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सजा: नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, खेतों में बने कोठड़े में लेजाकर किया था गलत काम
Mon, 28 Feb 2022 09:22 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 28 Feb 2022 09:22 PM IST
सार
ढाई साल पहले कलानौर थाने में केस दर्ज हुआ था। एएसजे नरेश कुमार की अदालत ने फैसला सुनाया है। दोषी पर दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हरियाणा के रोहतक में ढाई साल पहले 9वीं कक्षा की छात्रा का अपहरण कर खेतों में दुष्कर्म करने के दोषी को सोमवार को एएसजे नरेश कुमार की अदालत ने 20 साल कैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। पीड़ित पक्ष के वकील एडवोकेट विनोद अहलावत ने बताया कि 14 साल की नाबालिग परिजनों के साथ थाने में पहुंची और शिकायत दर्ज करवाई।
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बताया कि वह अल सुबह करीब साढ़े तीन बजे मां को बताकर शौच के लिए घर से बाहर गई थी। तभी कलानौर का युवक किशन आया और उसका मुंह दबाकर खेतों में बने कोठड़े में ले गया। वहां पर उसे धमकी दी कि अगर शोर मचाया तो जान से मार देगा। इसके बाद आरोपी ने उसके साथ गलत काम किया।
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परिजन उसे ढूंढते हुए मौके पर पहुंचे। इसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी किशन को दुष्कर्म, 4 पॉक्सो एक्ट व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। तभी से जिला अदालत में मामले की सुनवाई चल रही थी। सोमवार को कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल कैद व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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डरकर बयानों से मुकर गई थी छात्रा, परिजनों की गवाही पर मिली सजा
वकील ने बताया कि केस का अदालत में जब ट्रायल चल रहा था, उस दौरान पीड़िता को आरोपी पक्ष की तरफ से धमकी मिली। दबाव में पीड़ित अदालत में बयानों से मुकर गई। हालांकि दूसरे गवाहों ने पुख्ता बयान दर्ज करवाए। ऐसे में अदालत में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि नाबालिग के बयान मायने नहीं रखते, बल्कि नाबालिग के परिजनों की गवाही अहम है। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।