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निगम ने किला रोड बाजार से स्थायी अतिक्रमण किया ध्वस्त
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किला रोड बाजार में शनिवार की सुबह अतिक्रमण हटाता नगर निगम का जेसीबी। अमर उजाला
- फोटो : RohtakCity
रोहतक। पहली बार शहर में तड़के चार बजे से नगर निगम ने किला रोड बाजार से स्थायी अतिक्रमण ध्वस्त किया। साढ़े पांच घंटे में दो जेसीबी से करीब 200 दुकानों के आगे तोड़फोड़ की गई। प्रधान ने दुकानदारों के साथ कड़ा विरोध किया मगर पुलिस की सख्ती के आगे एक नहीं चली। पुलिस ने बैरियर लगाकर दुकानदारों को सख्ती से बाजार से बाहर किया तब निर्विरोध ध्वस्तीकरण कार्रवाई हो सकी।
किला रोड बाजार की एक दुकान में सात अप्रैल को आग लगी। अतिक्रमण की वजह से दमकल को मौके पर पहुंचने में दिक्कत हुई। जिस पर एसडीएम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया। सीआरपीसी की धारा 133 के तहत नगर निगम को सख्ती से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। इस पर निगम प्रशासन ने बाजार में नोटिस बोर्ड लगवाकर 15 अप्रैल तक स्वयं अतिक्रमण हटाने की दुकानदारों को हिदायत दी और हर दुकानदार को पर्चे बांटे। वहीं, दूसरी तरफ निगम ने जिला व पुलिस प्रशासन के साथ सख्ती से ध्वस्तीकरण अभियान की ठोस रणनीति बनाई। उपायुक्त ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट कनब लाकड़ा तैनात करके पर्याप्त पुलिस बल मुहैया कराने के निर्देश दिए। रणनी ति के तहत निगम आयुक्त ने ध्वस्तीकरण अभियान का नोडल अधिकारी डीएमसी हरदीप को बनाया।
शनिवार तड़के साढ़े तीन बजे भिवानी स्टैंड पर डीएमसी हरदीप, संयुक्त नगर आयुक्त महेश कुमार, अधिशासी अभियंता हेडक्वार्टर मनजीत दहिया, भूमि अधिकारी सुरेंद्र गोयल अधीनस्थों और करीब 80 निगम कर्मियों के साथ पहुंचे। कुछ देर में पुरानी सब्जी मंडी थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह काफी संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंचे। निगम टीम ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स के साथ किला रोड बाजार पहुंची। इसकी भनक लगते ही किला रोड मार्केट एसोसिएशन के प्रधान बिट्टू सचदेवा कई दुकानदारों के साथ पहुंचकर कड़ा विरोध करने लगे। तभी सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल पहुंचे और दुकानदारों के पक्ष में खड़े होकर पीली पट्टी के बाहर का अतिक्रमण हटाने का दबाव बनाने लगे। जब विरोध के स्वर बढ़ने लगे तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने विरोध कर रहे प्रधान व दुकानदारों को बैरियर लगाकर सख्ती से बाहर कर दिया। इसके साथ ही दो जेसीबी की मदद से ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया, जो सुबह शहीद भगत सिंह पार्किंग पर सुबह करीब साढ़े नौ बजे जाकर पूरा हुआ। निगम टीम का दावा है कि किला रोड बाजार की करीब 200 दुकानों से आगे से स्थायी अतिक्रमण तोड़ा गया है। वहीं, दूसरी तरफ बैरियर के बाहर खड़े होकर दुकानदार जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे मगर अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा।
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ठिठके तो अफसरों ने फोन से दी बूस्टर डोज
सीनियर डिप्टी मेयर के साथ व्यापारी नेताओं ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया। सीनियर डिप्टी मेयर ने निगम अधिकारियों से सवाल किया कि मुझे क्यों नहीं अभियान के बारे में बताया। यदि कार्रवाई करनी है, तो एक-दो फुट की जगह छोड़कर करें। ये बात सुनकर निगम अधिकारी कार्रवाई के नाम पर ठिठकने लगे। जब मामला कैंप कार्यालयों से अभियान की मॉनीटरिंग कर रहे अफसरों को पता चला तो उन्होंने फोन पर ही बात करके सख्त निर्देश दिए। इसका परिणाम रहा कि पांच मिनट के अंदर विरोध करने वाले दुकानदारों को बैरियर से बाहर करके तोड़फोड़ शुरू कर दी गई।
टूटने के साथ ही उठाया लोहा और मलबा
