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कानून का डर पैदा करें, दुष्कर्मियों को दें फांसी
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हैदराबाद में महिला चिकित्सक की रेप के बाद हत्या को लेकर वीरवार को अमर उजाला के सिटी आफिस में संव
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हैदराबाद में महिला चिकित्सक के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद जलाकर मार डालने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शर्मिंदा करने वाली वारदात पर महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। वीरवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने इस घटना की न केवल निंदा की, बल्कि अपने सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून से नाबालिग शब्द हटा देना चाहिए। महिलाओं ने कहा कि सख्त कानून बनना चाहिए और तारीख पर तारीख की व्यवस्था के बजाय लगातार सुनवाई कर ऐसे मामलों में आरोप सिद्घ होते ही दुष्कर्मियों को फांसी दे देनी चाहिए।
बदला कभी खत्म नहीं होता। सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे दोषी अपराध करने से पहले 100 बार सोचे, उसके मन में खौफ हो कि ऐसा किया तो सजा क्या मिलेगी। इंसान की प्रवृति है कि वह कभी गलत काम नहीं छोड़ता। पहले के समय में भी गलत चीजें होती थीं, लेकिन अब मीडिया ने इन चीजों को उजागर करना शुरू कर दिया है। मोबाइल में हमारे पास सोशल प्लेटफार्म के माध्यम से दुनियाभर की जानकारियां मौजूद होती हैं। इंटरनेट सर्फिंग का ठीक इस्तेमाल और सख्त कानून ही इसका एकमात्र समाधान है।
- लोविना सिंह, एडवोकेट
कानून में सख्ती होती चाहिए। आक्रोश से काम नहीं चलता, आज हर इंसान में आक्रोश है। संसद तक यह आक्रोश पहुंच चुका है, लेकिन मॉब लिचिंग किसी समस्या का समाधान नहीं। समाधान सरकार और प्रशासन कानून को सख्त बनाकर और ऐसे दुष्कर्म जैसे मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द से जल्द निपटारा करके ही कर सकती है। - सोनिया
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एक आम आदमी को आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए आज मुसीबत में फंसी बहन या बेटी की कोई सहायता नहीं करना चाहता। सबको लगता है हम क्यों फंसे हमारी कौन सी अपनी बहन है। लोगों को मानसिकता बदलनी होगी। इसके अलावा स्कूलों में सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग व अभिभावकों को अच्छे संस्कार देने होंगे। - रेखा
ऐसे लोगों को फांसी देकर दूसरों के सामने उदाहरण पेश करना चाहिए। वहीं आम आदमी को आगे बढ़कर महिलाओं के प्रति सहयोग की भावना रखनी चाहिए। बच्चों से सेक्स एजुकेशन को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए। बच्चों को गुड टच बैड टच के बारे में सिखाना चाहिए। - अल्का
आरोप सिद्घ होते ही आरोपी को सख्त सजा देनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि दुष्कर्म करने वाला आरोपी नाबालिग है तो उसे कम सजा मिले। सभी को एक समान सख्त सजा मिलनी चाहिए। जीते जी वह इंसान हर रोज मरे ऐसी सजा सरकार को निर्धारित करनी चाहिए। कानून का लचीला होना भी अच्छा नहीं है। अब तो लगता है रोहतक भी सेफ नहीं है। - किरण गुप्ता
नेटवर्क पर पोर्न साइट्स पर बैन होना चाहिए। इसके अलावा देश में 12 साल तक के बच्चों को मोबाइल फोन रखना अलाउड ही नहीं होना चाहिए। इसमें टीचर्स औैर अभिभावकों की भी सबसे ज्यादा जवाबदेही होती है। स्कूलों में टीचर्स को व अभिभावकाें को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार व सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देनी चाहिए। - मेघना गुप्ता
कानून को आरोपियों के लिए सख्त व पीड़िता के साथ लचीला होना होगा। क्योंकि कानून के डर से आम लोग छोड़ो पड़ोसी भी बाहर किसी लड़की की मदद करने से कतराते हैं। कानून के डर के चलते कोई पचड़े में नहीं पड़ना चाहता। फांसी की सजा ना होकर ऐसा हो की वह सारी उम्र तड़फ-तड़फ कर निकालें। - ज्योति चुघ
सेटेलाइट सिस्टम अच्छा होना चाहिए। इससे आरोपियों के मन में डर होगा कि वह कहीं भी जुर्म करें तो पकड़े जाएंगे और सख्त सजा मिलेगी। कई बार खेत में कोई महिला काम कर रही हैं तो आरोपियों को लगता है कि आप यहां कोई भी जुर्म करो किसी को पता नहीं चलेगा। लड़कियों में भी अभिभावकों को आत्मविश्वासी बनाना होगा। कई बार घर में ही गलत हो रहा होता है और लड़कियां है कि झिझक और शर्म के चलते आवाज ही नहीं उठा पातीं। - सुमन कादियान
