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Rohtak News: कोविड के बाद से ज्यादा सताने लगा खांसी-जुकाम

Tue, 02 May 2023 02:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 02 May 2023 02:46 AM IST
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Cough and cold started bothering more after Kovid
प्रो. राजेश गुप्ता ।
विकास सैनी
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रोहतक। कोविड-19 का दर्द रह-रह कर सता रहा है। संक्रमण के खतरे के बीच खांसी-जुकाम भी ज्यादा परेशान करने लगा है। हालात ये हैं कि सामान्य खांसी-जुकाम को भी ठीक होने में एक से दो माह का समय लग रहा है। कोविड के बाद यह समस्या लोगों में आम हो गई है। खांसी-जुकाम की यह स्थिति सही व पूरा इलाज नहीं मिलने पर अस्थमा या गंभीर बीमारी बन जाती है। विश्व अस्थमा दिवस पर पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) के चेस्ट एंड टीबी एवं रेस्पिरेट्री विभाग के प्रो. राजेश गुप्ता से अमर उजाला की बातचीत में यह सच सामने आया।
अस्थमा फेफड़ों की बीमारी है। इसका वैज्ञानिक या तकनीकी नाम एलर्जिक ब्राेंकाइटिस है। मानसिक तनाव इसकी एक वजह बताई गई है। पीजीआईएमएस के चेस्ट एंड टीबी विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां रोजाना औसतन 10 अस्थमा मरीज आ रहे हैं। पीसीसीएम (पल्मोनरी क्रिटिकल केयर मेडिसिन) यानी रेस्पिरेट्री विभाग के मरीज अलग हैं। अक्सर चिकित्सक अस्थमा को सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) मान कर इलाज करते हैं। ग्रामीण इलाकों में झोला छाप डॉक्टर अस्थमा या सीओपीडी का इलाज स्टेरॉयड ही मान लेते हैं। इसके चलते मरीज को स्टेरॉयड देकर अपना काम पूरा कर लेते हैं। इसके चलते मरीज पूरा इलाज लिए बगैर ही दवा छोड़ देता है। नतीजतन अस्थमा और गंभीर बन जाता है। गंभीर स्थिति में फेफड़े सिकुडने से उनकी क्षमता भी कम हो जाती है। इस कारण मरीज को सांस लेने व छोड़ने में भी तकलीफ होने लगती है। इसका इलाज संभव है। अस्थमा ठीक होने के बाद भी करीब तीन माह तक मरीज को दवा लेनी चाहिए।
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प्रदूषण है अस्थमा की बड़ी वजह
अस्थमा रोग मुख्यत: पारिवारिक यानी आनुवांशिक रोग है। इसके अलावा प्रदूषण भी इसकी बड़ी वजह है। इसमें उद्योगों, वाहनों, धूल कण व धुंआ शामिल है। ये अस्थमा के शुरुआती कारणों में नजर आते हैं। अस्थमा की संभावना वाले मरीजों को मौसम बदलने, फसली चक्र व धूल धुआं से बचकर रहने की जरूरत है। अस्थमा के लक्षणों में सामान्य खांसी से सांस रुकना तक शामिल है। ऐसे मरीज ठीक हो सकते हैं। इसके लिए पूरा इलाज लेना जरूरी है। इनहेलर ऐसे मरीजों के लिए राहत भरा है।
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यह उपाय अपनाएं मरीज
- मरीज अपने सांस की जांच जरूर कराएं।
- अस्थमा पीड़ित अपने रक्त की जांच कराए।
- परागकणों खासकर प्रदूषण से बच कर रहें।
- धूल, धुआं या दूषित वातावरण में न निकलें।
- अस्थमा मरीज अपना इनहेलर साथ जरूर रखें।
- घर से बाहर निकलने पर मास्क जरूर प्रयोग करें।

अस्थमा सांस की बीमारी है। कोविड के बाद से मरीजों को खांसी-जुकाम की समस्या अधिक लंबे समय तक रहने लगी है। कोविड का इलाज भी लंबे समय तक चलता है। कोविड के बाद अस्थमा केस कुछ बढ़े हैं। प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता अस्थमा मरीजों को प्रभावित करती है। ऐसे में उन्हें थोड़ी सावधनी बरतनी चाहिए।
प्रो. राजेश गुप्ता, चेस्ट एंड टीबी विभाग, पीजीआईएमएस।
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