निगम ने करीब आठ ट्रैक्टर-ट्रॉली और कर्मचारी लगा रखे थे। जैसे ही जेसीबी स्थायी अतिक्रमण ध्वस्त करता वैसे ही निगम कर्मी लोहा और मलबे को उठाकर ट्रॉली में डाल लेते। जिसकी वजह से ध्वस्तीकरण के बावजूद लोगों को आवागमन में कोई दिक्कत नहीं हुई।
सख्ती हुई तो विरोध छोड़ सामान बचाने में लगे
प्रशासन की सख्ती का परिणाम यह हुआ कि विरोध कर रहे दुकानदार भागकर अपनी दुकान पर पहुंचे और स्वयं अपना सामान समेटने में जुट गए।
तमाशबीनों की सड़क पर लगा जमावड़ा
दिन निकलने के बाद किला रोड बाजार के बाहर तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई। कोई बाजार में आने पर होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए प्रशासन की ध्वस्तीकरण कार्रवाई को उचित ठहरा रहा था तो कोई गलत।
धरने पर बैठे दुकानदार, शाम चार बजे खत्म
निगम की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में प्रधान बिट्टू सचदेवा, राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेशाध्यक्ष गुलशन डंग ने व्यापारियों के साथ धरना करीब 11 बजे से शुरू किया, जो शाम चार बजे खत्म हो गया। प्रधान बिट्टू सचदेवा ने बताया कि मेयर ने मौके पर आकर उपायुक्त से बात करके समस्या से समाधान का भरोसा दिया जिससे धरना खत्म कर दिया है।
इसलिए असरदार है सीआरपीसी की धारा 133
सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) की धारा 133 में सब डिविजनल मजिस्ट्रेट को शक्ति मिली है। किसी लोक स्थान या मार्ग पर कोई विधि विरुद्ध बाधा डालता है अथवा अग्निकांड या विस्फोट होने पर रास्ता नहीं मिलता है, तो उसे तत्काल हटाया जाता है। कब्जा करने वाले को सशर्त तय समय में बाधा हटानी होती है अन्यथा प्रशासन कार्रवाई करता है।
आरके खुल्लर व अशोक यादव ने चलाया था बड़ा अभियान
व्यापारियों का कहना है कि तत्कालीन उपायुक्त आरके खुल्लर व अशोक यादव ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था, मगर वह भी दिन में चला था। तड़के चार बजे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पहली बार हुई थी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन उपायुक्त ने न सिर्फ सख्ती से अतिक्रमण हटवाया था बल्कि दुकानों के आगे ग्रिल भी लगवा दी थी ताकि अतिक्रमण नहीं हो।
ये कहना है व्यापारी संगठन के प्रधानों का
अतिक्रमण के पक्ष में नहीं हैं मगर जिस तरह के अभियान चलाया है, उसका विरोध है। कई बाजार हैं, जहां निकलने तक का रास्ता नहीं है, वह नहीं दिखता प्रशासन को। प्रशासन के कहने पर अतिक्रमण हटा लिया फिर भी ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
- बिट्टू सचदेव, प्रधान किला रोड मार्केट एसोसिएशन
एकतरफा कार्रवाई नहीं करके पूरे शहर में सुधार की जरूरत है। बाजार खुला होगा तो सुविधाएं बढ़ेंगी। हम क्यों नहीं समझते हैं कि सड़क पब्लिक के लिए है। रास्ते घेर लेने से न सिर्फ माल के आवागमन में दिक्कत होती है बल्कि लोग भी परेशान होते हैं।
- गुलशन निझावन, प्रधान पालिका बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन
हम भी नहीं चाहते कि बाजारों में अतिक्रमण हो। प्रशासन को पीली पट्टी खींच देनी चाहिए ताकि दुकानदार उसके आगे नहीं बढ़े। पट्टी खींचने की बात को अनसुना कर दिया। दुकानों को तोड़ना नहीं चाहिए, दुकानदारों से सहयोग लेकर समस्या का निदान करते।
- गुलशन डंग, प्रदेशाध्यक्ष राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन
जिला प्रशासन ने अंधेरे में ध्वस्तीकरण करके अनुचित किया है, जिसको लेकर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। ये हकीकत है कि राजनीतिक दबाव के चलते सड़क व शहर का अतिक्रमण प्रशासन को नहीं दिखता है। जलभराव से तंग आकर दुकानदारों ने सीढ़ियां बनवाई थीं।
- हेमंत बख्शी, प्रधान रोहतक ट्रेडर्स एसोसिएशन
वर्जन
मैं व्यापारियों से मिलने गया था। उनमें रोष हैं और ध्वस्तीकरण से नुकसान भी हुआ है। उपायुक्त से बात करेंगे ताकि सहयोग से और बिना नुकसान अतिक्रमण हटाया जाए।
