{"_id":"5ae63efd4f1c1b320a8b7339","slug":"101525038845-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मै कारौर गांव हूं, कई साल से रंजिश की आग में झुलस रहा हूं","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मै कारौर गांव हूं, कई साल से रंजिश की आग में झुलस रहा हूं
Updated Mon, 30 Apr 2018 03:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्षों से रंजिश की आग में झुलसता, मैं हूं कारौर...
रोहतक।
मैं कारौर गांव हूं। मैं आज आपको अपने दर्द की कहानी सुनाने जा रहा हूं। मुझे किसी की नजर लग गई है। दो परिवारों में चल रही रंजिश की आग में पिछले 17 साल से झुलस रहा हूं। दिन ढलते ही गांव में लोगों की आवाजाही बंद हो जाती है। सन्नाटा पसर जाता है। दोनों परिवारों के बीच चली आ रही रंजिश को समाप्त करने की तरफ ग्रामीण न कोई पुलिस प्रशासन आगे आ रहा है। नतीजतन कारौर गांव का नाम लेते ही आसपास के ग्रामीण कांप उठते हैं।
एक समय था जब गांव में सूर्य की पौ फटते ही बच्चों की किलकारियों से लेकर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाता था। मेरे यहां रहने वाले लोग आपसी झगड़ों को पंचायत में ही निपटा लिया करते थे। मगर 2001 के बाद से अपने को ठगा सा महसूस कर रहा हूं। गांव के आनंद व अनिल के बीच रंजिश के बाद मानो गांव को किसी की नजर लग गई। कब गोलियों की आवाज सुनाई दे जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। मैं पहले की तरह सभी ग्रामीणों के बीच प्यार चाहता हूं। मगर मेरी कोई भी सुनवाई नहीं कर रहा है। गांव में पहले जैसा सामंजस्य देखना चाहता हूं। मगर गांव की रंजिश को देखकर हर बार मुझे रोना आता है। जो लोग मेरी सफाई से लेकर मुझे वैवाहिक कार्यक्रमों या फिर अन्य आयोजनों पर सजाया करते थे उनकी संख्या ही कम होती जा रही है। पुलिस प्रशासन से प्रार्थना है कि इस रंजिश को खत्म करो। वरना मै खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा। पहले की तरह गांव में सुख शांति स्थापित करना चाहता हूं।
विज्ञापन
रोहतक।
मैं कारौर गांव हूं। मैं आज आपको अपने दर्द की कहानी सुनाने जा रहा हूं। मुझे किसी की नजर लग गई है। दो परिवारों में चल रही रंजिश की आग में पिछले 17 साल से झुलस रहा हूं। दिन ढलते ही गांव में लोगों की आवाजाही बंद हो जाती है। सन्नाटा पसर जाता है। दोनों परिवारों के बीच चली आ रही रंजिश को समाप्त करने की तरफ ग्रामीण न कोई पुलिस प्रशासन आगे आ रहा है। नतीजतन कारौर गांव का नाम लेते ही आसपास के ग्रामीण कांप उठते हैं।
एक समय था जब गांव में सूर्य की पौ फटते ही बच्चों की किलकारियों से लेकर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाता था। मेरे यहां रहने वाले लोग आपसी झगड़ों को पंचायत में ही निपटा लिया करते थे। मगर 2001 के बाद से अपने को ठगा सा महसूस कर रहा हूं। गांव के आनंद व अनिल के बीच रंजिश के बाद मानो गांव को किसी की नजर लग गई। कब गोलियों की आवाज सुनाई दे जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। मैं पहले की तरह सभी ग्रामीणों के बीच प्यार चाहता हूं। मगर मेरी कोई भी सुनवाई नहीं कर रहा है। गांव में पहले जैसा सामंजस्य देखना चाहता हूं। मगर गांव की रंजिश को देखकर हर बार मुझे रोना आता है। जो लोग मेरी सफाई से लेकर मुझे वैवाहिक कार्यक्रमों या फिर अन्य आयोजनों पर सजाया करते थे उनकी संख्या ही कम होती जा रही है। पुलिस प्रशासन से प्रार्थना है कि इस रंजिश को खत्म करो। वरना मै खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा। पहले की तरह गांव में सुख शांति स्थापित करना चाहता हूं।
विज्ञापन