगम के कर्मचारी ने जान पर खेलकर दोनों की जान बचाई। दोनों की हालत खतरे से बाहर है।
- संजीव कुमार डागर, सहायक फायर अधिकारी
वीरवार को दो दोस्त जल गृह में डूब गये थे। जिन्हें नगर निगम व फायर के कर्मचारी ने बचा लिया। भविष्य में जल गृह के पास कोई न जाए, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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पास ही था जल गृह के : सुनील
दोनो दोस्तों की जान बचाने वाले नगर निगम के कर्मचारी सुनील कौशिक ने बताया कि जब उसे बच्चों के डूबने की सूचना मिली। वह जल गृह के आसपास ही घूम रहा था। वह मौके पर पहुंचा और बिना कपड़े निकाले ही जल गृह में कूद पड़ा। तीन से चार मिनट में ही उसने दोनों को निकाल लिया। हालांकि उसका मोबाइल, रुपये व अन्य कागजात भी पानी में डूब गये। दोनों के परिजनों ने बच्चों को बचाने पर उसे जो प्यार दिया, उसे शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है। सुनील कौशिक ने बताया कि वह मूल रुप से रोहतक के इंद्रगढ़ गांव का रहने वाला है तथा पिछले 7 साल से नगर निगम में ही तैनात है। बताया कि उसने बचपन में ही गांव के ही तालाब में शौक के तौर ही तैराकी सीखी थी। आज उसकी तैराकी काम आ गई। उसे अपने पर गर्व महसूस हो रहा है।
जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे सुनील का अहसान
आयुष व राहुल के परिजनों ने कहा कि जिस तरह से अपनी जान पर खेलकर नगर निगम के कर्मचारी सुनील ने उनके बच्चों की जान बचाई है। उसका अहसान वे जिंदगी भर नहंी उतार पाएंगे। फरिश्ता बनकर सुनील बच्चों के जीवन में पहुंचा। राहुल की मां हेमा व पिता राहुल ने कहा कि सुनील जैसे लोगों से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
और बेटे को गले लगा बिलख पड़ी हेमा
जैसे ही हेमा को पुत्र राहुल के जल गृह में डूबने का पता लगा तो वह तुरंत ही बदहवाश अवस्था में मौके पर पहुंची तथा जैसे ही बेटे को बाहर निकाला गया हेमा काफी देर तक गले लगाकर बिलखती रही। बताया गया कि देर शाम अचानक हेमा की हालत सदमे में बिगड़ गई थी। हालांकि राहुल की हालत पूरी तरह से ठीक है।
आखिर जल गृह तक क ैसे पहुंचे बच्चे
यह सवाल भी हर किसी के दिमाग में घर कर रहा है कि दोनों दोस्त जल गृह तक कैसे पहुंचे। विभागीय अधिकारियों की कार्य प्रणाली भी इसको लेकर सवालों के घेरे में है। जल गृह के पास में ही मंदिर व फायर का कार्यालय भी है।