-मनमोहन गोयल, मेयर
अतिक्रमण हटाने के लिए दुकानदारों से सहयोग मांगा था। उनसे स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए रहा गया था मगर उन्होंने नहीं हटाया। मजबूरन स्थायी अतिक्रमण हटाया है।
- डॉ. नरहरि बांगड़, आयुक्त नगर निगम
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किला रोड बाजार की एक दुकान में सात अप्रैल को आग लगी। अतिक्रमण की वजह से दमकल को मौके पर पहुंचने में दिक्कत हुई। जिस पर एसडीएम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया। सीआरपीसी की धारा 133 के तहत नगर निगम को सख्ती से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। इस पर निगम प्रशासन ने बाजार में नोटिस बोर्ड लगवाकर 15 अप्रैल तक स्वयं अतिक्रमण हटाने की दुकानदारों को हिदायत दी और हर दुकानदार को पर्चे बांटे। वहीं, दूसरी तरफ निगम ने जिला व पुलिस प्रशासन के साथ सख्ती से ध्वस्तीकरण अभियान की ठोस रणनीति बनाई। उपायुक्त ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट कनब लाकड़ा तैनात करके पर्याप्त पुलिस बल मुहैया कराने के निर्देश दिए। रणनी ति के तहत निगम आयुक्त ने ध्वस्तीकरण अभियान का नोडल अधिकारी डीएमसी हरदीप को बनाया।
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शनिवार तड़के साढ़े तीन बजे भिवानी स्टैंड पर डीएमसी हरदीप, संयुक्त नगर आयुक्त महेश कुमार, अधिशासी अभियंता हेडक्वार्टर मनजीत दहिया, भूमि अधिकारी सुरेंद्र गोयल अधीनस्थों और करीब 80 निगम कर्मियों के साथ पहुंचे। कुछ देर में पुरानी सब्जी मंडी थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह काफी संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंचे। निगम टीम ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स के साथ किला रोड बाजार पहुंची। इसकी भनक लगते ही किला रोड मार्केट एसोसिएशन के प्रधान बिट्टू सचदेवा कई दुकानदारों के साथ पहुंचकर कड़ा विरोध करने लगे। तभी सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल पहुंचे और दुकानदारों के पक्ष में खड़े होकर पीली पट्टी के बाहर का अतिक्रमण हटाने का दबाव बनाने लगे। जब विरोध के स्वर बढ़ने लगे तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने विरोध कर रहे प्रधान व दुकानदारों को बैरियर लगाकर सख्ती से बाहर कर दिया। इसके साथ ही दो जेसीबी की मदद से ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया, जो सुबह शहीद भगत सिंह पार्किंग पर सुबह करीब साढ़े नौ बजे जाकर पूरा हुआ। निगम टीम का दावा है कि किला रोड बाजार की करीब 200 दुकानों से आगे से स्थायी अतिक्रमण तोड़ा गया है। वहीं, दूसरी तरफ बैरियर के बाहर खड़े होकर दुकानदार जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे मगर अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा।
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सीनियर डिप्टी मेयर के साथ व्यापारी नेताओं ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया। सीनियर डिप्टी मेयर ने निगम अधिकारियों से सवाल किया कि मुझे क्यों नहीं अभियान के बारे में बताया। यदि कार्रवाई करनी है, तो एक-दो फुट की जगह छोड़कर करें। ये बात सुनकर निगम अधिकारी कार्रवाई के नाम पर ठिठकने लगे। जब मामला कैंप कार्यालयों से अभियान की मॉनीटरिंग कर रहे अफसरों को पता चला तो उन्होंने फोन पर ही बात करके सख्त निर्देश दिए। इसका परिणाम रहा कि पांच मिनट के अंदर विरोध करने वाले दुकानदारों को बैरियर से बाहर करके तोड़फोड़ शुरू कर दी गई।
टूटने के साथ ही उठाया लोहा और मलबा
निगम ने करीब आठ ट्रैक्टर-ट्रॉली और कर्मचारी लगा रखे थे। जैसे ही जेसीबी स्थायी अतिक्रमण ध्वस्त करता वैसे ही निगम कर्मी लोहा और मलबे को उठाकर ट्रॉली में डाल लेते। जिसकी वजह से ध्वस्तीकरण के बावजूद लोगों को आवागमन में कोई दिक्कत नहीं हुई।
सख्ती हुई तो विरोध छोड़ सामान बचाने में लगे