घर में अभिभावकों को छोटी उम्र से ही बच्चों की मानसिकता का पता चल जाता है। ऐसे में अभिभावक ही अपने बच्चे को सही राह पर लेकर आ सकते हैं। क्योंकि क्राइम की शुरुआत घर में ही अभ्रदता के साथ शुरू हो जाती है। अगर समय पर इसको समझकर रोक लिया जाए तो आने वाली खेप को ऐसी गुनाहों से बचा सकते हैं। - कीर्ति
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बदला कभी खत्म नहीं होता। सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे दोषी अपराध करने से पहले 100 बार सोचे, उसके मन में खौफ हो कि ऐसा किया तो सजा क्या मिलेगी। इंसान की प्रवृति है कि वह कभी गलत काम नहीं छोड़ता। पहले के समय में भी गलत चीजें होती थीं, लेकिन अब मीडिया ने इन चीजों को उजागर करना शुरू कर दिया है। मोबाइल में हमारे पास सोशल प्लेटफार्म के माध्यम से दुनियाभर की जानकारियां मौजूद होती हैं। इंटरनेट सर्फिंग का ठीक इस्तेमाल और सख्त कानून ही इसका एकमात्र समाधान है।
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- लोविना सिंह, एडवोकेट
कानून में सख्ती होती चाहिए। आक्रोश से काम नहीं चलता, आज हर इंसान में आक्रोश है। संसद तक यह आक्रोश पहुंच चुका है, लेकिन मॉब लिचिंग किसी समस्या का समाधान नहीं। समाधान सरकार और प्रशासन कानून को सख्त बनाकर और ऐसे दुष्कर्म जैसे मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द से जल्द निपटारा करके ही कर सकती है। - सोनिया
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एक आम आदमी को आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए आज मुसीबत में फंसी बहन या बेटी की कोई सहायता नहीं करना चाहता। सबको लगता है हम क्यों फंसे हमारी कौन सी अपनी बहन है। लोगों को मानसिकता बदलनी होगी। इसके अलावा स्कूलों में सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग व अभिभावकों को अच्छे संस्कार देने होंगे। - रेखा
ऐसे लोगों को फांसी देकर दूसरों के सामने उदाहरण पेश करना चाहिए। वहीं आम आदमी को आगे बढ़कर महिलाओं के प्रति सहयोग की भावना रखनी चाहिए। बच्चों से सेक्स एजुकेशन को लेकर खुलकर बात करनी चाहिए। बच्चों को गुड टच बैड टच के बारे में सिखाना चाहिए। - अल्का
आरोप सिद्घ होते ही आरोपी को सख्त सजा देनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि दुष्कर्म करने वाला आरोपी नाबालिग है तो उसे कम सजा मिले। सभी को एक समान सख्त सजा मिलनी चाहिए। जीते जी वह इंसान हर रोज मरे ऐसी सजा सरकार को निर्धारित करनी चाहिए। कानून का लचीला होना भी अच्छा नहीं है। अब तो लगता है रोहतक भी सेफ नहीं है। - किरण गुप्ता
नेटवर्क पर पोर्न साइट्स पर बैन होना चाहिए। इसके अलावा देश में 12 साल तक के बच्चों को मोबाइल फोन रखना अलाउड ही नहीं होना चाहिए। इसमें टीचर्स औैर अभिभावकों की भी सबसे ज्यादा जवाबदेही होती है। स्कूलों में टीचर्स को व अभिभावकाें को अपने बच्चों को अच्छे संस्कार व सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देनी चाहिए। - मेघना गुप्ता
कानून को आरोपियों के लिए सख्त व पीड़िता के साथ लचीला होना होगा। क्योंकि कानून के डर से आम लोग छोड़ो पड़ोसी भी बाहर किसी लड़की की मदद करने से कतराते हैं। कानून के डर के चलते कोई पचड़े में नहीं पड़ना चाहता। फांसी की सजा ना होकर ऐसा हो की वह सारी उम्र तड़फ-तड़फ कर निकालें। - ज्योति चुघ
सेटेलाइट सिस्टम अच्छा होना चाहिए। इससे आरोपियों के मन में डर होगा कि वह कहीं भी जुर्म करें तो पकड़े जाएंगे और सख्त सजा मिलेगी। कई बार खेत में कोई महिला काम कर रही हैं तो आरोपियों को लगता है कि आप यहां कोई भी जुर्म करो किसी को पता नहीं चलेगा। लड़कियों में भी अभिभावकों को आत्मविश्वासी बनाना होगा। कई बार घर में ही गलत हो रहा होता है और लड़कियां है कि झिझक और शर्म के चलते आवाज ही नहीं उठा पातीं। - सुमन कादियान
घर में अभिभावकों को छोटी उम्र से ही बच्चों की मानसिकता का पता चल जाता है। ऐसे में अभिभावक ही अपने बच्चे को सही राह पर लेकर आ सकते हैं। क्योंकि क्राइम की शुरुआत घर में ही अभ्रदता के साथ शुरू हो जाती है। अगर समय पर इसको समझकर रोक लिया जाए तो आने वाली खेप को ऐसी गुनाहों से बचा सकते हैं। - कीर्ति