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ममता, एक नाकाम प्रेम कथा
Updated Sat, 11 Aug 2018 03:16 AM IST
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हेडिंग : ममता : एक नाकाम प्रेम कथा : मरने के बाद भी दुर्भाग्य नहीं छोड़ रहा साथ
: ममता के ताऊ व दूसरे परिजन भी पीछे हटे, पुलिस ने अदालत को कराया अवगत
: अदालत नहीं ले सकी कोई भी फैसला, पोस्टमार्टम के बाद 48 घंटे अंतिम संस्कार की समय सीमा
: महिला आयोग के बाद सामाजिक संस्था आई आगे, डीसी को वकीलों के साथ लिखित में दिया पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। ममता एक नाकाम प्रेम कथा साबित हुई। दो साल की उम्र में जन्म देने वाली मां ने अपनी ननद को गोद दे दिया। 15 साल गोद लेने वाली बुआ ने मां बनकर पाला। 17 साल की उम्र में एक ऐसे युवक से प्रेम विवाह कर लिया, जो अब शव लेने से भी इनकार कर रहा है। यहां तक अंतिम संस्कार के लिए उसके परिजन भी पीछे हट गए हैं। पोस्टमार्टम के 48 घंटे की समय सीमा के अंदर शनिवार सुबह अदालत फैसला लेगी कि शव को अंतिम संस्कार के लिए किसे दिया जाए। महिला आयोग के बाद अब पारस जन कल्याण समिति शव लेने के लिए आगे आई है, जिसने लिखित में बार के वरिष्ठ वकीलों के साथ डीसी को पत्र दिया है।
दो माह पहले बालिग हुई ममता मात्र 18 साल की उम्र में कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। दुर्भाग्य ने उसका पीछा मरने के बाद भी नहीं छोड़ा है। ममता का जन्म गद्दी खेड़ी गांव निवासी रामकेश के घर 14 जून 2000 को हुआ। तीनों बहनों में सबसे बड़ी ममता को बुआ ने उस समय गोद ले लिया, जब वह मात्र दो साल की थी। बुआ ने गोद लेकर ममता को बड़ा किया। 12वीं पास करने के बाद ममता के सिंहपुरा निवासी सोमी उर्फ सोमिन से प्रेम संबंध बन गए। उसने सोमी के साथ अंतरजातीय विवाह कर लिया। अब 8 अगस्त को दिनदहाड़े ममता की बेरहमी से सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। अब अंतिम संस्कार के भी लाले पड़े हुए हैं। मात्र 18 साल की उम्र में कई पड़ाव से गुजरी ममता का मौत के बाद भी दुर्भाग्य पीछा नहीं छोड़ रहा।
तीनों पक्ष शव लेने से पीछे हटे, पुलिस ने अदालत में दाखिल किया पत्र
पुलिस की तरफ से ममता के नाबालिग होने के बावजूद विवाह करने वाले जेल में बंद सोमी, उसे जन्म देने व गोद लेने वाले परिजनों को नोटिस भेजा गया। पत्र में लिखा गया कि ममता का संबंध आपसे है। क्या आप अंतिम संस्कार के लिए शव लेने को तैयार हैं। अदालत में पुलिस की तरफ से शुक्रवार को एक पत्र दाखिल किया गया। उस पत्र पर सोमी का अंगूठा लगा हुआ है, जबकि दो अन्य पक्षों के हस्ताक्षर हैं। तीनों की तरफ से शव लेने से इनकार किया हुआ है।
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पंचायती तौर पर अंतिम संस्कार की थी तैयारी, कानूनी पहलू आए आड़े
दोपहर ममता का ताऊ रामफल व गांव के पंचायती लोग जेएमआईसी मानसी गौड़ की अदालत के बाहर पहुंचे। साथ में आर्य नगर थाना प्रभारी सुनीता भी थीं। कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद पता चला कि पंचायत के तौर पर मौखिक आग्रह करने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद परिजन व पंचायत के लोग अदालत से चले गए।
वर्जन::::
पुलिस ने तीनों पक्षाें को नोटिस देकर शव लेने के लिए पत्र भेजा था। तीनों पक्षों ने शव लेने से इंकार कर दिया है। पत्र जेएमआईसी मानसी गौड़ की अदालत में जमा करवा दिया गया है। अब शव अंतिम संस्कार के लिए किसे दिया जाए, इसका फैसला अदालत को करना है। अदालत द्वारा 48 घंटे अंतिम संस्कार के लिए तय किए हुए हैं।
