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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में प्रवेश प्रक्रिया पर कोर्ट ने लगाया स्टे
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के इंटीग्रेटेड कोर्सों के लिए चल रही प्रवेश प्रक्रिया सवालों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है। अदालत में लगातार दर्ज हो चुके करीब एक दर्जन से ज्यादा केस व ज्यादातर में अदालत का विद्यार्थियों के पक्ष में रहना भी, यही दर्शा रहा है। इसके तहत अदालत ने अंग्रेजी विभाग की दाखिला प्रक्रिया पर अगले निर्देशों तक रोक लगा दी है। विवि के अधिकारियों को समन भी जारी किए गए हैं।
मंगलवार को विवि की दाखिला प्रक्रिया को लेकर दो और नए केस लेकर पीड़ित छात्राएं अदालत पहुंची। इसके साथ ही एमडीयू के खिलाफ दायर केसों की संख्या लगभग 15 पहुंच गई है। मंगलवार को छात्रा आरती ने अंग्रेजी विभाग में प्रवेश नहीं मिलने पर अदालत से न्याय की अपील की। छात्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने अंग्रेजी विभाग में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। विवि ने मेरिट सूची तैयार करते समय एनएसएस के अंक नहीं जोड़े। इस कारण उसका नाम सूची में नहीं आया। अदालत में छात्रा की ओर से छात्र नेता अधिवक्ता प्रदीप देशवाल ने केस की पैरवी की। अदालत के सामने विवि की दाखिला प्रक्रिया व एनएसएस के अंक नहीं जोड़ने की बात कही। अदालत ने इस पर विभाग की दाखिला प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए। अब इस केस की सुनवाई आठ सितंबर को होगी। यहां विवि के अधिकारियों को भी उनका पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। इधर, विधि विभाग की एक छात्रा ने अपना आवेदन रद्द होने की शिकायत के साथ न्याय की गुहार लगाई। छात्रा का दावा है कि उसने अपने दस्तावज ऑनलाइन आवेदन के साथ अपलोड किए थे। विवि ने आवेदन के साथ दस्तावेज अपलोड होने पर भी उन्हें नहीं दर्शा कर आवेदन रद्द कर दिया। इस कारण वह दाखिले से वंचित रह गई। अदालत ने इस मामले में तीन सितंबर को सुनवाई का समय दिया है। विवि को भी छात्रा के लिए राहत देने की बात कही है।
विवि के खिलाफ बढ़ रही केसों की संख्या
एमडीयू की ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया को लेकर अदालत में केसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अदालत में एक केस से हुई विरोध की शुरुआत जारी है। इसके चलते केसों की संख्या चार व अब इससे बढ़ कर एक दर्जन से अधिक पहुंच गई है।
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संगठन विद्यार्थियों की करेगा मदद
इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने कहा कि एमडीयू की दाखिला प्रक्रिया में ढेरों खामियां हैं। ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया को दुरुस्त नहीं करने की वजह से विद्यार्थियों के दस्तावेज या तो अपलोड नहीं हुए, या फिर अपलोड होने पर भी विवि को नहीं मिले। यह सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी है। इसके चलते विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण विद्यार्थियों को अदालत का सहारा लेना पड़ रहा है। अदालत में करीब 15 केस दायर हो चुके हैं। संगठन ऐसे विद्यार्थियों की हर संभव मदद करेगा।
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मंगलवार को विवि की दाखिला प्रक्रिया को लेकर दो और नए केस लेकर पीड़ित छात्राएं अदालत पहुंची। इसके साथ ही एमडीयू के खिलाफ दायर केसों की संख्या लगभग 15 पहुंच गई है। मंगलवार को छात्रा आरती ने अंग्रेजी विभाग में प्रवेश नहीं मिलने पर अदालत से न्याय की अपील की। छात्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने अंग्रेजी विभाग में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। विवि ने मेरिट सूची तैयार करते समय एनएसएस के अंक नहीं जोड़े। इस कारण उसका नाम सूची में नहीं आया। अदालत में छात्रा की ओर से छात्र नेता अधिवक्ता प्रदीप देशवाल ने केस की पैरवी की। अदालत के सामने विवि की दाखिला प्रक्रिया व एनएसएस के अंक नहीं जोड़ने की बात कही। अदालत ने इस पर विभाग की दाखिला प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए। अब इस केस की सुनवाई आठ सितंबर को होगी। यहां विवि के अधिकारियों को भी उनका पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। इधर, विधि विभाग की एक छात्रा ने अपना आवेदन रद्द होने की शिकायत के साथ न्याय की गुहार लगाई। छात्रा का दावा है कि उसने अपने दस्तावज ऑनलाइन आवेदन के साथ अपलोड किए थे। विवि ने आवेदन के साथ दस्तावेज अपलोड होने पर भी उन्हें नहीं दर्शा कर आवेदन रद्द कर दिया। इस कारण वह दाखिले से वंचित रह गई। अदालत ने इस मामले में तीन सितंबर को सुनवाई का समय दिया है। विवि को भी छात्रा के लिए राहत देने की बात कही है।
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विवि के खिलाफ बढ़ रही केसों की संख्या
एमडीयू की ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया को लेकर अदालत में केसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अदालत में एक केस से हुई विरोध की शुरुआत जारी है। इसके चलते केसों की संख्या चार व अब इससे बढ़ कर एक दर्जन से अधिक पहुंच गई है।
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संगठन विद्यार्थियों की करेगा मदद
इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने कहा कि एमडीयू की दाखिला प्रक्रिया में ढेरों खामियां हैं। ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया को दुरुस्त नहीं करने की वजह से विद्यार्थियों के दस्तावेज या तो अपलोड नहीं हुए, या फिर अपलोड होने पर भी विवि को नहीं मिले। यह सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी है। इसके चलते विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण विद्यार्थियों को अदालत का सहारा लेना पड़ रहा है। अदालत में करीब 15 केस दायर हो चुके हैं। संगठन ऐसे विद्यार्थियों की हर संभव मदद करेगा।