{"_id":"688100c4842b9666010abd7c","slug":"crawled-in-the-darkness-of-night-and-climbed-the-mountain-in-five-days-enemy-bullets-and-steep-climb-did-not-stop-his-steps-rohtak-news-c-17-roh1020-695992-2025-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारगिल योद्धा :: \nरात के अंधेरे में रेंगकर पांच दिन में चढ़े पहाड़, दुश्मन की गोलियां, खड़ी चढ़ाई से भी नहीं रुके कदम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारगिल योद्धा :: रात के अंधेरे में रेंगकर पांच दिन में चढ़े पहाड़, दुश्मन की गोलियां, खड़ी चढ़ाई से भी नहीं रुके कदम
विज्ञापन
कारगिल योद्धा हवलदार अजमेर।
फोटो : 31
- 17 जाट रेजिमेंट की अल्फा कंपनी में शामिल घिलोड़ कलां के पूर्व हवलदार अजमेर सिंह ने कारगिल युद्ध का संस्मरण साझा किया
- ऊपर से दुश्मन बटालियन पर रख रहा था नजर, पहाड़ पर चढ़ता देख जवानों चलाते थे गोलियां
तुषार शर्मा
रोहतक। दुश्मन की दनादन चलती गोलियां। पिंपल तीन व चार की खड़ी चढ़ाई और कड़ाके की ठंड भी जवानों का हौसला नहीं डिगा पा रही थीं। ऊंचाई पर बैठा दुश्मन एक-एक करके हमारे साथियों को निशाना बना रहा था। हम रात के अंधेरे में रेंगकर आगे बढ़ते। दिन में बड़े पत्थरों की आड़ में छिपकर रात होने का इंतजार करते। पांच दिन में पहाड़ के ऊपर चढ़ पाए। इसके बाद दुश्मन को ढेर कर दिया। यह कहना है सेना की 17 जाट रेजिमेंट की अल्फा कंपनी में शामिल रहे घिलोड़ कलां निवासी पूर्व हवलदार अजमेर सिंह का।
कारगिल युद्ध के गवाह बने हवलदार अजमेर सिंह ने बताया कि वह 1999 में श्रीनगर में तैनात थे। यहां से छह माह बाद ही बटालियन को होशियार सिंह मैदान में बुला लिया गया। यहां से कर्नल बीएस बाबा के नेतृत्व में कारगिल युद्ध में जाने का आदेश मिला। बटालियन के टेलीफोन से परिवार को इस बारे में बताया तो परिवार ने वहां जाने से इन्कार करते हुए घर वापस आने की बात कही।
इधर, कर्नल बीएस बाबा ने देश के लिए कुछ कर दिखाने का हौसला जगाया। इसके बाद पूरी टीम कारगिल युद्ध के लिए रवाना हो गई। हर टीम को अलग लक्ष्य मिला। हमारी कंपनी को पिंपल तीन व चार पर कब्जा करने का निर्देश मिला। यहीं टीम रुकी हुई थी। इस जगह को ऊपर से दुश्मन आसानी से देख रहा था।
विज्ञापन
टीम ने पिंपल तीन के लिए चढ़ाई शुरू की तो दुश्मन ने हमला कर दिया। टीम ने इधर-उधर छिपकर अपनी जान बचाई। इस हमले में एक साथी आंखों के सामने शहीद हो गया। टीम को फिर वहीं रुकने के आदेश दे दिए गए। इसके बाद अगले दिन एक साथी नहर पर पानी लेने गया। इसी समय आतंकवादी ने उस पर हमला कर दिया। संवाद
घायल जवान को नीचे लेकर पहुंचे तो हाथों में ही तोड़ दिया दम