प्रशासन की सख्ती का परिणाम यह हुआ कि विरोध कर रहे दुकानदार भागकर अपनी दुकान पर पहुंचे और स्वयं अपना सामान समेटने में जुट गए।
तमाशबीनों की सड़क पर लगा जमावड़ा
दिन निकलने के बाद किला रोड बाजार के बाहर तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई। कोई बाजार में आने पर होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए प्रशासन की ध्वस्तीकरण कार्रवाई को उचित ठहरा रहा था तो कोई गलत।
धरने पर बैठे दुकानदार, शाम चार बजे खत्म
निगम की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में प्रधान बिट्टू सचदेवा, राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेशाध्यक्ष गुलशन डंग ने व्यापारियों के साथ धरना करीब 11 बजे से शुरू किया, जो शाम चार बजे खत्म हो गया। प्रधान बिट्टू सचदेवा ने बताया कि मेयर ने मौके पर आकर उपायुक्त से बात करके समस्या से समाधान का भरोसा दिया जिससे धरना खत्म कर दिया है।
इसलिए असरदार है सीआरपीसी की धारा 133
सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) की धारा 133 में सब डिविजनल मजिस्ट्रेट को शक्ति मिली है। किसी लोक स्थान या मार्ग पर कोई विधि विरुद्ध बाधा डालता है अथवा अग्निकांड या विस्फोट होने पर रास्ता नहीं मिलता है, तो उसे तत्काल हटाया जाता है। कब्जा करने वाले को सशर्त तय समय में बाधा हटानी होती है अन्यथा प्रशासन कार्रवाई करता है।
आरके खुल्लर व अशोक यादव ने चलाया था बड़ा अभियान
व्यापारियों का कहना है कि तत्कालीन उपायुक्त आरके खुल्लर व अशोक यादव ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था, मगर वह भी दिन में चला था। तड़के चार बजे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पहली बार हुई थी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन उपायुक्त ने न सिर्फ सख्ती से अतिक्रमण हटवाया था बल्कि दुकानों के आगे ग्रिल भी लगवा दी थी ताकि अतिक्रमण नहीं हो।
ये कहना है व्यापारी संगठन के प्रधानों का
अतिक्रमण के पक्ष में नहीं हैं मगर जिस तरह के अभियान चलाया है, उसका विरोध है। कई बाजार हैं, जहां निकलने तक का रास्ता नहीं है, वह नहीं दिखता प्रशासन को। प्रशासन के कहने पर अतिक्रमण हटा लिया फिर भी ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
- बिट्टू सचदेव, प्रधान किला रोड मार्केट एसोसिएशन
एकतरफा कार्रवाई नहीं करके पूरे शहर में सुधार की जरूरत है। बाजार खुला होगा तो सुविधाएं बढ़ेंगी। हम क्यों नहीं समझते हैं कि सड़क पब्लिक के लिए है। रास्ते घेर लेने से न सिर्फ माल के आवागमन में दिक्कत होती है बल्कि लोग भी परेशान होते हैं।
- गुलशन निझावन, प्रधान पालिका बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन
हम भी नहीं चाहते कि बाजारों में अतिक्रमण हो। प्रशासन को पीली पट्टी खींच देनी चाहिए ताकि दुकानदार उसके आगे नहीं बढ़े। पट्टी खींचने की बात को अनसुना कर दिया। दुकानों को तोड़ना नहीं चाहिए, दुकानदारों से सहयोग लेकर समस्या का निदान करते।
- गुलशन डंग, प्रदेशाध्यक्ष राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन
जिला प्रशासन ने अंधेरे में ध्वस्तीकरण करके अनुचित किया है, जिसको लेकर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। ये हकीकत है कि राजनीतिक दबाव के चलते सड़क व शहर का अतिक्रमण प्रशासन को नहीं दिखता है। जलभराव से तंग आकर दुकानदारों ने सीढ़ियां बनवाई थीं।
- हेमंत बख्शी, प्रधान रोहतक ट्रेडर्स एसोसिएशन
वर्जन
मैं व्यापारियों से मिलने गया था। उनमें रोष हैं और ध्वस्तीकरण से नुकसान भी हुआ है। उपायुक्त से बात करेंगे ताकि सहयोग से और बिना नुकसान अतिक्रमण हटाया जाए।
-मनमोहन गोयल, मेयर
अतिक्रमण हटाने के लिए दुकानदारों से सहयोग मांगा था। उनसे स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए रहा गया था मगर उन्होंने नहीं हटाया। मजबूरन स्थायी अतिक्रमण हटाया है।
- डॉ. नरहरि बांगड़, आयुक्त नगर निगम