महम कांड अपडेट..........

Rohtak Bureau Updated Sat, 14 Jul 2018 02:25 AM IST
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महम कांड : रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में आनाकानी करती रही पुलिस
हेडिंग : हत्या केस की जांच रिपोर्ट देने से पुलिस करती रही मना, कोर्ट में बोरा खुला तो मिले अहम दस्तावेज
-वकील बोले, गवाहों के शपथ पत्र काफी अहम, मामले में आया नया मोड़
-5 सितंबर को होगी मामले की एडीजे कोर्ट में सुनवाई
- इनेलो नेता अभय चौटाला सहित सात लोगों से मांगा है एडीजे कोर्ट ने जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश का बहुचर्चित महम कांड एक बार फिर बाहर आ गया है। 28 साल बाद भी खरक जाटान के हरिसिंह की हत्या का मामला अनट्रेस है। मृतक के भाई ने आरटीआई से पुलिस से केस की जांच रिपोर्ट मांगी तो पुलिस ने उपलब्ध न होने की बात कहकर रिकार्ड देने से मना कर दिया, लेकिन अदालत में जब महम पुलिस ने बोरा खोला तो अहम दस्तावेज मिले। याचिकाकर्ता रामफल के वकील एसएस सांगवान का कहना है कि ये रिकॉर्ड मामले की जांच में काफी अहम साबित होगा। मामले की अगली सुनवाई एडीजे कोर्ट में 5 सितंबर को है।
खरक जाटान निवासी रामफल के भाई हरिसिंह की महम कांड में 1990 में हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। महम थाने में उसके भाई की मौत के मामले में 28 फरवरी 1990 को आईपीसी की धारा 302, 307, 148, 149 के तहत केस दर्ज किया गया था। रामपाल के वकील एडवोकेट एसएस सांगवान ने बताया कि रामफल ने 2015 में आरटीआई लगाकर महम पुलिस सेे केस की स्टेटस रिपोर्ट मांगी। 7 जुलाई 2015 को रोहतक पुलिस की तरफ से जवाब दिया गया कि मामले की अब तक एसआई बुध सिंह, इंस्पेक्टर सतबीर सिंह, हरचरण सिंह, डीएसपी क्राइम ब्रांच स्वर्ण सिंह, डीएसपी क्राइम ब्रांच गुरदयाल सिंह, इंस्पेक्टर पाला राम, कलीराम, देवेंद्र व निरीक्षण सत्यनारायण जांच कर चुके हैं। मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। केस के संबंध में 10 दिसंबर 1995 की रिपोर्ट लिखी गई। इसके बाद दोबारा जांच पड़ताल करवाई गई, जिसे 2003 में बंद कर दिया गया। 20 जुलाई 2006 को केस की अनट्रेस रिपोर्ट वीआरके शाखा में भेजी गई, जो अब उपलब्ध नहीं है। इस कारण मांगी गई सूचना नहीं दी जा सकती।

जब अदालत में हवलदार बोला, थाने के अंदर दो बोरों में रखा रिकॉर्ड
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मामले को लेकर महम कोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट में पहुंचे महम थाने के हवलदार ने कहा कि थाने के अंदर दो बोरों में महम कांड से जुड़ा रिकॉर्ड रखा हुआ है। यह बताया जाए कि कौन सा रिकॉर्ड लेकर आना है। छंटनी के बाद ही पता लग सकेगा कि क्या-क्या रिकॉर्ड मौजूद है। अगली पेशी पर एक पुलिसकर्मी महम थाने से एक बोरा लेकर पहुंचा, जिसमें से कुछ अहम दस्तावेज अदालत के सामने आए। इसमें गवाहों के शपथ पत्र भी हैं, जिसमें घटनाक्रम पर प्रकाश डाला गया है। ये दस्तावेज अदालत के अंदर सुनवाई के दौरान बेहद अहम साबित होंगे।
यह रहा मामला
फरवरी 1990 में महम उप चुनाव के दौरान हिंसा हुई, जिसमें 10 लोग मारे गए। इसमें खरक जाटान निवासी रामपाल का बड़ा भाई हरिसिंह भी था। हरिसिंह की मौत के मामले में महम थाने में एफआईआर दर्ज है, जो 28 साल बाद भी अनट्रेस है। रामफल ने महम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच की मांग की, लेकिन महम कोर्ट में याचिका खारिज हो गई। इसकी अपील रामफल ने एडीजे फखरुद्दीन की कोर्ट की है, जिसमें 10 जुलाई को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इनेलो नेता अभय चौटाला, तत्कालीन डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, पूर्व एसीपी करनाल सुरेश चंद्र, पूर्व डीएसपी भिवानी सुखदेव राज राणा, दरियावपुर निवासी भूपेंद्र सिंह उर्फ भूप्पी, हिसार के गांव दौलतपुर निवासी पप्पू व गिल्ला खेड़ा गांव निवासी अजीत सिंह को नोटिस भेजा है। नोटिस में 5 सितंबर को हाजिर होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
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आरटीआई के जवाब में पुलिस ने पहले तो केस की जांच रिपोर्ट उपलब्ध न होने की बात कही। इसके बाद अदालत में बताया कि महम थाने में दो बोरों में रिकॉर्ड बंद है। एक बोरा अदालत में भी पेश किया, जिसके अंदर से अहम दस्तावेज मिले हैं, जो केस की सुनवाई में काफी अहम साबित होंगे।
-एसएस सांगवान, याचिकाकर्ता के वकील

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