चौथे दिन टीम ऊपर पहुंची तो उन पर हमला कर दिया। इसमें गोली लेने के कारण एक जवान घायल हो गए। कर्नल ने घायल जवान को इलाज के लिए नीचे ले जाने के आदेश दिए। रास्तेभर घायल जवान असहनीय पीड़ा के कारण खुद को गोली मारने की बात कहता रहा। उसे लेकर नीचे पहुंचे तो जवान ने उनके हाथों में ही दम तोड़ दिया। दुश्मन की गोलीबारी के कारण हम पांच दिन में ऊपर चढ़ पाए और जीत हासिल की। यहां से भारी मात्रा में दुश्मनों के हथियार भी बरामद हुए।
विज्ञापन
- 17 जाट रेजिमेंट की अल्फा कंपनी में शामिल घिलोड़ कलां के पूर्व हवलदार अजमेर सिंह ने कारगिल युद्ध का संस्मरण साझा किया
- ऊपर से दुश्मन बटालियन पर रख रहा था नजर, पहाड़ पर चढ़ता देख जवानों चलाते थे गोलियां
तुषार शर्मा
रोहतक। दुश्मन की दनादन चलती गोलियां। पिंपल तीन व चार की खड़ी चढ़ाई और कड़ाके की ठंड भी जवानों का हौसला नहीं डिगा पा रही थीं। ऊंचाई पर बैठा दुश्मन एक-एक करके हमारे साथियों को निशाना बना रहा था। हम रात के अंधेरे में रेंगकर आगे बढ़ते। दिन में बड़े पत्थरों की आड़ में छिपकर रात होने का इंतजार करते। पांच दिन में पहाड़ के ऊपर चढ़ पाए। इसके बाद दुश्मन को ढेर कर दिया। यह कहना है सेना की 17 जाट रेजिमेंट की अल्फा कंपनी में शामिल रहे घिलोड़ कलां निवासी पूर्व हवलदार अजमेर सिंह का।
कारगिल युद्ध के गवाह बने हवलदार अजमेर सिंह ने बताया कि वह 1999 में श्रीनगर में तैनात थे। यहां से छह माह बाद ही बटालियन को होशियार सिंह मैदान में बुला लिया गया। यहां से कर्नल बीएस बाबा के नेतृत्व में कारगिल युद्ध में जाने का आदेश मिला। बटालियन के टेलीफोन से परिवार को इस बारे में बताया तो परिवार ने वहां जाने से इन्कार करते हुए घर वापस आने की बात कही।
विज्ञापन
इधर, कर्नल बीएस बाबा ने देश के लिए कुछ कर दिखाने का हौसला जगाया। इसके बाद पूरी टीम कारगिल युद्ध के लिए रवाना हो गई। हर टीम को अलग लक्ष्य मिला। हमारी कंपनी को पिंपल तीन व चार पर कब्जा करने का निर्देश मिला। यहीं टीम रुकी हुई थी। इस जगह को ऊपर से दुश्मन आसानी से देख रहा था।
विज्ञापन
टीम ने पिंपल तीन के लिए चढ़ाई शुरू की तो दुश्मन ने हमला कर दिया। टीम ने इधर-उधर छिपकर अपनी जान बचाई। इस हमले में एक साथी आंखों के सामने शहीद हो गया। टीम को फिर वहीं रुकने के आदेश दे दिए गए। इसके बाद अगले दिन एक साथी नहर पर पानी लेने गया। इसी समय आतंकवादी ने उस पर हमला कर दिया। संवाद
घायल जवान को नीचे लेकर पहुंचे तो हाथों में ही तोड़ दिया दम
चौथे दिन टीम ऊपर पहुंची तो उन पर हमला कर दिया। इसमें गोली लेने के कारण एक जवान घायल हो गए। कर्नल ने घायल जवान को इलाज के लिए नीचे ले जाने के आदेश दिए। रास्तेभर घायल जवान असहनीय पीड़ा के कारण खुद को गोली मारने की बात कहता रहा। उसे लेकर नीचे पहुंचे तो जवान ने उनके हाथों में ही दम तोड़ दिया। दुश्मन की गोलीबारी के कारण हम पांच दिन में ऊपर चढ़ पाए और जीत हासिल की। यहां से भारी मात्रा में दुश्मनों के हथियार भी बरामद हुए।