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Rohtak News: धार की भोजशाला में अखंड पूजा-अर्चना 23 से
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19जेएनडी05: राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़वाला
नरवाना। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला सरस्वती मंदिर में भारत तिब्बत समन्वय संघ की ओर से 23 जनवरी से अखंड पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी भारत तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय मंत्री राजेंद्र गुप्ता अमरगढ़ वाला ने दी।
अमरगढ़ वाला ने बताया कि 995 वर्ष पूर्व राजा भोज की ओर से वर्ष 1031 ई. में निर्मित यह स्थल मां सरस्वती का प्रमुख शिक्षा व अध्ययन केंद्र रहा है, जहां एक समय में हजारों विद्यार्थी ज्ञान अर्जन किया करते थे।
राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह विद्या मंदिर हिंदू आस्था का बड़ा केंद्र था जिसके बाद मुगल शासक खिलजी की ओर से मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुगल काल में कई ऐसे मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जो भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक पहचान के प्रतीक थे।
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उन्होंने यह भी बताया कि राजा भोज की ओर से स्थापित वाग्देवी मां सरस्वती की मूर्ति को अंग्रेज शासक इंग्लैंड ले गए थे जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में है। इंग्लैंड सरकार की ओर से उस मूर्ति को भारत को लौटाने का आश्वासन दिया गया है।
राष्ट्रीय मंत्री ने बताया कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर भारत तिब्बत समन्वय संघ, विभिन्न हिंदू संगठनों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद सहित लाखों श्रद्धालुओं के साथ भोजशाला परिसर में यज्ञ-हवन व पूजा-अर्चना करेगा। राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि संघ का मुख्य लक्ष्य कैलाश मानसरोवर को चीन के नियंत्रण से मुक्त कराना है।
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अमरगढ़ वाला ने बताया कि 995 वर्ष पूर्व राजा भोज की ओर से वर्ष 1031 ई. में निर्मित यह स्थल मां सरस्वती का प्रमुख शिक्षा व अध्ययन केंद्र रहा है, जहां एक समय में हजारों विद्यार्थी ज्ञान अर्जन किया करते थे।
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राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह विद्या मंदिर हिंदू आस्था का बड़ा केंद्र था जिसके बाद मुगल शासक खिलजी की ओर से मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुगल काल में कई ऐसे मंदिरों को नुकसान पहुंचाया जो भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक पहचान के प्रतीक थे।
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उन्होंने यह भी बताया कि राजा भोज की ओर से स्थापित वाग्देवी मां सरस्वती की मूर्ति को अंग्रेज शासक इंग्लैंड ले गए थे जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में है। इंग्लैंड सरकार की ओर से उस मूर्ति को भारत को लौटाने का आश्वासन दिया गया है।
राष्ट्रीय मंत्री ने बताया कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर भारत तिब्बत समन्वय संघ, विभिन्न हिंदू संगठनों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद सहित लाखों श्रद्धालुओं के साथ भोजशाला परिसर में यज्ञ-हवन व पूजा-अर्चना करेगा। राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि संघ का मुख्य लक्ष्य कैलाश मानसरोवर को चीन के नियंत्रण से मुक्त कराना है।