{"_id":"5aa996414f1c1bbe758b5788","slug":"31521063489-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बयान से मुकरने पर शिकायतकर्ता और चश्मदीदों के खिलाफ केस दर्ज","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बयान से मुकरने पर शिकायतकर्ता और चश्मदीदों के खिलाफ केस दर्ज
Updated Thu, 15 Mar 2018 03:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बयान से मुकरने पर शिकायतकर्ता और चश्मदीदों के खिलाफ केस दर्ज
- अलग अलग कोर्ट के आदेश पर जिले भर में मुकरने वालों के खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज
- कोर्ट बोली - पुलिस को टूल की तरह प्रयोग कर रहे शिकायतकर्ता
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिले की अलग अलग अदालतों के आदेश पर बयानों से मुकरने पर शिकायतकर्ता, उनके रिश्तेदार और चश्मदीदों के खिलाफ केस दर्ज किये गये हैं। साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की है कि शिकायत कर्ता पुलिस को टूल की तरह प्रयोग कर रहे हैं।
इस कड़ी में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनिका गोयल की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में बयानों से मुकरने पर शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस तरह के शिकायतकर्ता पुलिस को टूल की तरह प्रयोग करते हैं। इस संबंध में महिला के खिलाफ सदर थाने में केस दर्ज किया गया है। अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता बयानों से पलट गया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के मामलों में बहुत समय बर्बाद हो जाता है। जबकि उस समय को अन्य मुकदमों की सुनवाई में प्रयोग किया जा सकता है।
शिकायतकर्ता के खिलाफ एक क्रिमिनल केस आईपीसी की धारा 211 नुकसान पहुंचाने के आशय से झूठे आरोप लगाकर केस दर्ज करवाना, 193 झूठे सबूत पेश करना, 182 पुलिस को झूठी शिकायत देना और 186 सरकारी कर्मचारी के अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी में बाधा डालने का केस दर्ज किया गया है। साथ ही अदालत ने आदेश दिये कि यदि जांच में सामने आये कि मुकदमे को खत्म करने को लेकर रुपयों का लेनदेन हुआ तो एफआईआर में आईपीसी की धारा 389 को भी शामिल करने के आदेश दिये। यह धारा जब लगाई जाती है जब किसी व्यक्ति पर केस दर्ज करवाने का भय बनाकर उससे वसूली की जाती है।
विज्ञापन
ये था मामला
21 मई 2017 को गांव चमारियां निवासी शिलकराम ने सदर थाने में शिकायत दी थी। इसमें बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी आशा की शादी 4 दिसंबर 2016 को सुमित सेक्टर 21 इंद्रा इनक्लेव फरीदाबाद के साथ की थी। आरोप था कि शादी के कुछ दिन बाद ही ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग को लेकर आशा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। ससुराल पक्ष की हरकतों से तंग आकर 18 मई 2017 को आशा ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद शिलकराम की शिकायत पर सुमित सहित ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर दहेज हत्या का केस दर्ज किया गया था। इस मामले की कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदार गवाही से मुकर गये। इस पर कोर्ट ने केस दर्ज करने के आदेश दिये। ऐसे ही एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिये। इस संबंध में शहर थाने में केस दर्ज किया गया है। दहेज हत्या के इस मामले में भी शिकायतकर्ता गवाही से मुकर गये।
शिकायतकर्ता और चश्मदीद पर भी दर्ज हुआ केस
इसी तरह स्नेचिंग और जान से मारने की धमकी देने के मामले में बयान से मुकरने पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फकरूद्दीन की अदालत के आदेश पर शिकायतकर्ता संदीप और चश्मदीद प्रवीण, रिजवान के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 10 अगस्त 2017 में भिवानी के गांव भारीवास निवासी संदीप ने शहर थाना पुलिस को शिकायत दी थी। इसमें बताया था कि वह 9 अगस्त की रात को अपने पिकअप गाड़ी में भैंस लेकर जा रहे थे। उसके साथ क्लीनर प्रवीण और पशु व्यापारी यूपी बागपत के गांव कुताना निवासी रिजवान भी था। संदीप का आरोप था कि जींद बाईपास के पास कार सवार दो युवकों ने संदीप सहित उसके साथियों के साथ मारपीट कर रुपये छीन लिये थे। बाद में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। तभी से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। अब कोर्ट में सुनवाई के दौरान संदीप व चश्मदीद प्रवीण और रिजवान आरोपियों को पहचानने से मुकर गये। इस पर कोर्ट ने तीनों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किये।
