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रोहतक के टिटौली माइनर में बच्ची का शव मिलने का मामला

Thu, 19 Apr 2018 02:48 AM IST
Updated Thu, 19 Apr 2018 02:48 AM IST
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रोहतक के टिटौली माइनर में बच्ची का शव मिलने का मामला
टिटौली माइनर में बच्ची का शव मिलने का मामला
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निचली अदालत के आदेश पर पुलिस ने कर दिया शव का अंतिम संस्कार, ऊपरी अदालत ने लगाई रोक
ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट ने कोर्ट में याचिका लगाकर की थी दिल्ली एम्स और चंडीगढ़ पीजीआई से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
टिटौली माइनर में मिले बच्ची के शव का अंतिम संस्कार रोकने और दिल्ली एम्स व चंडीगढ़ पीजीआई के मेडिकल बोर्ड से कराने संबंधी याचिका को बुधवार को एसीजेएम हरीश गोयल की अदालत ने खारिज कर पुलिस को अंतिम संस्कार कराने के आदेश दे दिए। पुलिस के अंतिम संस्कार करने के एक घंटे बाद ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की अदालत ने अंतिम संस्कार कराने पर रोक लगा दी। मगर जब तक पुलिस अंतिम संस्कार कर चुकी थी। अब मामले में वीरवार को सुनवाई होगी।
बता दें कि रविवार को टिटौली माइनर में मिले एक बैग के अंदर एक बच्ची का क्षत विक्षत शव मिला था। आरोपियों ने लड़की की हत्या कर उसका शव बैग में बंद करके टिटौली माइनर में फेंक दिया था। दोपहर को एक किसान ने लड़की का शव माइनर में देखा था। लड़की की उम्र करीब दस साल थी। शव की आंखें और जीभ बाहर निकली हुई थी। उसका दाहिना हाथ जानवरों ने नोंच रखा था। पुलिस को मृतका के पास पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिले थे। मेडिकल बोर्ड द्वारा किये गये पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी। बुधवार को शव 72 घंटे पूरे होने के बाद शव का अंतिम संस्कार होना था। दुष्कर्म की आशंका के चलते मंगलवार को रात करीब सात बजे ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट एडवोकेट मोमिन मलिक ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बच्ची का दिल्ली एम्स या पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने की अपील की गई। साथ ही लिखा कि यदि बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया तो दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकेगी। ऐसे में आरोपियों को सिर्फ हत्या की सजा ही मिल सकेगी। एडवोकेट ने मांग की थी कि बुधवार को शव का अंतिम संस्कार न किया जाए। इसके बाद कोर्ट ने रात को ही करीब तीस मिनट तक सुनवाई करने के बाद मामले में सदर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को सुबह कोर्ट में पेश होने के आदेश दिये थे।
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इसी मामले को लेकर सदर थाने के प्रभारी प्रशिक्षु आइपीएस मकसूद अहमद और जांच अधिकारी एएसआई देवी सिंह सभी तथ्यों के साथ एसीजेएम हरीश गोयल की कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद टिप्पणी की कि बच्ची के शव का पहले ही पीजीआई के मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया गया है। मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टर अनुभवी हैं। ऐसे में शव का दोबारा पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सकता। इसके बाद एडवोकेट मोमिन मलिक की याचिका खारिज कर शव का अंतिम संस्कार कराने के आदेश दे दिये। अदालत के आदेश के बाद सदर थाना पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार करा दिया।
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याचिका खारिज होते ही एक्टिविस्ट एडवोकेट मोमिन ने जिला कोर्ट में याचिका दायर कर दी। जिला कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर सुनवाई के लिए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की अदालत में भेज दिया। इस पर अश्वनी कुमार की अदालत ने याचिका के बाद अंतिम संस्कार पर रोक लगा दी। साथ ही वीरवार को सदर थाना पुलिस को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखने के आदेश दिये। ऊपरी अदालत में करीब एक घंटे तक सुनवाई हुई। तब तक पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। अब मामले में वीरवार को सुनवाई होगी।
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यूं चला घटनाक्रम
सुबह नौ बजे एसीजेएम हरीश गोयल की कोर्ट में हुई सुनवाई।
दोपहर एक बजे दोनों पक्षों ने अपने तर्क अदालत में रखे।
दोपहर दो बजे अदालत ने याचिका खारिज कर शव का अंतिम संस्कार कराने का आदेश दिया।
शाम तीन बजे सदर थाना पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार करा दिया।
इसी बीच ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट एडवोकेट मोमिन मलिक ने जिला कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
जिला कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की कोर्ट में ट्रांसफर कर दी।
शाम चार बजे ऊपरी अदालत ने आदेश जारी किए कि वीरवार को इस मामले में दोबारा सुनवाई होगी। दोनों पक्षों को सुना जाएगा। जब तक अंतिम संस्कार पर रोक लगा दी गई।
निचली अदालत के द्वारा याचिका खारिज होने पर बच्ची के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। ऊपरी अदालत की तरफ से जारी किया गया अंतिम संस्कार पर रोक का नोटिस बाद में मिला। मगर जब तक अंतिम संस्कार हो चुका था। मामले में वीरवार को सुनवाई होनी है।

प्रशिक्षु आइपीएस मकसूद अहमद, प्रभारी सदर थाना
ऊपरी अदालत ने बच्ची के अंतिम संस्कार पर रोक लगाकर वीरवार को सुनवाई करने का आदेश जारी किया था। यदि पुलिस ने बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया है तो वह कोर्ट में अवमानना है।
एडवोकेट मोमिन मलिक, ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट
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