रमेश कुमार, डीएसपी
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हेडिंग : ममता : एक नाकाम प्रेम कथा : मरने के बाद भी दुर्भाग्य नहीं छोड़ रहा साथ
: ममता के ताऊ व दूसरे परिजन भी पीछे हटे, पुलिस ने अदालत को कराया अवगत
: अदालत नहीं ले सकी कोई भी फैसला, पोस्टमार्टम के बाद 48 घंटे अंतिम संस्कार की समय सीमा
: महिला आयोग के बाद सामाजिक संस्था आई आगे, डीसी को वकीलों के साथ लिखित में दिया पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। ममता एक नाकाम प्रेम कथा साबित हुई। दो साल की उम्र में जन्म देने वाली मां ने अपनी ननद को गोद दे दिया। 15 साल गोद लेने वाली बुआ ने मां बनकर पाला। 17 साल की उम्र में एक ऐसे युवक से प्रेम विवाह कर लिया, जो अब शव लेने से भी इनकार कर रहा है। यहां तक अंतिम संस्कार के लिए उसके परिजन भी पीछे हट गए हैं। पोस्टमार्टम के 48 घंटे की समय सीमा के अंदर शनिवार सुबह अदालत फैसला लेगी कि शव को अंतिम संस्कार के लिए किसे दिया जाए। महिला आयोग के बाद अब पारस जन कल्याण समिति शव लेने के लिए आगे आई है, जिसने लिखित में बार के वरिष्ठ वकीलों के साथ डीसी को पत्र दिया है।
दो माह पहले बालिग हुई ममता मात्र 18 साल की उम्र में कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। दुर्भाग्य ने उसका पीछा मरने के बाद भी नहीं छोड़ा है। ममता का जन्म गद्दी खेड़ी गांव निवासी रामकेश के घर 14 जून 2000 को हुआ। तीनों बहनों में सबसे बड़ी ममता को बुआ ने उस समय गोद ले लिया, जब वह मात्र दो साल की थी। बुआ ने गोद लेकर ममता को बड़ा किया। 12वीं पास करने के बाद ममता के सिंहपुरा निवासी सोमी उर्फ सोमिन से प्रेम संबंध बन गए। उसने सोमी के साथ अंतरजातीय विवाह कर लिया। अब 8 अगस्त को दिनदहाड़े ममता की बेरहमी से सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। अब अंतिम संस्कार के भी लाले पड़े हुए हैं। मात्र 18 साल की उम्र में कई पड़ाव से गुजरी ममता का मौत के बाद भी दुर्भाग्य पीछा नहीं छोड़ रहा।
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तीनों पक्ष शव लेने से पीछे हटे, पुलिस ने अदालत में दाखिल किया पत्र
पुलिस की तरफ से ममता के नाबालिग होने के बावजूद विवाह करने वाले जेल में बंद सोमी, उसे जन्म देने व गोद लेने वाले परिजनों को नोटिस भेजा गया। पत्र में लिखा गया कि ममता का संबंध आपसे है। क्या आप अंतिम संस्कार के लिए शव लेने को तैयार हैं। अदालत में पुलिस की तरफ से शुक्रवार को एक पत्र दाखिल किया गया। उस पत्र पर सोमी का अंगूठा लगा हुआ है, जबकि दो अन्य पक्षों के हस्ताक्षर हैं। तीनों की तरफ से शव लेने से इनकार किया हुआ है।
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पंचायती तौर पर अंतिम संस्कार की थी तैयारी, कानूनी पहलू आए आड़े
दोपहर ममता का ताऊ रामफल व गांव के पंचायती लोग जेएमआईसी मानसी गौड़ की अदालत के बाहर पहुंचे। साथ में आर्य नगर थाना प्रभारी सुनीता भी थीं। कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद पता चला कि पंचायत के तौर पर मौखिक आग्रह करने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद परिजन व पंचायत के लोग अदालत से चले गए।
वर्जन::::
पुलिस ने तीनों पक्षाें को नोटिस देकर शव लेने के लिए पत्र भेजा था। तीनों पक्षों ने शव लेने से इंकार कर दिया है। पत्र जेएमआईसी मानसी गौड़ की अदालत में जमा करवा दिया गया है। अब शव अंतिम संस्कार के लिए किसे दिया जाए, इसका फैसला अदालत को करना है। अदालत द्वारा 48 घंटे अंतिम संस्कार के लिए तय किए हुए हैं।
रमेश कुमार, डीएसपी