इसी प्रकार अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह की अदालत पर छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के एक मामले में बयानों से मुकरने पर शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सदर थाना पुलिस ने मामले में कार्रवाई की है।
विज्ञापन
- अलग अलग कोर्ट के आदेश पर जिले भर में मुकरने वालों के खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज
- कोर्ट बोली - पुलिस को टूल की तरह प्रयोग कर रहे शिकायतकर्ता
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिले की अलग अलग अदालतों के आदेश पर बयानों से मुकरने पर शिकायतकर्ता, उनके रिश्तेदार और चश्मदीदों के खिलाफ केस दर्ज किये गये हैं। साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की है कि शिकायत कर्ता पुलिस को टूल की तरह प्रयोग कर रहे हैं।
इस कड़ी में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनिका गोयल की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में बयानों से मुकरने पर शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस तरह के शिकायतकर्ता पुलिस को टूल की तरह प्रयोग करते हैं। इस संबंध में महिला के खिलाफ सदर थाने में केस दर्ज किया गया है। अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता बयानों से पलट गया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के मामलों में बहुत समय बर्बाद हो जाता है। जबकि उस समय को अन्य मुकदमों की सुनवाई में प्रयोग किया जा सकता है।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता के खिलाफ एक क्रिमिनल केस आईपीसी की धारा 211 नुकसान पहुंचाने के आशय से झूठे आरोप लगाकर केस दर्ज करवाना, 193 झूठे सबूत पेश करना, 182 पुलिस को झूठी शिकायत देना और 186 सरकारी कर्मचारी के अन्य महत्वपूर्ण ड्यूटी में बाधा डालने का केस दर्ज किया गया है। साथ ही अदालत ने आदेश दिये कि यदि जांच में सामने आये कि मुकदमे को खत्म करने को लेकर रुपयों का लेनदेन हुआ तो एफआईआर में आईपीसी की धारा 389 को भी शामिल करने के आदेश दिये। यह धारा जब लगाई जाती है जब किसी व्यक्ति पर केस दर्ज करवाने का भय बनाकर उससे वसूली की जाती है।
विज्ञापन
ये था मामला
21 मई 2017 को गांव चमारियां निवासी शिलकराम ने सदर थाने में शिकायत दी थी। इसमें बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी आशा की शादी 4 दिसंबर 2016 को सुमित सेक्टर 21 इंद्रा इनक्लेव फरीदाबाद के साथ की थी। आरोप था कि शादी के कुछ दिन बाद ही ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग को लेकर आशा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। ससुराल पक्ष की हरकतों से तंग आकर 18 मई 2017 को आशा ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद शिलकराम की शिकायत पर सुमित सहित ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर दहेज हत्या का केस दर्ज किया गया था। इस मामले की कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदार गवाही से मुकर गये। इस पर कोर्ट ने केस दर्ज करने के आदेश दिये। ऐसे ही एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिये। इस संबंध में शहर थाने में केस दर्ज किया गया है। दहेज हत्या के इस मामले में भी शिकायतकर्ता गवाही से मुकर गये।
शिकायतकर्ता और चश्मदीद पर भी दर्ज हुआ केस
इसी तरह स्नेचिंग और जान से मारने की धमकी देने के मामले में बयान से मुकरने पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फकरूद्दीन की अदालत के आदेश पर शिकायतकर्ता संदीप और चश्मदीद प्रवीण, रिजवान के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 10 अगस्त 2017 में भिवानी के गांव भारीवास निवासी संदीप ने शहर थाना पुलिस को शिकायत दी थी। इसमें बताया था कि वह 9 अगस्त की रात को अपने पिकअप गाड़ी में भैंस लेकर जा रहे थे। उसके साथ क्लीनर प्रवीण और पशु व्यापारी यूपी बागपत के गांव कुताना निवासी रिजवान भी था। संदीप का आरोप था कि जींद बाईपास के पास कार सवार दो युवकों ने संदीप सहित उसके साथियों के साथ मारपीट कर रुपये छीन लिये थे। बाद में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। तभी से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। अब कोर्ट में सुनवाई के दौरान संदीप व चश्मदीद प्रवीण और रिजवान आरोपियों को पहचानने से मुकर गये। इस पर कोर्ट ने तीनों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश जारी किये।
इसी प्रकार अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह की अदालत पर छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट के एक मामले में बयानों से मुकरने पर शिकायत कर्ता और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सदर थाना पुलिस ने मामले में कार्रवाई की है।